देश में अभी तक इस बात का कोई पुख्ता सबूत, प्रमाण या अध्ययन नहीं जुटाया जा सका है कि वायु प्रदूषण के कारण ही मौतें हो रही हैं। वहीं हाल ही में आई कई वैश्विक रिपोर्टों में कहा गया है कि भारत में वायु प्रदूषण के जरिये मौतों का आंकड़ा बढ़ा है। इस बीच केंद्रीय पर्यावरण मंत्री अनिल माधव दवे ने कहा है कि वह विदेशी संस्थाओं की रिपोर्टों पर आंख मूंद कर यकीन नहीं कर सकते। इन रिपोर्टों का वैज्ञानिक आधार पुख्ता नहीं है। स्वास्थ्य मंत्रालय के साथ इस बात का अध्ययन किया जा रहा है। जल्द ही इस संबंध में अध्ययन लोगों के बीच लाया जाएगा।
मंगलवार को पर्यावरण मंत्रालय में संवाददाता सम्मेलन के दौरान दवे ने कहा कि हम अपने अध्ययन पर ज्यादा यकीन करेंगे। वहीं एक सवाल पर उन्होंने कहा कि विदेशी रिपोर्टों को न तो स्वीकार किया जा रहा और न ही पूरी तरह खारिज। हम इसका संज्ञान लेते हैं लेकिन वायु प्रदूषण से मौत को बिना पुख्ता अध्ययन या आधार के जोड़ना ठीक नहीं है। पर्यावरण मंत्री हर सवाल पर उहापोह में नजर आए। विदेशी संस्थाओं की रिपोर्ट पर कोई भी राय उन्होंने जाहिर नहीं की।
दवे ने राज्यों और स्थानीय निकायों की बात करते हुए कहा कि वायु प्रदूषण पर नियंत्रण की सबसे बड़ी जिम्मेदारी उन्हीं पर है। वायु प्रदूषण कोई रॉकेट साइंस नहीं है। केंद्र सिर्फ उनके लिए मार्गदर्शक का काम कर सकता है। उन्होंने कहा कि कई बार वायु प्रदूषण से जुड़ी रिपोर्टों की बाढ़ आ जाती है खासतौर से भारत के संदर्भ में।
भारत में कई गंभीर सरकारी व गैर सरकारी संस्थाएं हैं, जो इस मुद्दे पर शोध कर रही हैं। हम एक गौरवान्वित देश हैं जो अपनी रिपोर्ट तैयार करेंगे और उस पर एक्शन लेंगे। वायु गुणवत्ता के लिए राज्य और अन्य प्राधिकरणों को सिर्फ चार से पांच बिंदुओं पर कार्य करना है। वायु गुणवत्ता स्वत: ही ठीक हो जाएगी।