महाराष्ट्र में सियासी उठापटक के बीच शिवसेना का भविष्य क्या होगा, इस बारे में चर्चा जोरों पर है। पूर्व सीएम उद्धव ठाकरे और मौजूदा मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के गुट के बीच शिवसेना पर हक को लेकर बवाल मचा हुआ है। विधानसभा में बहुमत परीक्षण के दौरान भी दोनों गुटों ने व्हिप जारी कर पार्टी पर दावा पेश किया था। फिलहाल मामला सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन है।
इस बीच अमर उजाला ने शिवसेना के भविष्य को लेकर एक सर्वे किया है। अमर उजाला ने अपने पाठकों से पूछा कि क्या अब राज ठाकरे को आगे बढ़ कर शिवसेना की बागडोर संभालनी चाहिए? अमर उजाला के इस सर्वे में 55 हजार लोगों ने अपने प्रतिक्रिया दी है।
80 फीसदी लोगों की राय राज ठाकरे के पक्ष में
अमर उजाला ने अपने यूट्यूब चैनल पर दो ऑनलाइन सर्वे किए। इसमें हमने लोगों से सवाल किया था कि "क्या राज ठाकरे को शिवसेना की कमान संभालनी चाहिए?" पोल में हमने पाया कि करीब 80 फीसदी लोग मानते हैं कि राज ठाकरे को शिवसेना की बागडोर संभालनी चाहिए। वहीं, 20 फीसदी लोग इसके पक्ष में नहीं थे।
अमर उजाला के इस पोल पर देशभर के लोगों ने अपनी प्रतिक्रिया दी। महाराष्ट्र समेत कई राज्यों के लोगों ने इस सर्वे पर कमेंट करते हुए अपनी राय रखी।... पहले सर्वे में 78% लोगों ने राज ठाकरे के समर्थन में वोट किया। वहीं, 22% लोगों ने विरोध में राय दी। वहीं, दूसरे सर्वे में 80% लोगों ने राज ठाकरे के समर्थन में अपना मत दिया। आपको बता दें कि इन दोनों सर्वे में 15 लाख से ज्यादा लोग जुड़े वहीं, 55 हजार लोगों ने सक्रिय रूप से अपनी राय रखी।
जानिए सर्वे में हिस्सा लेते हुए लोगों ने क्या कहा?
हरीश जोशी ने लिखा कि हां, महाराष्ट्र में शिवसेना प्रमुख राज ठाकरे साहेब को बनाना चाहिए। राज ठाकरे साहेब ही बालासाहेब ठाकरे जी के विचारों पर चल रहे हैं। जीतू पुरोहित ने लिखा कि संजय राउत और शरद पवार दोनों ने मिलकर शिवसेना को खत्म किया क्योंकि राउत को कोई अच्छा मंत्री पद नहीं दिया गया। राज साहेब ही बाला साहेब के विचारों को आगे बढ़ा सकते हैं।
निशा चौधरी ने बाला साहेब के पुराने बयान को याद करते हुए लिखा कि बाला साहेब ने कहा था कि चाहे कुछ हो जाए, मैं अपनी पार्टी का कांग्रेसीकरण नहीं होने दूंगा और जिस दिन मुझे लगा कि ऐसा हो रहा है तो मैं अपनी दुकान बंद कर दूंगा। सत्ता के लालच और अहंकार में बाला साहेब के हिंदुत्व से समझौता कर बाला साहेब के ही विरोधियों से गठबंधन करने वाले उद्दव ठाकरे के पास शिवसेना चलाने का कोई नैतिक आधार नहीं बचा।
दिनेश चव्हाण लिखते हैं कि उद्धव ठाकरे और राज ठाकरे को एकजुट हो जाना चाहिए। ऐसे में भाजपा और शिंदे गुट को बड़ा झटका लगेगा। अगर पार्टी को बचाना है तो दोनों को साथ आ जाना चाहिए। अनिल नंदेश्वर ने लिखा कि शिवसेना सिर्फ उद्धव बालासाहेब ठाकरे की है। सतीश ने लिखा कि सिर्फ राज ठाकरे ही हैं, जो शिवसेना को अपने दम पर फिर से खड़ा कर सकते हैं और बागी विधायकों के एक साथ ला सकते हैं।
जैश नाम ने लिखा कि राज ठाकरे को एमएनएस का शिवसेना में विलय कर देना चाहिए और शिवसेना को एक पारिवारिक पार्टी की बजाय एक लोकतांत्रिक पार्टी बनाना चाहिए। संध्या पराबी ने लिखा कि माननीय राज ठाकरे साहेब ही हृदयसम्राट बालासाहेब की राजनीति के असली वारिस हैं। रवि महाजन ने कहा कि राज ठाकरे ही शिवसेना के असली हकदार हैं, उद्धव ठाकरे पार्टी को नहीं चला सकते।