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Arunachal: अमर उजाला फाउंडेशन ने अरुणाचल के प्रथम गांव में भेंट किए कम्प्यूटर-शिक्षा सामग्री; खिले चेहरे

Mon, 05 Aug 2024 01:06 PM IST
कीर्तिवर्धन मिश्र एन अर्जुन, अमर उजाला ब्यूरो

सार

अमर उजाला फाउंडेशन ने कीबिथू के अपर प्राइमरी स्कूल (कक्षा आठ) के विद्यार्थियों की परेशानियों को देखते हुए दो कम्प्यूटर सेट, प्रिंटर और शिक्षा सामग्री भेंट की। गत बुधवार को स्कूल की कार्यकारी प्रिंसिपल ने इसका विधिवत रूप से उद्घाटन किया।
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अरुणाचल प्रदेश के स्कूल में अमर उजाला फाउंडेशन ने भेजे कंप्यूटर-शिक्षण सामग्री। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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अब अरूणाचल प्रदेश के प्रथम गांव कीबिथू में भी बहेगी कम्प्यूटर शिक्षी की गंगा। यहां के  विद्यार्थी भी अब कम्प्यूटर शिक्षा में पारंगत होंगे। विद्यार्थियों को कम्प्यूटर सीखने करीब तीन सौ किलोमीटर की दूरी तय करनी नहीं पड़ेगा। अमर उजाला फाउंडेशन के प्रयासों से यह संभव हो पाया है। फाउंडेशन ने कीबिथू के अपर प्राइमरी स्कूल (कक्षा आठ) के विद्यार्थियों की परेशानियों को देखते हुए दो कम्प्यूटर सेट, प्रिंटर और शिक्षा सामग्री भेंट की। गत बुधवार को स्कूल की कार्यकारी प्रिंसिपल ने इसका विधिवत रूप से उद्घाटन किया। कम्प्यूटर सेट मिलने के बाद विद्यार्थी के चेहरे खिल उठे। उल्लेखनीय अप्रैल, 2023 में केंद्रीय गहमंत्री अमित शाह ने इसी गांव से बाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम की घोषणा की थी। इसी योजना के तहत 1982 में बने इस स्कूल को मॉडल स्कूल के रूप में विकसित किया गया है। स्कूल के विद्यार्थी, गांव के लोगों और स्कूल मैनेजमेंट ने अमर उजाला फाउंडेशन के इस प्रयास की सहराना करते हुए, फाउंडेशन का धन्यवाद किया।
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मुश्किल हुआ आसान, सपने होंगे साकारः क्रोंग
स्कूल की कार्यकारी प्रिंसिपल बाघिनला क्रोंग ने कहा, आज बहुत पुराना सपना पूरा हुआ। अब तक जो मुश्किलें थीं, वह अब आसान हो गया। मेरे पास शब्द नहीं है, कैसे अपनी बात कहूं। आज के युग में कंम्प्यूटर के बिना शिक्षा अधूरी है। अब हम अपने बच्चों को इसकी बेसिक शिक्षा देंगे। बच्चे कम्प्यूटर फ्रेंडली होंगे। जो मन में झिझक होगा वह दूर होगा। अमर उजाला फाउंडेशन ने बहुत बड़ा काम किया है। देश की राजधानी से करीब तीन हजार किलोमीटर दूर, आकर हमको यह तोहफा दिया। नहीं तो छोटे-छोटे काम के लिए हमें दूर जाना पड़ता था। अब हम आसानी से बच्चों के फॉर्म यहीं भर सकेंगे। उच्च शिक्षा के लिए बच्चे यहीं पर जानकारी हासिल कर पाएंगे।

विद्यार्थियों के सपनों को लगेंगे पंखः प्रेम
स्कूल मैनेजमेंट के सदस्य प्रेम कुमार कहते हैं, हम यहां के विद्यार्थियों को भी कम्प्यूटर शिक्षा से जोड़ना चाहते थे लेकिन कैसे, यह समझ नहीं आ रहा था। इसी बीच, हमें अमर उजाल फाउंडेशन के बारे में जानकारी मिली और हमने फाउंडेशन के उच्चाधिकारियों से संपर्क किया। फाउंडेशन ने तुरंत हमारी मांग को स्वीकार किया और आज यह दिन भी आया, जब प्रथम गांव के बच्चे कम्प्यूर को छू पा रहे हैं, उसे चला पा रहे हैं। बच्चे की-बोर्ड पर जब हाथ चला रहे हैं, देखकर मन बहुत खुश हो रहा है। कीबिथू के स्कूल के बच्चों को इसके लिए चालीस सालों से भी अधिक समय का इंतजार करना पड़ा। उन्होंने अमर उजाला फाउंडेशन को धन्यवाद देते हुए कहा, अब तक इस क्षेत्र में विद्यार्थी थोड़े कमजोर थे, अब उनके सपनों को पंख लगने से कोई रोक नहीं पाएगा।
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तीन सौ किमोमीटर दूर जाना पड़ता थाः विद्यार्थी
स्कूल की छात्रा रेवेंसी कहती हैं, आज पूरे स्कूल में उत्सव जैसा माहौल है। हमारे लिए अमर उजाला फाउंडेशन ने दिल्ली से कम्प्यूटर भेजा है। इससे पहले हमारे गांव से किसी को कम्प्यूटर सीखना होता था तो उसे यहां से करीब तीन सौ किलोमीटर दूर तेजू जाना पड़ता था। अब जहां हमारा समय बचेगा वहीं पैसों की भी बचत होगी। स्कूल के छात्र सुभाष राई कहते हैं, हमें भी कम्प्यूटर सीखने की बहुत इच्छा थी, लेकिन हमारे स्कूल में यह सुविधा उपलब्ध नहीं थी। अब जब हमारे पास कम्प्यूटर आ गए हैं, तो हम भी बड़े शहरों के विद्यार्थियों की तरह ही, उच्च शिक्षा में कम्प्यूटर पढ़ने का सपने देख सकते हैं। देश की राजधानी से तीन हजार किलोमीटर से भी दूर स्थित, हमारे गांव के विद्यार्थियों को के बारे में फाउंडेशन से सोचा। हम सभी अमर उजाला फाउंडेशन की शिक्षा के प्रति सोच को सलाम करते हैं।

यहां पहुंचना नहीं है आसान
कीबिथू, भारत-चीन सीमा के अंतिम छोर में बसा एक छोटा सा गांव है। यह अरूणाचल प्रदेश के अंजॉ जिले में आता है। यह गांव असम के डिब्रगढ़ से चार सौ किलोमीटर से भी दूर स्थित है। पहाड़ी रास्तों से होते हुए यहां तक पहुंचने के लिए दो से तीन दिन दिन का समय लग जाता है। बरसात के दिनों में यह समय और बढ़ जाता है क्योंकि जगह-जगह भूख्लन से रास्ते बंद हो जाते हैं। आने वाले दिनों में यह क्षेत्र पर्यटन का मुख्य केंद्र बनने जा रहा है।
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