कर्नाटक की आलंद लाडले माशाइक दरगाह में हिंदू धार्मिक अनुष्ठानों पर रोक लगाने की मांग को लेकर दाखिल याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई से इन्कार कर दिया है। अदालत ने साफ कहा कि ऐसे विवाद सीधे शीर्ष अदालत में नहीं लाए जाने चाहिए। याचिकाकर्ता को पहले संबंधित हाईकोर्ट का रुख करना चाहिए। यह मामला महाशिवरात्रि पूजा और दरगाह परिसर में धार्मिक गतिविधियों से जुड़ा है।
दरगाह प्रबंधन ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल कर मांग की थी कि परिसर में महाशिवरात्रि पूजा और अन्य हिंदू अनुष्ठानों पर रोक लगाई जाए। प्रबंधन का कहना था कि कुछ पक्ष हर साल अंतरिम अदालत आदेश लेकर दरगाह के धार्मिक स्वरूप को बदलने की कोशिश करते हैं। याचिका में कहा गया कि जो बात अंतिम फैसले से साबित नहीं हो सकती, उसे अंतरिम आदेश के जरिए लागू कराया जा रहा है। इसे उपासना स्थल कानून 1991 की भावना के खिलाफ बताया गया।
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सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई से किया इनकार
जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस सतीश चंद्र शर्मा की पीठ ने याचिका पर सुनवाई से इन्कार करते हुए कहा कि यह मामला अनुच्छेद 32 के तहत सीधे सुप्रीम कोर्ट में लाने योग्य नहीं है। पीठ ने कहा कि पहले हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की जानी चाहिए। अदालत ने संकेत दिया कि उचित कानूनी मंच का पालन जरूरी है। इससे पहले भी शीर्ष अदालत की एक अन्य पीठ ने इसी तरह की टिप्पणी की थी।
पहले भी कोर्ट दे चुका है यह सलाह
एक दिन पहले मुख्य न्यायाधीश की पीठ ने भी कहा था कि ऐसे मामलों में सीधे सुप्रीम कोर्ट आने के बजाय संबंधित हाईकोर्ट जाना चाहिए। अदालत ने स्पष्ट किया कि तथ्यों और स्थानीय विवादों से जुड़े मामलों की पहली सुनवाई हाईकोर्ट स्तर पर होनी चाहिए। सुप्रीम कोर्ट अंतिम संवैधानिक उपचार का मंच है, न कि हर विवाद की शुरुआती सुनवाई का।
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स्थल का धार्मिक और ऐतिहासिक दावा
विवादित स्थल को 14वीं शताब्दी के सूफी संत हजरत शेख अलाउद्दीन अंसारी उर्फ लाडले माशाइक से जुड़ा बताया जाता है। वहीं कुछ हिंदू पक्ष इसे 15वीं शताब्दी के संत राघव चैतन्य से भी संबंधित मानते हैं। परिसर में शिवलिंग होने का दावा भी किया गया है। इसी आधार पर पूजा के अधिकार को लेकर दावे किए जाते रहे हैं।
2022 से बढ़ा विवाद, पूजा की मिली थी अनुमति
वर्ष 2022 में पूजा अधिकार को लेकर दोनों समुदायों के बीच तनाव की स्थिति बनी थी। बाद में फरवरी 2025 में कर्नाटक हाईकोर्ट ने 15 हिंदू श्रद्धालुओं को महाशिवरात्रि के अवसर पर पूजा की अनुमति दी थी। उसी पृष्ठभूमि में दरगाह प्रबंधन ने रोक की मांग को लेकर नई याचिका दाखिल की थी। अब सुप्रीम कोर्ट के इनकार के बाद मामला फिर हाईकोर्ट जाने की दिशा में बढ़ेगा।
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