उन्होंने सवाल किया कि उत्तर प्रदेश का अंकगणित ठीक करने और भाजपा को हराने के लिए यह (सपा-बसपा गठबंधन) हुआ है। क्या दूसरों को संतुष्ट करने के लिए हम सीटें (भाजपा से) हार जाएं।
चुनाव पूर्व सपा-बसपा के गठबंधन से बाहर रही कांग्रेस ने घोषणा की है कि वह आगामी लोकसभा चुनावों में राज्य की सभी 80 सीटों पर अकेले लड़ेगी।
कांग्रेस को विपक्षी गठबंधन से बाहर रखने से राजनीतिक दृष्टि से अहम राज्य में विपक्ष की संभावनाएं कमजोर होंगी, यह पूछने पर अखिलेश ने कहा कि सीटों के इस समझौते के साथ हमने विपक्षी एकता को और मजबूत किया है। हमने कांग्रेस के लिए दो सीटें रखी हैं। कांग्रेस के साथ हमारे संबंध हमेशा से अच्छे रहे हैं। संबंधों का मुद्दा अलग है। अहम मुद्दा भाजपा को हराना है और मैंने अंकगणित की दिशा में काम किया है।
कांग्रेस के सभी सीटों पर लड़ने की घोषणा के बाद बदले परिदृश्य में गठबंधन की ओर से उम्मीदवारों को उतारे जाने के बारे में पूछने पर उन्होंने कहा सपा-बसपा रायबरेली एवं अमेठी में ऐसा नहीं करेगी।
हालांकि वह इस बात पर कायम रहे कि कांग्रेस को गठबंधन से बाहर रखने और महज दो सीटें देने से विपक्ष के वोट शेयर पर कोई असर नहीं पड़ेगा।
प्रधानमंत्री पद के लिए बसपा प्रमुख मायावती और तृणमूल कांग्रेस की ममता बनर्जी में से उनकी पहली पसंद कौन है के प्रश्न पर अखिलेश ने सीधा जवाब नहीं दिया और कहा कि कोशिश एक नये प्रधानमंत्री के चुनाव की होनी चाहिए और कुछ मुद्दों पर चुनावों के बाद भी चर्चा हो सकती है।