अलवर जिले में हुई इस घटना के बाद से ही राज्य पुलिस पर कई गंभीर आरोप लगे हैं। पुलिस पर आरोप है कि उन्होंने रकबर को अस्पताल पहुंचाने की बजाए पहले बरामद गायों को गौशाला पहुंचाया। केवल यही नहीं पुलिस ने खुद भी रकबर की पिटाई की थी। वह घायल होने के तीन घंटे बाद अस्पताल पहुंचा जिस कारण उसकी मौत हो गई।
मामले पर अलवर के एसपी राजेंद्र सिंह का कहना है कि इस मामले की जांच की जाएगी। उन्होंने कहा कि उन्हें मीडिया में आई खबरों से पता चला था कि रकबर को अस्पताल पहुंतचाने में तीन घंटे का समय लगा। और पुलिस ने रकबर को अस्पताल पहुंचाने की बजाय गायों को गौशाला पहुंचाया। बता दें यह घटना जिले के लालवंडी गांव में हुई है। यह इलाका रामगढ़ थाना क्षेत्र के अंकर्गत आता है। यहां गोरक्षकों ने रकबर पर गो तस्करी का आरोप लगाते हुए उसकी पीट-पीटकर हत्या कर दी।
मॉब लिंचिंग पर सुप्रीम कोर्ट के निर्देश-
1. कानून का शासन कायम रहे इसे सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी सरकार की है।
2. सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में भीड़तंत्र को इजाजद नहीं दी है।
3. कोई भी नागरिक कानून अपने हाथों में नहीं ले सकता है।
4. सरकार को संविधान के अनुसार काम करना चाहिए और संसद इस मामले पर कानून बनाए।
5. लिंचिंग पीड़ितों को सरकार की तरफ से मुआवजा दिया जाना चाहिए।