सबरीमाला मंदिर पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले के खिलाफ सोमवार को तिरुअनंतपुरम में हजारों भाजपा कार्यकर्ताओं ने सचिवालय तक मार्च किया। कार्यकर्ताओं का यह मार्च पिछले सप्ताह पंडालम से तब शुरू हुआ जब राज्य की पी विजयन सरकार ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले के खिलाफ रिव्यू पिटीशन लगाने की बजाए उसे लागू करने का फैसला किया।
भाजपा का आरोप है कि राज्य सरकार ने भगवान अयप्पा के श्रद्धालुओं की भावनाओं का ख्याल नहीं रखा। 17 नवंबर से शुरू हो रहे तीन महीने के मंडलम मकरविलक्कू तीर्थाटन सीजन की तैयारी के लिए बुलाई है। इस बैठक में शीर्ष अदालत के हाल के फैसले पर भी चर्चा होने की संभावना है। महिलाओं और बच्चों समेत बड़ी संख्या में भाजपा कार्यकर्ताओं ने भगवान अयप्पा का मंत्रोच्चार करते हुए राज्य सचिवालय की ओर मार्च किया।
इसी विषय पर अमर उजाला डॉट कॉम ने ऑनलाइन पोल में अपने पाठकों से सवाल पूछा था 'सबरीमाला मंदिर मामले में सर्वोच्च न्यायालय द्वारा दिये गए फैसले के खिलाफ क्या आंदोलन करना उचित है?'
पोल के जवाब में हमें कुल 3,096 वोट मिले। इनमें 59.95 फीसदी (1,856 वोट) पाठकों ने माना कि सबरीमाला मंदिर मामले में सुप्रीम कोर्ट के फैसले के खिलाफ आंदोलन करना उचित नहीं है, जबकि 40.05 फीसदी (1,240 वोट) पाठकों ने कहा कि सबरीमाला मंदिर मामले में सुप्रीम कोर्ट के फैसले के खिलाफ आंदोलन को जायज ठहराया है।