केंद्र सरकार के नोट बैन के फैसले के बाद हर तरफ अफरातफरी है। बैंकों के बाहर लंबी लाइनें लगी हैं तो रोजाना नौकरी के लिए घर से निकलने वाले लोग भी परेशान हैं। किसी को बस का टिकट लेने के लिए जूझना पड़ रहा है तो कोई ऑटो-टैक्सी वालों को समझाने में मशक्कत कर रहा है। रोजमर्रा की जरूरत के सामान के लिए भी लोग नकद से ज्यादा उधारी के भरोसे हैं तो बड़े बाजारों में सुस्ती का आलम है। हालांकि कालाधन खत्म करने के सरकार के इस निर्णय को आम जनता ने सकारात्मक नजरिए से ही लिया है जिससे सरकार और उसके कारिंदे भी उत्साहित हैं। बावजूद इसके रह-रहकर एक सवाल लगातार उठ रहा है कि क्या सरकार ने इतना बड़ा कदम बिना मुकम्मल तैयारियों के यानि आधी-अधूरी तैयारियों के साथ ही उठा लिया?
इन तमाम बातों को ध्यान में रखते हुए अमर उजाला ने पोल कराया। पोल में पाठकों से सवाल पूछा गया कि क्या आधी-अधूरी तैयारियों के साथ सरकार ने नोट वापस लेने का निर्णय लिया?
इस सवाल के जवाब नें पाठकों ने बढ़-चढ़कर अपनी राय रखी। सबसे ज्यादा 50.78 फीसदी (7356) पाठकों ने माना कि सरकार को और ज्यादा तैयारियों के साथ नोट बैन का फैसला लेना चाहिए था। आधी-अधूरी तैयारियों के चलते लिए गया फैसला जनता के लिए सिरदर्द बन रहा है। वहीं, सरकार के समर्थन के जवाब में कांटे की टक्कर रही। 45.79 फीसदी (6632) पाठकों ने कहा कि सरकार ने पूरी तैयारियों के साथ नोट वापस लेने का फैसला लिया है। 3.43 फीसदी (497) पाठकों ने कहा कि कह नहीं सकते। पोल में कुल 14485 पाठकों ने हिस्सा लिया।