दुर्गा पूजा पर मुहर्रम को तरजीह दिए जाने के फैसले को लेकर पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी अपने राजनीतिक विरोधियों के निशाने पर हैं। भगवा से लेकर वाम बिग्रेड तक सभी ही मूर्ति विसर्जन पर ममता के फैसले से गुस्से में हैं। बल्कि विश्व हिन्दू परिषद ने तो ममता के खिलाफ ताल ठोकते हुए यहां तक कह दिया है कि वे बनर्जी के खिलाफ सूबे में जनजागरण करेगी।
विहिप के राष्ट्रीय महासचिव सुरेंद्र जैन का कहना है कि पश्चिम बंगाल की जनता ममता बनर्जी के मंसूबों को पूरा नहीं होने देगी। उन्होंने कहा कि मुहर्रम के वजह से दुर्गा मूर्ति विसर्जन पर रोक के पश्चिम बंगाल सरकार के खिलाफ विहिप सामाजिक,धार्मिक और कानूनी हर स्तर पर लड़ाई लड़ेगा। तो सियासी दलों ने ममता बनर्जी के इस कदम को वोट बैंक की राजनीति से जुड़ा कदम करार दिया है। ममता और उनके विरोधी दलों के रूख को देखकर स्पष्ट लगता है कि आने वाले दिनों में पश्चिम बंगाल की सियासत संप्रदाय की राजनीति को लेकर गर्म रहेगी।
क्यों पनपा है विवाद, क्या है पूरा मामला
दुर्गा पूजा और मुहर्रम का त्यौहार एक ही दिन पड़ने की वजह से ममता ने बुधवार को दुर्गा पूजा संचालकों और मुस्लिम समुदाय के नेताओं संग एक अहम बैठक की थी। उसके बाद उन्होंने एक अक्टूबर को मूर्ति विसर्जन पर रोक लगा दी है। दुर्गा पूजा के आदर्श का संदेश देते हुए ममता बनर्जी ने 1 अक्टूबर को मूर्ति विसर्जन पर रोक लगा दी है। ममता ने कहा है कि मूर्ति का विसर्जन 30 सितंबर को केवल सायं 6 बजे तक ही हो सकेगा।
मुहर्रम के बाद 2 अक्टूबर से मूर्ति विसर्जित की जा सकेंगी। यह इसलिए हुआ है क्योंकि 1 अक्टूबर को मुहर्रम है। और मुहर्रम की पूर्व संध्या पर यानि 30 सितंबर सायं 6 बजे के बाद ताजिये का प्रदर्शन शुरू हो जाएगा। बनर्जी का कहना है कि कुछ लोग जमीन पर हिन्दू-मुस्लिम के बीच संकट पैदा करना चाह रहे हैं।
सभी धर्म हमारे हैं लेकिन मुश्किल पैदा हो जाती है जब एक पूजा पंडाल के सामने से ताजिये का प्रदर्शन गुजरता है। जिससे हम सभी प्रभावित होते हैं। उन्होंने इस मामले को राजनीतिक तूल न देने की अपील भी की है। लेकिन उनके इस फैसले के तुंरत बाद से ही सोशल मीडिया और तमाम संगठनों के जरिए आक्रामक प्रतिक्रिया सामने आनी शुरू हो गई हैं।
यह पहला मौका नहीं, पिछले वर्ष भी ममता ने लिया था फैसला
ममता बनर्जी
यह पहला मौका नहीं हैं। पिछले वर्ष भी ममता बनर्जी ने दुर्गा पूजा मूर्ति विसर्जन पर मुहर्रम को तरजीह दी थी। हाईकोर्ट ने ममता के फैसले को गलत भी करार दिया था। बावजूद उसके ममता ने इस वर्ष दोबारा से मुहर्रम को तरजीह दिया है। यही वजह है कि उनके इस फैसले में सियासत की बू आ रही है।
इस दफे भी बंगाल भाजपा और विश्व हिन्दू परिषद ममता के फैसले के खिलाफ न्यायालय जाने की तैयारी में हैं। पिछली दफे उनके पास ममता के खिलाफ लड़ाई लड़ने का समय कम था। लेकिन एक माह का समय देकर ममता ने सबको सियासत चमकाने का मौका थमा दिया है। पिछले वर्ष 6 अक्टूबर, 2016 को कलकत्ता हाईकोर्ट की एकल पीठ के जस्टिस दीपांकर दत्ता ने राज्य सरकार के आदेश को ख़ारिज कर कहा था कि ऐसा कोई भी फैसला नहीं लिया जाना चाहिए, जिसके चलते दो समुदाय एक दूसरे के खिलाफ़ खड़े हो जाएं।
वाम ने करार दिया फसाद बढाने वाला कदम
मुहर्रम के दिन दुर्गा मूर्ति विसर्जन पर रोक के ममता सरकार के फैसले को मार्क्सवादी कम्यूनिस्ट पार्टी ने वोट बैंक की राजनीति का कदम करार दिया है। वाम नेता मौहम्मद सलीम ने अमर उजाला से बातचीत में कहा कि ममता बनर्जी फसाद बढाने वाले तत्वों की मदद कर रही हैं। ऐसे करके वे दोनों ही समुदायों का नुकसान कर रही हैं। वे सूबे में विकास करने में विफल रही हैं। इसलिए दूसरे मुद्दों के जरिए जनता का ध्यान बंटाने में लगी हैं।
ममता को उठाना पडेगा खामियाजा-भाजपा
मूर्ति विसर्जन की रोक के कदम को भाजपा ने वोट बैंक राजनीति की पराकाष्ठा करार दिया है। भाजपा प्रवक्ता जीवीएल नरसिंह राव ने अमर उजाला से बातचीत में कहा कि ममता ने यह कदम केवल राजनीतिक कारणों से लिया है। लगभग हर साल मुहर्रम और दुर्गा मूर्ति विसर्जन एक ही समय आते हैं।
