हमेशा की तरह राष्ट्रीय खेल पुरस्कार इस बार भी विवादों में घिरने जा रहे हैं। देश के सर्वोच्च खेल सम्मान राजीव गांधी खेल रत्न नहीं दिए जाने पर पहलवान बजरंग पूनिया ने नाराजगी जताई है। बजरंग का कहना है कि उन्हें जब लगा कि वह इस अवार्ड के योग्य हो गए हैं तब उन्होंने पहली बार इसके लिए आवेदन किया। उनके अंक भी बन रहे थे बावजूद इसके उन्हें नजरअंदाज किया गया है। वह पहले खेल मंत्री राज्यवर्धन सिंह राठौड़ से अवार्ड दिए जाने के लिए गुहार लगाएंगे। अगर फिर भी सुनवाई नहीं हुई तो उन्हें हक की लड़ाई के लिए अदालत का सहारा लेना पड़ेगा।
खेल रत्न के लिए इस बार 17 खिलाडियों ने दावा ठोका था। कमेटी ने विराट कोहली और मीराबाई चानू का इस अवार्ड केलिए चयन किया है। बजरंग का कहना है कि उन्हें दूसरे नामों से दिक्कत नहीं है, लेकिन उन्हें उनका नाम नहीं चुने जाने पर बेहद हैरानी हुई है। वल्र्ड चैंपियनशिप के लिए बंगलूरू में तैयारियां कर रहे बजरंग का कहना है कि उन्हें उम्मीद है कि वह खेल मंत्री एक खिलाड़ी होने के नाते उनके साथ हुई नाइंसाफी को समझेंगे। वह बुधवार को दिल्ली आकर खेल मंत्री से मिलने की कोशिश करेंगे।
अमर उजाला डॉट कॉम ने इस मुद्दे पर ऑनलाइन पोल कराया था कि 'क्या खेल रत्न पुरस्कार के लिए बजरंग पूनिया की मांग उचित है?' इस पर 72.55 प्रतिशत लोगों का मानना है कि खेल रत्न पुरस्कार के लिए बजरंग पूनिया की मांग उचित है। वहीं, 27.45 प्रतिशत लोगों ने कहा कि खेल रत्न पुरस्कार के लिए बजरंग पूनिया की मांग उचित नहीं है।