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यूनीकॉर्न के पीछे है अजीत डोभाल का दिमाग, ऐसे ही नहीं कहा जाता 'भारत का जेम्स बांड'

Wed, 05 Dec 2018 05:04 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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ajit doval, NSA
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अगस्ता वेस्टलैंड हेलीकॉप्टर सौदे में कथित बिचौलिये क्रिश्चियन मिशेल जेम्स को यूएई से प्रत्यर्पित करके भारत लाने में अहम भूमिका निभाने वाले भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल ने एक बार फिर ये साबित कर दिया कि वो कितने काबिल हैं। मिशेल को 'यूनिकॉर्न' नामक अभियान के तहत भारत लाया गया। इस अभियान को अजीत डोभाल के ही नेतृत्व में चलाया गया था। हालांकि ये पहली बार नहीं है, जब अजीत डोभाल ने किसी मिशन का नेतृत्व किया हो। उन्होंने कई ऐसे खतरनाक मिशन को अंजाम दिया है, जिसे सुनकर लोग दांतों तले उंगलियां दबा लेते हैं। 

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20 जनवरी, 1945 को उत्तराखंड के पौड़ी गढ़वाल में जन्मे अजीत डोभाल साल 1968 के केरल कैडर के आईपीएस अधिकारी हैं। 1972 में भारत की खुफिया एजेंसी आईबी से जुड़ने के बाद उन्होंने कई ऐसे खतरनाक कारनामों को अंजाम दिया है, जिन्हें सुनकर जेम्स बांड के किस्से भी फीके लगने लगते हैं। वे भारत के एकमात्र ऐसे नागरिक हैं, जिन्हें सैन्य सम्मान कीर्ति चक्र से सम्मानित किया गया है। यह सम्मान पाने वाले वह पहले पुलिस अधिकारी हैं।  

पाकिस्तान में 7 साल तक रहे खुफिया जासूस  

अजीत डोभाल ने अपने करियर का ज्यादातर समय खुफिया विभाग में ही बिताया है। कहा जाता है कि वो लगातार सात सालों तक पाकिस्तान में खुफिया जासूस बनकर रहे हैं और इस दौरान कई महत्वपूर्ण जानकारियां भारत को दी हैं। 
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'ऑपरेशन ब्लू स्टार' में भी निभाई खुफिया जासूस की भूमिका 

अजीत डोभाल की जिंदगी किसी जासूसी फिल्म के जासूस की तरह ही रही है। उन्होंने भारतीय सेना के एक महत्वपूर्ण मिशन 'ऑपरेशन ब्लू स्टार' के दौरान भी एक जासूस की भूमिका निभाई थी और कई महत्वपूर्ण खुफिया जानकारी उपलब्ध कराई थी, जिसकी मदद से सैन्य ऑपरेशन सफल रहा था। कहा जाता है कि इस दौरान उनकी भूमिका एक ऐसे पाकिस्तानी जासूस की थी, जिसने खालिस्तानियों का विश्वास जीत लिया था और उनकी तैयारियों की जानकारी भारतीय सेना को मुहैया कराई थी। 

1989 में 'ऑपरेशन ब्लैक थंडर' का भी किया था नेतृत्व 

साल 1989 में अजीत डोभाल ने अमृतसर के स्वर्ण मंदिर से चरमपंथियों को निकालने के लिए 'ऑपरेशन ब्लैक थंडर' का भी नेतृत्व किया था। उन्होंने पंजाब पुलिस और राष्ट्रीय सुरक्षा गार्ड के साथ मिलकर खुफिया ब्यूरो के अधिकारियों के साथ मुख्य भूमिका निभाई थी। 

1999 में हुए विमान हाईजैक मामले में बने थे मुख्य वार्ताकार 

साल 1999 में जब आतंकियों ने भारतीय एयरलाइंस की उड़ान संख्या आईसी-814 को काठमांडू से हाईजैक कर लिया गया था, तब अजीत डोभाल को ही भारत की ओर से मुख्य वार्ताकार बनाया गया था। बाद में, इस फ्लाइट को कंधार ले जाया गया था और यात्रियों को बंधक बना लिया गया था। 

उग्रवादी संगठनों में ही कर ली थी घुसपैठ 

कश्मीर में भी उन्होंने बेहतरीन काम किया था और उग्रवादी संगठनों का भरोसा जीतकर उसमें घुसपैठ कर ली थी। उन्होंने उग्रवादियों को ही शांतिरक्षक बनाकर उग्रवाद की धारा को मोड़ दिया था। कहा जाता है कि उन्होंने एक प्रमुख भारत-विरोधी उग्रवादी को अपना सबसे बड़ा भेदिया बना लिया था और उससे उनके सारे राज जान लेते थे। 
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म्यांमार में हुए सर्जिकल स्ट्राइक में निभाई में अहम भूमिका  

डोभाल ने म्यांमार में हुए सर्जिकल स्ट्राइक में भी अहम भूमिका निभाई थी। उन्होंने ही पूर्वोत्तर भारत में सेना पर हुए हमले के बाद सर्जिकल स्ट्राइक की योजना बनाई थी और उसके बाद भारतीय सेना ने म्यांमार में घुसकर कार्रवाई करते हुए 30 उग्रवादियों को मार गिराया था। 

अपनी बेहतरीन योजना से रोमानियाई राजनयिक को बचाया    

वो अजीत डोभाल ही थे, जिन्होंने साल 1991 में खालिस्तान लिबरेशन फ्रंट द्वारा अपहरण किए गए रोमानियाई राजनयिक लिविउ राडू को बचाने के लिए एक योजना बनाई थी और उसमें वो सफल भी हुए थे। उनके इन्हीं हैरतअंगेज कारनामों की वजह से उन्हें 'भारत का जेम्स बांड' कहा जाता है। 
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