संसद के शीतकालीन सत्र के समाप्त होने से एक दिन पहले बृहस्पतिवार को भी स्थगन की घोषणा होते ही वरिष्ठ भाजपा नेता लालकृष्ण आडवाणी का दर्द छलक पड़ा। सत्र के हंगामे की भेंट चढ़ने के कारण हुई पीड़ा को जाहिर करते हुए उन्होंने कहा, ‘मन करता है इस्तीफा ही दे दूं।’
सरकार और विपक्ष के बीच संसद की कार्यवाही बाधित करने को लेकर चल रह आरोप-प्रत्यारोपों के बीच लोकसभा अध्यक्ष सुमित्रा महाजन ने पूरे दिन के लिए संसद स्थगित करने की घोषणा की। आडवाणी इसके बाद भी सामने की सीट पर बैठे रहे और सबसे पहले केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी से अपनी व्यथा व्यक्त की। इसके बाद उन्होंने पास में खड़े गृहमंत्री राजनाथ सिंह को यह बात बताई। राजनाथ सिंह वरिष्ठ नेता की बात ध्यान से चुपचाप सुनते रहे।
संसद में जारी गतिरोध पर अमर उजाला ने पोल कराया। पोल में पाठकों से सवाल पूछा गया कि 'संसद में नोटबंदी पर बहस न हो पाने के लिए कौन जिम्मेदार है?' इस सवाल पर प्रतिक्रिया देने के लिए पाठकों ने बढ़ चढ़कर हिस्सा लिया। पोल में 8 हजार नौ सौ पैंतीस पाठकों ने हिस्सा लिया। इसमें 25.61 प्रतिशत (2288 वोट) पाठकों ने संसद में गतिरोध के लिए सत्ता पक्ष को जिम्मेदार माना, जबकि 60.64 प्रतिशत (5418 वोट) पाठकों ने विपक्ष को जिम्मेदार ठहराया।
दिलचस्प है कि संसद में गतिरोध के लिए सत्ता पक्ष और विपक्ष को जिम्मेदार मानने वालों की संख्या 13.75 प्रतिशत (1229) रहीं।