अभी पूरी दुनिया में जो भी वैक्सीन बनी हैं वे वुहान वायरस के स्ट्रेन पर ही बनाई गई हैं। पूरी दुनिया के अलग-अलग चिकित्सा संस्थानों के शोध से इस बात की पुष्टि हुई है कि जो वैक्सीन तैयार हुई हैं वे इस वायरस से लड़ने में कारगर हैं। चिकित्सा विशेषज्ञों का कहना है क्योंकि अब तक वायरस के जितने भी स्वरूप आए हैं उनमें यह वैक्सीन मददगार रही है। बावजूद इसके इस वैक्सीन के बदले हुए स्वरूप के स्ट्रेन से जोड़कर नई वैक्सीन को डेवलप करने का काम भी शुरू किया जा चुका है। अनुमान है की आने वाले दिनों में दी जाने वाली वैक्सीन के इंटरवल को न सिर्फ बढ़ाया जाएगा बल्कि जल्दी बूस्टर डोज़ देने की भी योजना अमल में लाई जाएगी।
भारत समेत पूरी दुनिया में इस वक्त कोरोना वायरस की मौजूद वैक्सीन और आने वाले दिनों में बदले हुए स्वरूप से लड़ने की वैक्सीन को डेवलप करने का काम शुरू किया जा चुका है। दुनिया के प्रमुख मेडिकल जर्नल लैंसेट में इस शोध को प्रकाशित भी किया जा चुका है कि यह वैक्सीन बुहान स्ट्रेन से लड़ने में सक्षम है।
विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसा नहीं है कि बीते तकरीबन डेढ़ साल से सिर्फ वुहान में पाए गए वायरस के आधार पर ही शोध किए जा रहे हैं। इसके अलावा अब तक बदले गए वायरस के सभी स्वरूपों की जिनोम सीक्वेंसिंग और उसके बाद तैयार किए जाने वाले उपचार पर लगातार शोध चल रहा है। वरिष्ठ वैज्ञानिक और चिकित्सक डॉक्टर एनके अरोड़ा कहते हैं कि फिलहाल अभी तक जो वैक्सीन तैयार हुई हैं वह वुहान स्ट्रेन पर ही बनी हैं। क्योंकि उसके बाद अभी तक उसके बदले हुए खतरनाक स्वरूपों पर भी तैयार की गई वैक्सीन कारगर है।
हालांकि डॉक्टरों का कहना है कि भारत समेत दुनियाभर के तमाम चिकित्सा संस्थान जो वैक्सीन बनाने की दिशा में काम कर रहे हैं वे परिवर्तित स्वरूप और उसके खतरनाक लक्षणों के आधार पर नई वैक्सीन और इलाज पर काम कर रहे हैं। ऐसे में अनुमान है कि आने वाले दिनों में जो वैक्सीन तैयार होंगी और ज्यादा मॉडिफाइड होंगी। हालांकि उस मॉडिफाइड वैक्सीन का स्वरूप क्या होगा इसे लेकर अभी कुछ तय नहीं हुआ है। क्योंकि पूरी दुनिया के चिकित्सा संस्थान इस बात की लगातार पुष्टि कर रहे हैं कि इस वक्त जो वैक्सीन लोगों को दी जा रही है, वह वर्तमान समय के कोरोनावायरस से लड़ने में बहुत ही कारगर है।
वहीं सूत्रों का कहना है कि आने वाले कुछ दिनों में वायरस के बदले हुए स्वरूप और उसकी जिनोम सीक्वेंसिंग के आधार पर पाए जाने वाले स्वरूप और उसकी घातक क्षमता को देखते हुए वैक्सीन को दिए जाने की टाइमिंग को भी बदला जा सकता है। हालांकि इसका इंटरवल कितना होगा इसका तो अभी खुलासा नहीं हुआ है। लेकिन सूत्रों का कहना है कि एक वैक्सीन की टाइमिंग जो अभी 3 महीने से 4 महीने के बीच है, उसे बढ़ाकर 8 से 10 महीने तक भी किया जा सकता है। यानी की पहली डोज़ अगर अभी लगाई गई है तो दूसरी डोज 8 से 10 महीने बाद लगाई जाए।
केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के सूत्रों का यह भी कहना है की इंटरवल की टाइमिंग बूस्टर डोज के लिए भी बढ़ाई जा सकती है। हालांकि स्वास्थ्य मंत्रालय और नेशनल कोविड टास्क फोर्स टीम में अभी तक बूस्टर डोज के लिए फिलहाल कोई ठोस मसौदा तैयार नहीं किया है। लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि बूस्टर डोज की तैयारी चल रही है, अनुमान है कि इसे एक नियमित अंतराल के बाद दिए जाने का प्रस्ताव रखा जाएगा। टास्क फोर्स टीम के सदस्य डॉ एनके अरोड़ा का कहना है कि उनके वैज्ञानिक इन सभी बिंदुओं पर लगातार शोध कर रहे हैं।