ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड (एआईएमपीएलबी) ने समान नागरिक संहिता (यूसीसी) के मुद्दे पर बुधवार को बैठक बुलाई है, बोर्ड के सभी सदस्य वर्चुअल बैठक भाग लेंगे और यूसीसी पर चर्चा करेंगे।
यूसीसी पर पीएम मोदी के बयान के बाद केंद्र सरकार ने इस मसौदे पर कवायद तेज कर दी हैं। आने वाले संसदीय सत्र में इस बिल के पेश होने संभावना हैं। हालांकि, कई धार्मिक संगठन और राजनीतिक दल इसका विरोध कर रहे हैं। इसको लेकर ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड (एआईएमपीएलबी) ने समान नागरिक संहिता (यूसीसी) के मुद्दे पर बुधवार को बैठक बुलाई है, बोर्ड के सभी सदस्य वर्चुअल बैठक भाग लेंगे और यूसीसी पर चर्चा करेंगे।
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भारत के विधि आयोग ने ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड समेत विभिन्न मान्यता प्राप्त धार्मिक संगठनों और जनता से यूसीसी पर विचार साझा करने को कहा था।
ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड कर रहा इसका विरोध
वहीं एआईएमपीएलबी के महासचिव ने कहा कि यूसीसी पर पहले भी चर्चा हुई और लोगों की इस पर राय जानी थी, जिसके बाद निष्कर्ष निकला कि यूसीसी न तो आवश्यक है और न ही वांछनीय है। इससे पहले, एआईएमपीएलबी ने अपनी कार्यकारी बैठक में एक प्रस्ताव पारित किया था जिसमें कहा गया था कि समान नागरिक संहिता (यूसीसी) का कार्यान्वयन संभव नहीं है क्योंकि यह एक अनावश्यक अधिनियम होगा।
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भाजपा के एजेंडे में शामिल है समान नागरिक संहिता
बता दें कि यूसीसी भाजपा के एजेंडे में लंबे समय से था। विधि आयोग ने 14 जून को उस प्रस्ताव के बारे में 30 दिनों के भीतर जनता और मान्यता प्राप्त धार्मिक संगठनों से विचार मांगकर यूसीसी पर अपनी कवायद फिर से शुरू कर दी थी। वहीं इस मुद्दे को हवा जब लगी तब 27 जून को, पीएम मोदी ने भोपाल में यूसीसी के बारे में बात करते हुए कहा कि देश दो कानूनों पर नहीं चल सकता है और समान नागरिक संहिता संविधान का हिस्सा है। भाजपा के 2019 के लोकसभा चुनाव घोषणापत्र में, पार्टी ने सत्ता में आने पर यूसीसी को लागू करने का वादा किया था।