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चिंताजनक: छह माह में मेडिकल कॉलेजाें के 12 डॉक्टरों ने की आत्महत्या, काम का दबाव या समस्या कुछ और?

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डॉक्टर दबाव से जूझ रहे (सांकेतिक) - फोटो : अमर उजाला
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काम के बोझ और रैगिंग के कारण इस साल मार्च से 24 सितंबर के बीच देश के 11 मेडिकल कॉलेजों और चिकित्सा संस्थानों में 12 पीजी रेजिडेंट, जूनियर डॉक्टर एवं मेडिकल छात्रों ने आत्महत्या की है।  इनमें दो-दो मामले चंडीगढ़ के जीएमसीएच-32 और सूरत के सरकारी मेडिकल कॉलेज के हैं।
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डॉक्टरों ने ड्यूटी के कारण नींद पूरी न होने की बात कही
इन आत्महत्याओं के पीछे 30-40 घंटे की लगातार ड्यूटी, पढ़ाई का दबाव, रैगिंग की घटना बताई जा रही है। फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया मेडिकल एसोसिएशन ने पिछले दिनों 28 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों के 1,260 रेजिडेंट डॉक्टरों पर अध्ययन किया था। इनमें 87.8 फीसदी डॉक्टरों ने ड्यूटी के कारण नींद पूरी न होने की बात कही।

इलाज करने वाले डॉक्टर बदहाल अवस्था में
61.8 फीसदी ने लगातार 36 घंटे से ज्यादा काम करने की शिकायत की। 16.7 फीसदी डॉक्टरों ने आत्महत्या के विचार आने की बात कही। 67.2 फीसदी डॉक्टरों में मध्यम और 13% में उच्च तनाव पाया गया। इंडियन मेडिकल एसोसिएशन के जूनियर डॉक्टर्स नेटवर्क के राष्ट्रीय प्रवक्ता डॉ. ध्रुव ने कहा, दुर्भाग्य है कि दूसरों का इलाज करने वाले डॉक्टर बदहाल अवस्था में हैं।  
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