अमर उजाला ज्योतिष महाकुंभ में शामिल हुए केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने अपने संबोधन में कहा, 'अमर उजाला द्वारा आयोजित ज्योतिष के महाकुंभ में आए सभी ज्योतिषियों और इस वैज्ञानिक प्रणाली के साधकों का अभिवादन करता हूं। प्रधानमंत्री के मार्गदर्शन में एक नए मंत्रालय जलशक्ति मंत्रालय का गठन किया था। जल से जुड़े विभागों का समन्वय करके इस मंत्रालय का निर्माण किया गया। आपके आशीर्वाद से मुझे उस मंत्रालय में सेवा करने का मौका मिला। माननीय प्रधानमंत्री ने हर घर में पीने का पानी पहुंचाने के संकल्प और विकसित भारत के लक्ष्य के साथ जलशक्ति मंत्रालय का गठन किया था। मैं आप सभी की इस गरिमामयी उपस्थिति और मुझे इस कार्यक्रम में आमंत्रित करने के लिए अमर उजाला परिवार का हृदय से आभारी हूं।'
'ये आयोजन हमारी सांस्कृतिक चेतना का पुनर्जागरण है'
उन्होंने कहा कि 'ये मंच केवल एक विधा से जुड़े लोगों को संकलित करने का ही माध्यम नहीं है। माननीय प्रधानमंत्री जब विरासत से विकास की तरफ जाने की बात करते हैं। भारत का पुनर्जागरण हो रहा है, तो ऐसे महत्वपूर्ण कालखंड में इस तरह के कार्यक्रम का आयोजन नई गति प्रदान करेगा। आज हम विरासत पर गर्व करते हुए विकसित भारत की ओर बढ़ रहे हैं। ऐसे में भारत की आध्यात्मिक चेतना और सनातन परंपरा बढ़ रही है और उसे विश्व भर में पहचान मिल रही है। यह आयोजन हमारी सांस्कृतिक चेतना का पुर्नजागरण है। यह हमारे अतीत की गहराई, वर्तमान की प्रामाणिकता और भविष्य की दिशा का संगम है। हमारा वैदिक ज्ञान विज्ञान के आधार पर विकसित हुआ।'
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'आक्रांताओं ने हमारी ज्ञान परंपरा को नष्ट करने की साजिश की'
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि 'भारत का जितना भी ज्ञान है, वह वैज्ञानिक खोज के आधार पर लिखा गया है। आक्रांताओं ने हमारी इस ज्ञान परंपरा पर हमले किए गए और इसे नष्ट करने का प्रयास किया। नालंदा और तक्षशिला जैसे विश्वविद्यालयों पर हमले किए गए और हमारी ज्ञान परंपरा को नष्ट कर दिया गया। लाखों किताबों को जला दिया गया, जिसकी आग करीब आठ महीने तक धधकती रही थी। इसके चलते हमारे ज्ञान का प्रवाह टूट गया था। सामान्य जनमानस ने स्मृति और श्रुतियों के आधार पर उसे जारी रखा, लेकिन जानना बंद कर दिया था क्योंकि उसे आगे बढ़ाने के लिए हमारे पास पुस्तकें नहीं थीं। बाद में अंग्रेजों के समय में हमारी विरासत को खत्म करने की साजिश की गई और हमें हमारी विरासत पर गर्व करने से रोक दिया गया। इसके चलते हम अपनी जड़ों से कट गए। हमने अपने ज्ञान की वैज्ञानिकता को छोड़ दिया, जिससे हमारे ज्ञान की प्रमाणिकता पर सवाल खड़े करने का उन्हें मौका मिल गया।'
'लंबी कालरात्रि के बाद अब भारत के उदय का सूरज उग रहा'
केंद्रीय मंत्री शेखावत ने कहा कि 'आध्यात्म केवल विचार मात्र नहीं था, बल्कि यह जीवन जीने की पद्धति थी। हमारे ऋषि मुनियों ने वेदों, पुराणों से ज्ञान की अमिट धारा इस देश में प्रवाहित की थी, लेकिन दुर्भाग्य से इसे खत्म करने की कोशिश की गई। लेकिन आज मैं देख रहा हूं कि भारत का उत्कर्ष अवश्यंभावी है। लंबी कालरात्रि के बाद अब भारत के उदय का सूरज उग रहा है। आज भारत की विधाओं का सम्मान बढ़ रहा है। योग भारत के मुंगेर से निकलकर विश्व पटल पर गया, लेकिन उसका भारत को श्रेय नहीं मिला, लेकिन माननीय पीएम मोदी के नेतृत्व में हम उसे संयुक्त राष्ट्र में लेकर गए और आज पूरी दुनिया में योग दिवस के मौके पर दुनिया के 100 से ज्यादा देश योग दिवस मनाते हैं।'
'हमारी भाषा संस्कृत की श्रेष्ठता को मान्यता मिल रही है। संस्कृत सबसे वैज्ञानिक भाषा है। दुनिया के कई देश अब संस्कृत पढ़ा रहे हैं। भारत की जो जैविक खेती थी, उसकी स्वीकार्यता भी पूरी दुनिया में बढ़ रही है। साथ ही भारत की परिवार परंपरा, ज्योतिष, खगोलविद्या आदि जो सैंकड़ों वर्ष पहले हमारी ताकत थे, उसे आज पूरी दुनिया अपना रही है। हम सौभाग्यशाली हैं कि हमें इस समय में रहने का मौका मिला। हमारी ज्ञान परंपरा पूरी तरह से वैज्ञानिक तथ्यों पर आधारित थी।'
'एआई के युग में हमारे ज्ञान की प्रमाणिकता पर आंच नहीं आनी चाहिए'
केंद्रीय मंत्री ने कहा 'आज जब हमारे वेद विज्ञान की स्वीकार्यता बढ़ी है, तब ऐसे समय में ऐसे कार्यक्रम के आयोजन में लिए मैं बधाई देता हूं। सरकार भी हमारी ज्ञान परंपरा के सभी विषयों को मजबूत करने की कोशिश कर रही है। हस्तलिखित पांडुलिपियों के संरक्षण कर रहे हैं। उन्हें एआई रीडेबल और डिजिटाइज किया जा रहा है। हजारों साल पहले की हमारे ऋषि मुनियों की ज्ञान परंपरा हम चाहते है कि विश्व पटल पर आए। लेकिन हमें ये भी ध्यान रखना होगा कि इस तकनीक खासकर एआई के युग में हमारे ज्ञान की प्रमाणिकता पर आंच नहीं आनी चाहिए। हमें इसका भी ध्यान रखना होगा।'