केरलम के प्रदेश अध्यक्ष राजीव चंद्रशेखर के नेतृत्व में भाजपा के एक प्रतिनिधिमंडल ने राज्यपाल ओम प्रकाश माथुर से मुलाकात की। इसके साथ ही पीएससी परीक्षा से जुड़ी गतिविधियों में कथित अनियमितताओं पर तत्काल कार्रवाई की मांग की।राज्यपाल से यहां लोक भवन में मिलने वाले इस प्रतिनिधिमंडल में भाजपा के वरिष्ठ नेता और विधानसभा में पार्टी के दो अन्य विधायक वी. मुरलीधरन और बी.बी. गोपकुमार शामिल थे।
यह बैठक ऐसे समय में हुई है, जब मीडिया रिपोर्टों में कहा गया था कि केरलम के पूर्व राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ अर्लेकर ने भर्ती संस्था (पीएससी) में अनियमितताओं की शिकायतों के चलते पीएससी अध्यक्ष एम.आर. बैजू को हटाने की सिफारिश की थी। लोक भवन के सूत्रों के अनुसार, तमिलनाडु में अपने तबादले से पहले, अर्लेकर ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को पत्र लिखकर बैजू को हटाने की सिफारिश की थी। उन्होंने अनियमितताओं के आरोपों और इस वैधानिक संस्था के कामकाज की जांच का हवाला दिया था।
गोपकुमार ने क्या बताया?
बैठक के बाद पत्रकारों से बात करते हुए, विधानसभा में भाजपा विधायक दल के नेता गोपकुमार ने बताया कि प्रतिनिधिमंडल ने राज्यपाल से मुलाकात कर जांच में तेजी लाने की मांग की है। उन्होंने आरोप लगाया कि वी.डी. सतीशन के नेतृत्व वाली सरकार ने अपने कार्यकाल की शुरुआत से ही लोक सेवा आयोग (पीएससी) की परीक्षाओं में हुई अनियमितताओं को छिपाने की कोशिश की है।
गोपकुमार ने क्या आरोप लगाया?
उन्होंने आरोप लगाया, 'पीएससी में कई वर्षों से बड़े पैमाने पर अनियमितताएं हो रही हैं। मुख्यमंत्री ने खुद विधानसभा में बताया था कि उन्हें 188 शिकायतें मिली हैं। फिर भी, सरकार इस मामले की निष्पक्ष जांच कराने के लिए तैयार नहीं थी।'
गोपकुमार ने आगे आरोप लगाया कि एलडीएफ और यूडीएफ की सरकारों ने लगातार इन अनियमितताओं को छिपाने की कोशिश की है, और यह सिलसिला अभी भी जारी है। उन्होंने कहा कि जब अर्लेकर ने भाजपा और उसके युवा विंग 'युवा मोर्चा' द्वारा दी गई शिकायतों को राष्ट्रपति के पास भेजा, तब जाकर सरकार पीएससी के कुछ अधिकारियों को गिरफ्तार करने के लिए तैयार हुई। उन्होंने कहा, 'राज्यपाल के हस्तक्षेप के कारण ही सरकार कार्रवाई करने के लिए तैयार हुई। इसलिए, अब इस पर आगे की कार्रवाई भी होनी चाहिए।'
विधानसभा में क्यों नहीं उठा पाया यह मुद्दा?
गोपकुमार ने बताया कि भाजपा ने विधानसभा में 'स्थगन प्रस्ताव' के जरिए पीएससी का मुद्दा उठाने की कोशिश की थी, लेकिन तकनीकी कारणों से इसकी अनुमति नहीं दी गई। उन्होंने आरोप लगाया कि सत्ता पक्ष और विपक्ष, दोनों में से कोई भी इस मामले पर चर्चा करने को तैयार नहीं था, जिसके चलते भाजपा को एक बार फिर राज्यपाल के पास जाना पड़ा।
प्रतिनिधिमंडल ने राज्यपाल से क्या आग्रह?
प्रतिनिधिमंडल ने राज्यपाल से आग्रह किया कि वे इस मामले में तुरंत हस्तक्षेप करें और सुनिश्चित करें कि आगे की कार्रवाई की जाए। उन्होंने बताया कि उन्होंने राज्यपाल से पीएससी रैंक धारकों की भर्ती पर तुरंत ध्यान देने और उन कथित अनियमितताओं के मामले को आगे बढ़ाने का भी अनुरोध किया, जिन्हें पहले राष्ट्रपति के पास भेजा गया था।
यह घटनाक्रम राज्य योजना बोर्ड के प्रमुख के पद के लिए आयोजित पीएससी परीक्षा में कथित अनियमितताओं की क्राइम ब्रांच द्वारा की जा रही जांच के बीच सामने आया है। बाद में इस जांच का दायरा बढ़ा दिया गया, ताकि अन्य पीएससी परीक्षाओं में हुई कथित अनियमितताओं को भी इसमें शामिल किया जा सके। आधिकारिक सूत्रों के अनुसार, क्राइम ब्रांच ने बुधवार को केरलम पीएससी के पूर्व उप-सचिव पी. सतीश को आयोग की परीक्षा-संबंधी गतिविधियों में हुई कथित अनियमितताओं के सिलसिले में गिरफ्तार किया है।