दक्षिण भारत के सुपर स्टार रजनीकांत के बारे में जल्द ही राजनीति में शामिल होने के कयास लगाए जा रहे हैं। कयास तो लगाए जा रहे हैं लेकिन उन्होंने अभी राजनीति में शामिल होने पर सीधे संकेत नहीं दिए हैं। हालांकि, मीडिया से बातचीत के दौरान रजनीकांत ने कहा था कि मैं इस साल सितंबर-अक्टूबर में अपने फैन्स से मुलाकात करूंगा और जब भी मैं राजनीति में शामिल होने का फैसला लूंगा, तब सारे सवालों का जवाब दे दूंगा। इसमें कोई दो राय नहीं है कि रजनीकांत तमिलनाडु के लिए करिश्माई व्यक्तित्व है। यूं कहें तो रजनीकांत तमिल लोगों का 'थलाइवा' है।
मालूम हो कि इससे पहले रजनीकांत ने चेन्नई में फैंस की भीड़ को संबोधित करते हुए कहा था कि राजनीति में अच्छे नेता मौजूद हैं, पर व्यवस्था में भ्रष्टाचार है। साथ ही उन्होंने यह भी कहा था कि यह उनके राजनीति में आने का उपयुक्त समय नहीं है। वे ये भी कह चुके है कि अगर ईश्वर की मर्जी होगी तो मैं राजनीति में आऊंगा। रजनीकांत ने कहा था कि जब भी कोई युद्ध आएगा तो वे अपनी मातृभूमि की रक्षा के फौरन आगे आएंगे। उन्होंन अपने प्रशंसकों से कहा, 'मेरे पास धैर्य है, काम और अपना कर्तव्य, आप सब के पास भी। अपना काम करो और अपनी बारी आने का इंतजार करो। जब युद्ध होता तो हम मिलकर सामना करेंगे।' उन्होंने कहा, 'यदि भगवान की इच्छा है, तो मैं राजनीति में प्रवेश करूंगा।'
इसी बीच रजनीकांत के राजनीति में आने की चर्चाओं को लेकर बीजेपी नेता सुब्रमण्यम स्वामी ने उनपर तंज कसते हुए कहा, 'रजनीकांत राजनीति के लिए अशिक्षित और अयोग्य हैं।'
इस पर अमर उजाला डॉट.कॉम ने पोल कराया और पाठकों से सवाल पूछा कि 'क्या रजनीकांत के राजनीति में एंट्री लेने से तमिलनाडु की सियासत पूरी तरह से बदल सकती है?' इस सवाल के जवाब में पाठकों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया।
कुल 9,960 पाठकों ने पोल में हिस्सा लिया। पोल में सबसे अधिक 73.18 फीसदी यानि 7,289 पाठकों ने माना कि रजनीकांत के राजनीति में एंट्री लेने से तमिलनाडु की सियासत पूरी तरह से बदल सकती है। 20.93 फीसदी यानि 2,085 पाठकों ने नहीं मान कि रजनीकांत के राजनीति में एंट्री लेने से तमिलनाडु की सियासत पूरी तरह से बदल सकती है। वहीं, 5.88 फीसदी यानि 586 पाठकों ने कह नहीं सकते विकल्प को चुना।