देश की जनता दोनों त्यौहारों को एकसाथ मनाती है। देश के अन्य हिस्सों या प्रमुख शहरों में मुहर्रम के दिन मूर्ति विसर्जन से कोई परेशानी नहीं है। तो सिर्फ कलकत्ता में ही क्यों खतरा माना जा रहा है। यह दर्शाता है कि ममता का कदम सरासर राजनीतिक वोट बैंक से प्रेरित है। उनके फैसले से जनता में प्रतिशोध है। उन्हें राजनीतिक खामियाजा भुगतना पडेगा।
जिन्ना का सपना पूरा कर रही हैं ममता-विहिप
विश्व हिन्दू परिषद का कहना है कि वर्ष 1982 में जब वाम दल की सरकार थी तब भी मुहर्रम और दुर्गा मूर्ति विसर्जन एक ही दिन पडा था। तब वाम की सरकार ने ऐसा कोई कदम नहीं उठाया। दोनों धर्मों के लोगों ने शांति से अपना कार्य किया। लेकिन ममता बनर्जी सरेआम मुस्लिमों का पक्ष ले रही हैं।
विहिप महासचिव सुरेंद्र जैन ने कहा कि वोट बैंक से प्रेरित उनकी यह नीति पश्चिम बंगाल को हिन्दू-मुस्लिम के बीच बांट रही है। जो कार्य मौहम्मद अली जीन्ना करना चाहते थे वही कार्य ममता बनर्जी कर रही हैं। जैन ने कहा कि बंगाल की जनता ममता के मंसूबों को पूरा नहीं होने देंगी।
ममता पर क्यों लग रहे हैं वोट बैंक राजनीति के आरोप
ममता बनर्जी
- फोटो : ANI
दरअसल, ममता बनर्जी ने मुख्यमंत्री पद पर रहते हुए कुछ ऐसे कदम उठाए हैं जिनसे उनकी छवि मुस्लिम हितैषी बनती जा रही है। उपर से भाजपा और उसके मातृ संगठन संघ परिवार ने पश्चिम बंगाल की ममता सरकार के खिलाफ हमले तेज कर दिए हैं।
बीते दिनों बंगाल के कई हिस्सों में हुए हिन्दू—मुस्लिम दंगों में ममता पर एक खास वर्ग का पक्ष लेने का आरोप लगा। तो तीन तलाक पर सर्वोच्च नयायालय के फैसले का उनके एक मंत्री ने सरेआम विरोध जताया है। अब ममता ने दूर्गा पूजा मूर्ति विसर्जन पर भी मुहर्रम को तरजीह दी है। जिससे उनकी छवि हिन्दूओं के खिलाफ खलनायक के रूप मेें बनती जा रही है। माना जा रहा है कि सूबे में 27 प्रतिशत आबादी मुस्लिमों की है। इनको साधकर ममता बनर्जी लंबी राजनीतिक पारी खेलने के मूड में है।
उनके मुस्लिम हितैषी छवि के पेश करने से कांग्रेस और वाम दलों का भी खासा नुकशान होगा। पहले से ही इन दोनों दलों की राजनीति पतली है। ममता नहीं चाहती हैं कि कांग्रेस और वाम दोबारा से सूबे में पैर पसारें। क्योंकि उनकी राजनीतिक जमीन कांग्रेस और वाम के वोटबैंक पर ही मजबूत हुई है।
यही वजह है कि ममता बनर्जी हिन्दू-मुस्लिम सियासत से जुडे मुद्दों को समय-समय पर हवा देती रहती हैं। ताकि एकमुश्त 27 प्रतिशत मुस्लिम आबादी उनके साथ जुडी रहे। तो उनकी इस रणनीति के लिए सूबे में भाजपा की मजबूती उन्हें रास आती है। इसीलिए ममता ऐसे मुद्दे उछाल रहीं है जिससे भगवा परिवार उनके खिलाफ मुखर रह सके। हालांकि उनकी इस सियासत को विकास कार्यों की असफलता और भ्रष्टाचार के मुद्दों से ध्यान हटाने की कवायद के रूप में भी देखा जा रहा है। उनके कई सांसद और मंत्री नारदा मामले में फंसे हुए हैं।
भाजपा के लिए सुनहरा मौका
ममता के जरिए शुरू की गई मुस्लिम हितैषी राजनीति भाजपा के लिए सुनहरा अवसर प्रदान कर रही है। मिशन 2019 के लिए भाजपा को पश्चिम बंगाल से करीब 15 सीटों की उम्मीद है। वर्तमान में सूबे से उसकी केवल 2 सीटें हैं। यही वजह है कि भाजपा से लेकर पूरा संघ परिवार ममता के खिलाफ मुखर है।
बीते वर्ष के अंत में संघ ने हैदराबाद में संपन्न अपनी अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा की बैठक में बकायदा प्रस्ताव पारित कर कहा था कि ममता बनर्जी की सरकार हिन्दूओं पर अत्याचार कर रही है। उनके इस अत्याचार के खिलाफ संघ ने राष्ट्रव्यापी अभियान का आह्वान किया था।संघ को भी लगता है कि ममता की मुस्लिम हितैषी नीति के खिलाफ आक्रामक होकर सूबे में भगवा परिवार की पकड मजबूत बन सकती है। हाल में हुए निकाय चुनावों में इसका असर भी दिखा। भाजपा दूसरे नंबर की पार्टी बन गई है।