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'शिमला में भुट्टो से मिलने गई थीं इंदिरा': रुबियो से मुलाकात पर जयशंकर का पलटवार; कांग्रेस पर क्या सवाल उठाए?

Thu, 22 Oct 2026 08:55 PM IST
हिमांशु सिंह चंदेल न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

विदेश मंत्री एस जयशंकर ने मुंबई में अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो से मुलाकात पर कांग्रेस की आलोचना का जवाब देते हुए इंदिरा गांधी और भुट्टो की शिमला मुलाकात का उदाहरण दिया। उन्होंने दिल्ली से बाहर बैठकों पर सवाल उठाने वालों से पूछा कि क्या ऐसी मुलाकातें समन किए जाने जैसी हैं? राहुल गांधी ने रुबियो की बैठक पर क्या टिप्पणी की थी? विदेश मंत्रालय ने मुंबई को लेकर क्या कहा और पहले ऐसी बैठकें कहां हुई थीं? आइए, सबकुछ विस्तार से जानते हैं...

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जयशंकर ने क्यो इंदिरा गांधी और भुट्टो की मुलाकात याद दिलाई? - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार
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विदेश मंत्री एस जयशंकर ने मुंबई में अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो के साथ हुई मुलाकात को लेकर कांग्रेस की आलोचना पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि उन्हें समझ नहीं आया कि विपक्षी दलों को मुंबई में विदेशी नेता की मेजबानी करने पर आपत्ति क्यों है। जयशंकर ने इस बहस के बीच पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी और पाकिस्तान के तत्कालीन नेता भुट्टो की शिमला में हुई मुलाकात का भी जिक्र किया। उन्होंने सवाल किया कि क्या दिल्ली से बाहर किसी विदेशी नेता से मिलना समन किए जाने जैसा है?

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कांग्रेस की आलोचना पर जयशंकर ने क्या कहा?
जयशंकर ने गुरुवार को एक वर्ल्ड समिट में कहा कि उन्हें यह समझ नहीं आया कि मुंबई में अमेरिकी विदेश मंत्री की मेजबानी को लेकर विपक्षी दल आलोचना क्यों कर रहे हैं। उन्होंने मुंबई को भारत की वित्तीय राजधानी और बॉलीवुड का केंद्र बताते हुए कहा कि इस शहर में बहुत कुछ खास है। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि शायद मुंबई को ही विपक्षी दल पसंद नहीं हैं। जयशंकर की यह प्रतिक्रिया प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार पर कांग्रेस नेता राहुल गांधी की टिप्पणी के संदर्भ में आई। राहुल गांधी ने पिछले सप्ताह मुंबई में जयशंकर और रुबियो की मुलाकात को लेकर सरकार पर निशाना साधा था और इसे ‘समन’ किए जाने जैसा बताया था।

इंदिरा गांधी और भुट्टो की मुलाकात का जिक्र क्यों किया?
कांग्रेस की आलोचना का जवाब देते हुए जयशंकर ने पुराने उदाहरण सामने रखे। उन्होंने कहा कि अगर दिल्ली से बाहर किसी विदेशी नेता या समकक्ष से मिलने जाने को समन किया जाना माना जाता है, तो ऐसे कई उदाहरण दिए जा सकते हैं। जयशंकर ने कहा कि इंदिरा गांधी भुट्टो से मिलने शिमला गई थीं। उन्होंने सवाल किया कि क्या उस समय इंदिरा गांधी को भी समन किया गया था? उन्होंने पूर्व विदेश मंत्री सलमान खुर्शीद का भी उदाहरण दिया, जो पाकिस्तान के प्रधानमंत्री से मिलने जयपुर गए थे। जयशंकर ने कहा कि इस विषय पर सभी को परिपक्वता के साथ बातचीत करनी चाहिए। उनकी इस टिप्पणी पर कार्यक्रम में मौजूद लोगों ने तालियां बजाईं।
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मुंबई में रुबियो और संयुक्त अरब अमीरात के प्रतिनिधियों से कब मिले जयशंकर?
विदेश मंत्रालय के अनुसार, जयशंकर ने 19 और 20 अक्टूबर को मुंबई में संयुक्त अरब अमीरात और अमेरिका के अपने समकक्षों की मेजबानी की थी। इस दौरान उन्होंने अमेरिकी स्वतंत्रता की 250वीं वर्षगांठ से जुड़े समारोह में भी हिस्सा लिया। इस कार्यक्रम में वह विशिष्ट अतिथि के तौर पर शामिल हुए। मुंबई में इन मुलाकातों को लेकर उठे सवालों के बीच विदेश मंत्रालय ने भी शहर को लेकर की गई आलोचना को खारिज किया था। मंत्रालय का कहना था कि विदेशी नेताओं और प्रतिनिधियों की मेजबानी केवल दिल्ली तक सीमित नहीं रही है। बीते करीब एक दशक से विदेशी गणमान्य व्यक्तियों की बैठकें दिल्ली के बाहर भी आयोजित होती रही हैं।

दिल्ली के बाहर विदेशी नेताओं से मुलाकात के कौन-कौन से उदाहरण दिए गए?
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने भी दिल्ली के बाहर हुई कई मुलाकातों के उदाहरण दिए थे। उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री ने स्पेन के प्रधानमंत्री की मेजबानी वडोदरा में की थी। जर्मनी के चांसलर मर्ज की मेजबानी अहमदाबाद में हुई थी, जबकि मॉरीशस के प्रधानमंत्री का वाराणसी में स्वागत किया गया था। इसके अलावा, जयशंकर ने गोवा में शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) के विदेश मंत्रियों की बैठक की मेजबानी की थी। बोत्सवाना के विदेश मंत्री की मेजबानी गुजरात के केवड़िया में हुई थी और अमृतसर में हार्ट ऑफ एशिया सम्मेलन आयोजित किया गया था। मंत्रालय ने इन उदाहरणों के जरिए स्पष्ट किया कि विदेशी नेताओं के साथ बैठक के लिए दिल्ली से बाहर स्थान चुनना कोई नई परंपरा नहीं है।

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