साल 1989 में अजीत डोभाल ने अमृतसर के स्वर्ण मंदिर से चरमपंथियों को निकालने के लिए 'ऑपरेशन ब्लैक थंडर' का भी नेतृत्व किया था। उन्होंने पंजाब पुलिस और राष्ट्रीय सुरक्षा गार्ड के साथ मिलकर खुफिया ब्यूरो के अधिकारियों के साथ मुख्य भूमिका निभाई थी।
1999 में हुए विमान हाईजैक मामले में बने थे मुख्य वार्ताकार
साल 1999 में जब आतंकियों ने भारतीय एयरलाइंस की उड़ान संख्या आईसी-814 को काठमांडू से हाईजैक कर लिया गया था, तब अजीत डोभाल को ही भारत की ओर से मुख्य वार्ताकार बनाया गया था। बाद में, इस फ्लाइट को कंधार ले जाया गया था और यात्रियों को बंधक बना लिया गया था।
उग्रवादी संगठनों में ही कर ली थी घुसपैठ
कश्मीर में भी उन्होंने बेहतरीन काम किया था और उग्रवादी संगठनों का भरोसा जीतकर उसमें घुसपैठ कर ली थी। उन्होंने उग्रवादियों को ही शांतिरक्षक बनाकर उग्रवाद की धारा को मोड़ दिया था। कहा जाता है कि उन्होंने एक प्रमुख भारत-विरोधी उग्रवादी को अपना सबसे बड़ा भेदिया बना लिया था और उससे उनके सारे राज जान लेते थे।
डोभाल ने म्यांमार में हुए सर्जिकल स्ट्राइक में भी अहम भूमिका निभाई थी। उन्होंने ही पूर्वोत्तर भारत में सेना पर हुए हमले के बाद सर्जिकल स्ट्राइक की योजना बनाई थी और उसके बाद भारतीय सेना ने म्यांमार में घुसकर कार्रवाई करते हुए 30 उग्रवादियों को मार गिराया था।
अपनी बेहतरीन योजना से रोमानियाई राजनयिक को बचाया
वो अजीत डोभाल ही थे, जिन्होंने साल 1991 में खालिस्तान लिबरेशन फ्रंट द्वारा अपहरण किए गए रोमानियाई राजनयिक लिविउ राडू को बचाने के लिए एक योजना बनाई थी और उसमें वो सफल भी हुए थे। उनके इन्हीं हैरतअंगेज कारनामों की वजह से उन्हें 'भारत का जेम्स बांड' कहा जाता है।