65.92 फीसदी लोगों को कहना है कि हां, संयुक्त राष्ट्र महासभा में अपने भाषण से पीएम मोदी आतंकवाद के मुद्दे पर दुनिया भर के देशों को एकजुट करने में कामयाब हुए हैं। वहीं, 34.08 फीसदी लोगों का मानना है कि संयुक्त राष्ट्र महासभा में पीएम मोदी का भाषण दुनिया भर के देशों को एकजुट करने में कोई बड़ी भूमिका नहीं निभा सका है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को संयुक्त राष्ट्र महासभा को संबोधित किया। अपने 22 मिनट 5 सेंकड के भाषण में उन्होंने अफगानिस्तान, कोरोना और आतंकवाद पर अपनी बात रखी। पीएम ने इशारों-इशारों में पाकिस्तान को नसीहत भी दी। उन्होंने कहा कि रिग्रेसिव थिंकिंग के साथ जो देश आतंकवाद का पॉलिटिकल टूल के तौर पर इस्तेमाल कर रहे हैं, उन्हें समझना होगा कि आतंकवाद उनके लिए भी उतना ही बड़ा खतरा है। अमर उजाला ने इसे बारे में लोगों से पूछा था कि संयुक्त राष्ट्र महासभा में अपने भाषण से पीएम मोदी क्या आतंकवाद के मुद्दे पर दुनिया भर के देशों को एकजुट करने में कामयाब हुए?
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इस पर 65.92 फीसदी लोगों को कहना है कि हां, संयुक्त राष्ट्र महासभा में अपने भाषण से पीएम मोदी आतंकवाद के मुद्दे पर दुनिया भर के देशों को एकजुट करने में कामयाब हुए हैं। वहीं, 34.08 फीसदी लोगों का मानना है कि संयुक्त राष्ट्र महासभा में पीएम मोदी का भाषण दुनिया भर के देशों को एकजुट करने में कोई बड़ी भूमिका नहीं निभा सका है।
बता दें कि पीएम मोदी ने संयुक्त राष्ट्र महासभा में अपने भाषण के दौरान आतंकवाद पर अपनी बात रखते हुए कहा था कि यह सुनिश्चित करना जरूरी है कि अफगानिस्तान की जमीन का इस्तेमाल आतंकवाद फैलाने के लिए न हो। हमें सतर्क रहना होगा कि वहां की नाजुक स्थितियों का कोई देश अपने स्वार्थ के लिए टूल की तरह इस्तेमाल करने की कोशिश न करे। इस समय अफगानिस्तान की जनता, वहां की महिलाओं, बच्चों और अल्पसंख्यकों को हमारी मदद की जरूरत है। इसमें हमें अपना दायित्व निभाना ही होगा।
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इससे पहले पीएम मोदी ने अमेरिकी राष्ट्रपति बाइडन के साथ मुलाकात के दौरान भी आतंकवाद को लेकर चर्चा की थी। दोनों देशों ने कहा कि वे सभी आतंकी गुटों के खिलाफ ठोस कार्रवाई करेंगे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन की व्हाइट हाउस में पहली द्विपक्षीय वार्ता के बाद जारी संयुक्त बयान में कहा गया, दोनों देश वैश्विक आतंकवाद के खिलाफ साझा जंग में साथ खड़े हैं।
बयान में दोनों नेताओं ने किसी भी रूप में आतंक के छद्म इस्तेमाल की निंदा की और आतंकवादी समूहों को किसी भी तरह की सैन्य, वित्तीय सहायता को रोकने के महत्व पर जोर दिया। मोदी और बाइडन ने कहा कि आतंकवाद विरोधी संयुक्त कार्य समूह और आंतरिक सुरक्षा संवाद के जरिये दोनों देशों के बीच आतंकवाद विरोधी सहयोग को और मजबूत किया जाएगा। इस प्रक्रिया में खुफिया जानकारी साझा करना और कानूनी प्रवर्तन एजेंसियों के बीच सहयोग भी शामिल है।