राष्ट्रीय लोकदल के अध्यक्ष अजित सिंह ने केंद्र सरकार की कृषि नीतियों पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने आरोप लगाया है कि मोदी सरकार एमएसपी के नाम पर किसानों को ठग रही है। अजित सिंह ने अमर उजाला से बातचीत में कहा कि, सरकार लागत की गणना एक साल पहले करती है, लेकिन किसानों को दाम अगले साल दिया जाता है। उन्होंने कहा कि डीजल, खाद और बिजली की दरो में लगातार बढ़ोतरी हो रही है, जिससे किसान की लागत बढ़ रही है।
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि सरकार न्यूनतम समर्थन मूल्य की घोषणा तो करती है, लेकिन फसल खरीदारी के लिए उसके पास कोई इंतजाम नहीं होता है। उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार व्यापारियों के हाथों में खेल रही है।
उन्होंने कहा कि तीन साल पहले कृषि मंत्री ने संसद में ऐलान किया था कि इस बार गेहूं की बंपर फसल होगी, लेकिन सरकार ने आयात पर 30 फीसदी ड्यूटी को क्रमश घटा कर दस फीसदी से जीरो कर दिया। जिसके चलते आज भी लाखों टन गेहूं गोदामों में भरा पड़ा है और खामियाजा किसानों को भुगतना पड़ रहा है।
उन्होंने कहा कि देश में हमेशा से दालों की कमी रही है और यही वजह रही है कि इसे विदेश से आयात करना पड़ता है। बंपर फसल होने के बावजूद सरकार विदेशों से 20 लाख टन दाल आयात कर रही है।