कार मालिकों की दुनिया भी बड़ी अजीब है बड़ी कार चलाने वाले अक्सर छोटी कार चलाने वालों को नीची निगाह से देखते हैं। उनका नजरिया भी कुछ ऐसा ही होता है जैसे ग्रेटर कैलाश की कोठियों में रहने वाला मंगोल पुरी में रहने वाले को देखता है।
अमर उजाला फाउंडेशन के नजरिया जो जीवन बदल दे कार्यक्रम में लोगों की मानसिकता से जुड़े ऐसी सोच को व्यंग्यात्मक तरीके से लोगों के सामने पेश किया व्यंग्यकार आलोक पुराणिक। कार्यक्रम में लोगों से बातचीत के दौरान आलोक ने श्रोताओं से अपने पुराने दिन के कुछ अनुभव भी साझा किए। उन्होंने कहा कि जब मैं स्कूटर पर चलता था और बड़े बड़े कार्यक्रमों में जाता था तब लोग मुझसे पूछते थे कि आप किस चीज से आएं हैं तो मैं बहुत चालाकी से कहता था गाड़ी से। गाड़ी से और इसमें दोनों ही आ जाती है कार भी और स्कूटर भी।
इंडिया इस्लामिक सेंटर में हुए इस कार्यक्रम में काफी लोगों ने शिरकत की। हल्के फुल्के लहजे में आलोक ने काफी गहरी बातें की और लोगों को बताया कैसे महंगी कार और एलीट रेंज की कार चलाने वाले लोग छोटी कार वालों को देखते हैं।
उन्होंने बड़े ही हल्के -फुल्के अंदाज में लोगो को समझाया कि किस तरह से बाजारवाद हमारी जिंदगी पर हावी होता जा रहा है। तकनीक किस तरह से हमारी जेब में आ चुकी है और किस तरह से ऑफर हमारे ऊपर हावी हो रहे हैं।
उन्होंने कहा कि मैं व्यंग्यकार हूं और हमारा काम है कि समाज में फैले पाखंड पर नजर रखना और गहरी बातों को हल्के अंदाज में पहुंचाना। उन्होंने लोगों को बातों बातों में समझाया कि किस तरह हम जिंदगी में हर वो काम करना चाहते हैं लेकिन इस काम के लिए दुनिया में उजागर नहीं होना चाहते हैं।