इस बीच यह सवाल उठ रहे हैं कि आखिर विमान से पक्षी टकराने की घटना कितनी बड़ी है? पक्षी के टकराने से इन विमानों में ऐसी क्या खराबी पैदा हो गई जो इनकी इमरजेंसी लैंडिंग तक करानी पड़ गई? इसके अलावा क्या पक्षियों का विमानों से टकराना हवाई सुरक्षा के लिए घातक है? इतनी ऊंचाई पर पक्षी टकराने की घटना क्यों होती है और आखिर इस समस्या का हल क्या है?
पहले जानें- रविवार को दो फ्लाइट्स की आपात लैंडिंग क्यों?
रविवार सुबह गुवाहाटी से उड़ान भरने वाले एक इंडिगो ए320 नियो एयरक्राफ्ट का इंजन पक्षी के टकराने की वजह से खराब हो गया था। बताया गया था कि जब यह पक्षी इंजन में फंसा तब विमान 1600 फीट की ऊंचाई पर था। इसके बाद पायलटों ने एहतियात बरतते हुए विमान को गुवाहाटी एयरपोर्ट लौटाने की सूचना दी और प्लेन की इमरजेंसी लैंडिंग करवाई।
दूसरी घटना पटना से दिल्ली जाने वाली स्पाइसजेट फ्लाइट के साथ हुई। बोइंग 737-800 विमान के पायलटों को टेक-ऑफ के दौरान ही पक्षी के विमान से टकराने की आशंका हुई। टेक-ऑफ के ठीक बाद जब विमान ने उड़ान जारी रखी तो केबिन क्रू ने उन्हें सूचना दी कि विमान के बाएं इंजन से चिंगारी निकल रही है। इसके बाद एयरपोर्ट के ट्रैफिक कंट्रोल ने भी विमान के पायलटों को इंजन से धुआं निकलने की सूचना दी। इसके बाद विमान की पटना में ही इमरजेंसी लैंडिंग कराई गई।
विमान से पक्षी के टकराने की घटना है क्या, इससे क्या हो सकता है?
उड़ान भरने जा रहे या भर चुके विमान के लिए पक्षी का टकराना सबसे आम खतरा है। ऐसी घटनाएं ज्यादातर किसी फ्लाइट के टेकऑफ के दौरान ही होती हैं। हर दिन विमानों के साथ चिड़िया के टकराने की कई घटनाएं होती हैं, लेकिन कई बार विमान के कुछ अहम हिस्सों से पक्षी का टकराना इसके लिए घातक हो सकता है। जैसे अगर कोई पक्षी विमान के एयरफ्रेम (आगे के ढांचे) से टकराता है, तो इससे उड़ान भरने में कोई दिक्कत नहीं होती। लेकिन अगर कोई पक्षी विमान के इंजन में समा जाए, तो उसके फंसने से फ्लाइट को ऊर्जा देने वाले पावर प्लांट्स को नुकसान पहुंच सकता है। ऐसी स्थिति में पूरा इंजन ही खराब हो सकता है। चूंकि एक विमान में बाईं और दाईं तरफ मौजूद दो इंजन पूरी उड़ान को संतुलित रखते हैं, ऐसे में किसी भी एक तरफ इंजन के खराब होने से पायलट को विमान का संतुलन बनाए रखने में दिक्कत आ सकती है।
अगर कभी पायलट को विमान के इंजन से पक्षी के टकराने की आशंका होती है तो नियमों के तहत वह सबसे करीबी एयरपोर्ट के ग्राउंड क्रू और ट्रैफिक कंट्रोल को सूचना देता है। वैसे तो विमान के एयरफ्रेम से पक्षी के टकराने की घटना पर एटीसी को सूचना देना जरूरी नहीं है, लेकिन अगर कोई पक्षी विमान की खिड़की या विमान की विंडस्क्रीन (पायलट के सामने वाले शीशे) से टकराता है और उसे क्षतिग्रस्त कर देता है तो पायलट के लिए विमान को जल्द से जल्द लैंड कराना जरूरी होता है।
हवाई सुरक्षा के लिए कितना खतरनाक है विमान से पक्षी का टकराना?
आमतौर पर छोटे विमानों के लिए पक्षी का टकराना ज्यादा खतरनाक हो सकता है। हालांकि, ज्यादातर आधुनिक एयरलाइनर इस तरह से तैयार किए जा रहे हैं कि वे एक इंजन के खराब होने के बाद भी दूसरे इंजन के सहारे सुरक्षित लैंड कर सकें। रविवार को इंडिगो और स्पाइसजेट के विमान भी इसी तरह की आधुनिक तकनीक से बने हैं। एक चिंता की बात यह है कि विमान से पक्षी टकराने की ज्यादातर घटनाएं टेकऑफ और लैंडिंग के दौरान होती हैं। इसलिए उड़ान के बेहद कठिन समय के वक्त पायलटों का ध्यान भटकना पूरे विमान की सुरक्षा को खतरे में डाल सकता है।
आखिर विमान से पक्षी टकराने की घटना होती क्यों है और इसका समाधान क्या है?
देश के ज्यादातर बड़े शहरों में एयरपोर्ट्स को घनी आबादी वाले क्षेत्रों से दूर बनाया गया है। इसके चलते एयरपोर्ट्स और जंगल वाले इलाकों के बीच दूरी काफी कम रह जाती है। मानसून सीजन में बारिश की वजह से एयरपोर्ट के आसपास के क्षेत्रों में कीड़े पैदा होते हैं और इन्हें पकड़ने के लिए इन इलाकों में पक्षियों का निकलना भी शुरू हो जाता है। इसी के चलते मानसून के दौरान एयरपोर्ट के पास विमानों और पक्षियों के टकराने की घटना सबसे ज्यादा होती है। इसके अलावा एयरफील्ड के पास मौजूद कचरे के ढेर की वजह से भी पक्षी इसी इलाके में मौजूद रहते हैं, जो कि हादसे का कारण बनता है।
कई बार काफी ऊंचाई पर उड़ रहे विमान भी पक्षियों से टकरा जाते हैं। यह कम ऊंचाई पर उड़ रही फ्लाइट्स से टकराने से ज्यादा खतरनाक होता है, क्योंकि अचानक पक्षी के टकराने और विमान के क्षतिग्रस्त होने से विमान में दबाव अचानक कम हो जाता है।
डीजीसीए ने विमानों से पक्षी के टकराने की घटना पर कुछ गाइडलाइंस तैयार की हैं। इसके तहत विमानन नियामकों को नियमित अंतराल पर एयरपोर्ट और इसके आसपास के क्षेत्र की जांच करना जरूरी है। इसके अलावा विमानन अफसर स्थानीय एजेंसियों के साथ मिलकर एयरोड्रोम की भी जांच करते हैं ताकि उन्हें पक्षियों का ठिकाना बनने से रोका जा सके।