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AMAR Exercise: 14,000 फीट पर भारतीय सैनिकों को मिल रहा नया युद्ध कौशल, अब हर सैनिक स्वयं में होगा एक ‘हथियार’

Tue, 25 Nov 2025 11:11 PM IST
हिमांशु चंदेल अमर उजाला ब्यूरो, गुवाहाटी

सार

AMAR Exercise: भारतीय सेना की त्रिशक्ति कोर ने 14,000 फीट की ऊंचाई पर एएमएआर प्रशिक्षण शुरू किया है। इसका उद्देश्य पर्वतीय इलाकों में सैनिकों की नजदीकी लड़ाई की क्षमता को बढ़ाना है। एएमएआर भारतीय और आधुनिक मार्शल आर्ट्स का मिश्रण है, जो सैनिकों को बिना हथियार भी सक्षम बनाता है।
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भारतीय सैनिक। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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भारतीय सेना की त्रिशक्ति कोर ने 14,000 फीट से अधिक ऊंचाई वाले उत्तर-पूर्व के संवेदनशील इलाकों में एएमएआर यानी आर्मी मार्शल आर्ट्स रूटीन का विशेष प्रशिक्षण शुरू कर दिया है। कड़ाके की ठंड, बर्फानी हवाओं और बेहद कठिन पर्वतीय भू-भाग में चल रहा यह प्रशिक्षण सेना की पर्वतीय युद्धक क्षमता को और मजबूत बना रहा है। प्रशिक्षण का उद्देश्य सैनिकों को उन स्थितियों के लिए तैयार करना है, जहां पारंपरिक हथियार तुरंत उपलब्ध न हों और निर्णय सेकंडों में लेना पड़े।

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गुवाहाटी में रक्षा मंत्रालय के प्रवक्ता लेफ्टिनेंट कर्नल महेंद्र रावत के अनुसार, एएमएआर भारत की पारंपरिक युद्ध कलाओं और आधुनिक क्लोज-कॉम्बैट तकनीकों का एक संयुक्त रूप है। यह प्रणाली भारतीय सेना ने अपने अनुभव और आवश्यकताओं के आधार पर विकसित की है। एएमएआर में खाली हाथ मुकाबला, हथियारों के साथ नजदीकी लड़ाई, तनाव में प्रतिक्रिया क्षमता, मानसिक दृढ़ता और शारीरिक सहनशक्ति पर फोकस किया जाता है। यह प्रशिक्षण विशेष रूप से उन क्षेत्रों के लिए बनाया गया है जहां समय, भू-भाग और मौसम तेजी से बदलते हैं।

ऊंचाई पर युद्ध क्षमता को बढ़ाता प्रशिक्षण
14,000 फीट की ऊंचाई पर हवा पतली होती है और तापमान शून्य से काफी नीचे। सैनिकों के लिए यह प्रशिक्षण सामान्य परिस्थितियों की तुलना में कहीं अधिक कठिन हो जाता है। इसी कारण एएमएआर को पर्वतीय इलाकों के लिए “फोर्स मल्टीप्लायर” माना जाता है। यह सैनिकों की रिफ्लेक्स क्षमता, संतुलन, स्टैमिना और उच्च-स्तरीय सतर्कता विकसित करता है, जो ऊंचाई वाले क्षेत्रों में नजदीकी युद्ध के दौरान निर्णायक भूमिका निभाती है।
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दबाव में शांत रहने की कला सिखाता है एएमएआर
प्रशिक्षण में शामिल एक युवा अधिकारी ने कहा कि इतनी ऊंचाई पर पहाड़ हर पल आपकी सहनशक्ति और मानसिक मजबूती की परीक्षा लेते हैं। उन्होंने बताया कि एएमएआर उन्हें दबाव में भी शांत रहने की कला सिखाता है। अधिकारी के अनुसार, “यह प्रशिक्षण भरोसा देता है कि बिना हथियार के भी हम किसी भी परिस्थिति से निपटने में सक्षम हैं।” यह क्षमता सैनिकों को अचानक होने वाली झड़पों और नजदीकी मुकाबलों में त्वरित निर्णय लेने में मदद करती है।

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हर सैनिक बनता है ‘स्वयं एक हथियार’
ले. कर्नल रावत के अनुसार, एएमएआर सैनिकों को हर समय और हर जगह लड़ने योग्य बनाता है। यह सिर्फ एक मार्शल आर्ट नहीं, बल्कि एक संपूर्ण युद्ध दर्शन है, जिसमें मन, शरीर और प्रतिक्रिया क्षमता का मेल होता है। कठिन हालात में बिना हथियार लड़ने की यह तकनीक सैनिकों को किसी भी खतरे के सामने खड़े होने की क्षमता प्रदान करती है। सेना का मानना है कि एएमएआर भविष्य के युद्धों में एक निर्णायक कौशल साबित होगा।

पर्वतीय युद्धक क्षमता को मिलेगी नई मजबूती
उत्तरी सीमाओं पर बढ़ती संवेदनशीलता और दुर्गम भू-भाग को देखते हुए एएमएआर प्रशिक्षण सेना की रणनीतिक क्षमता का महत्वपूर्ण हिस्सा बन गया है। यह प्रशिक्षण पर्वतीय मोर्चों पर तैनात सैनिकों को न केवल शारीरिक रूप से मजबूत बनाता है, बल्कि मानसिक रूप से भी तैयार करता है। सेना को विश्वास है कि एएमएआर आने वाले वर्षों में पर्वतीय युद्ध की परिस्थितियों में एक गेम-चेंजर साबित होगा और भारतीय सैनिकों को अतिरिक्त बढ़त प्रदान करेगा।

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