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अलवर लिंचिंग : सुप्रीम कोर्ट में 20 अगस्त को होगी सुनवाई

Mon, 23 Jul 2018 01:04 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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सुप्रीम कोर्ट अलवर में हुई लिंचिंग की ताजा घटना के मामले में राजस्थान सरकार के खिलाफ अवमानना याचिकाओं पर 20 अगस्त को सुनवाई करने करेगा। सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि 20 अगस्त को अलवर लिंचिंग मामले में राजस्थान, उत्तर प्रदेश और हरियाणा सरकार के खिलाफ डाली गई याचिका की सुनवाई की जाएगी। बता दें कि राजस्थान के अलवर जिले में शुक्रवार को 31 साल के मुस्लिम व्यक्ति रकबर खान की 8-10 गो रक्षकों ने हत्या कर दी थी। सोमवार को कोर्ट ने याचिका को स्वीकार कर लिया है। इसमें सरकार और अधिकारियों पर निर्देशों के उल्लंघन का आरोप लगाया गया है।

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सुप्रीम कोर्ट का कहना है कि मामले की सुनवााई 20 अगस्त को की जाएगी। बता दें यह याचिका तहसीन पूनावाला की तरफ से डाली गई है। देश में लगातार बढ़ रही मॉब लिंचिंग की घटनाओं को रोकन के लिए हाल ही में सुप्रीम कोर्ट ने इस पर दिशा निर्देश जारी किए थे। केंद्र और राज्यों को इसका पालन करने को भी कहा गया था। लेकिन कोर्ट के आदेश के बावजूद भी ये घटनाएं रुक नहीं रही हैं।

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पुलिस पर लग रहे हैं कई गंभीर आरोप

अलवर जिले में हुई इस घटना के बाद से ही राज्य पुलिस पर कई गंभीर आरोप लगे हैं। पुलिस पर आरोप है कि उन्होंने रकबर को अस्पताल पहुंचाने की बजाए पहले बरामद गायों को गौशाला पहुंचाया। केवल यही नहीं पुलिस ने खुद भी रकबर की पिटाई की थी। वह घायल होने के तीन घंटे बाद अस्पताल पहुंचा जिस कारण उसकी मौत हो गई।

मामले पर अलवर के एसपी राजेंद्र सिंह का कहना है कि इस मामले की जांच की जाएगी। उन्होंने कहा कि उन्हें मीडिया में आई खबरों से पता चला था कि रकबर को अस्पताल पहुंतचाने में तीन घंटे का समय लगा। और पुलिस ने रकबर को अस्पताल पहुंचाने की बजाय गायों को गौशाला पहुंचाया। बता दें यह घटना जिले के लालवंडी गांव में हुई है। यह इलाका रामगढ़ थाना क्षेत्र के अंकर्गत आता है। यहां गोरक्षकों ने रकबर पर गो तस्करी का आरोप लगाते हुए उसकी पीट-पीटकर हत्या कर दी।

मॉब लिंचिंग पर सुप्रीम कोर्ट के निर्देश-

1. कानून का शासन कायम रहे इसे सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी सरकार की है।

2. सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में भीड़तंत्र को इजाजद नहीं दी है।

3. कोई भी नागरिक कानून अपने हाथों में नहीं ले सकता है।

4. सरकार को संविधान के अनुसार काम करना चाहिए और संसद इस मामले पर कानून बनाए।

5. लिंचिंग पीड़ितों को सरकार की तरफ से मुआवजा दिया जाना चाहिए।
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