एअर इंडिया की फुकेत-दिल्ली उड़ान (एआई 2379) के टर्बुलेंस मामले में एएआईबी की अंतरिम रिपोर्ट एक महीने से पहले आने की उम्मीद है। यह जानकारी सूत्रों की ओर से गुरुवार को दी गई।
थाईलैंड के फुकेत से दिल्ली आते समय 36 हजार फुट की ऊंचाई पर उड़ रहा एअर इंडिया का विमान एआई 2379 अचानक से 300 फीट नीचे आ गया था, जिससे करीब 24 लोग घायल हो गए थे।
कब आएगी रिपोर्ट?
सूत्रों ने बताया कि सरकार ने विमान दुर्घटना जांच ब्यूरो (एएआईबी) को इस मामले में जांच तेज करने के निर्देश भी दिए हैं। एअर इंडिया के अहमदाबाद में दुर्घटना का शिकार हुए विमान एआई-171 के मुकाबले इस मामले में सारे सबूत मौजूद हैं। एफडीआर और सीवीआर को सुरक्षित कर लिया गया है। मेडिकल जांच के रिकॉर्ड और बयान इकट्ठा किए जाएंगे। इससे जांच तेजी से आगे बढ़ेगी।
इसके अलावा, विमानन नियामक और नागर विमानन मंत्रालय ने एअर इंडिया को फटकार लगाई है। एअर इंडिया से कहा गया है कि वह अपने काम करने के तरीके को ठीक करे। फ्लाइट क्रू के डोपिंग की समस्या से निपटने के लिए कड़े नियम बनाने की जरूरत है।
एफडीआर-सीवीआर की जांच तेज होगी
सूत्रों के मुताबिक, एफडीआर और सीवीआर डाटा के विश्लेषण में तेजी लाई जाएगी। कड़े कानून बनाने और कड़ी सजा का प्रावधान करने के लिए एएआईबी की जांच और रिपोर्ट की प्रक्रिया को तेज किया जाएगा।
ये भी पढ़ें:
'एक नेता के अहंकार और अनुशासनहीनता की भेंट चढ़ गया मानसून सत्र', भाजपा का राहुल गांधी पर हमला; क्या कहा?
पायलट के डोप टेस्ट में क्या मिला?
इसके अलावा, सूत्रों ने पुष्टि की है कि फुकेत से दिल्ली आने वाली एअर इंडिया की उड़ान के मुख्य पायलट का दूसरा डोप टेस्ट भी पॉजिटिव आया है।
दिल्ली में उड़ान के बाद हुई स्क्रीनिंग में पायलट का नशीले पदार्थों के लिए किया गया टेस्ट पॉजिटिव पाया गया। कुछ समय बाद एक और टेस्ट किया गया, जिसमें भी नतीजा पॉजिटिव आया। बताया जा रहा है कि टेस्ट से पुष्टि हुई कि पायलट ने मारिजुआना (जिसे आम तौर पर 'वीड' कहा जाता है) का सेवन किया था।
सभी पायलटों की होगी साइकोएक्टिव पदार्थों की जांच
एयर इंडिया और एयर इंडिया एक्सप्रेस अपने सभी पायलटों की साइकोएक्टिव पदार्थों की जांच कराएंगी। टाटा समूह के स्वामित्व वाली इन दोनों एयरलाइनों में कुल 5,000 से ज्यादा पायलट हैं।
दोनों एयरलाइनों ने पायलटों को भेजे एक अंदरूनी संदेश में कहा है कि ऐसे सभी पदार्थों और दवाओं की पूरी जांच करने का फैसला किया गया है, जिनके मौजूदा नियमों के तहत इस्तेमाल की अनुमति नहीं है। सूत्रों के मुताबिक, यह जांच जरूरी होगी और गुरुवार से शुरू होगी।
यह जांच गुरुग्राम अकादमी में ट्रेनिंग के साथ-साथ की जाएगी। उड़ान के बाद फ्लाइट ब्रीफिंग सेंटर, एयरलाइनों के दफ्तरों या संबंधित बेस की ओर से तय जगहों पर भी यह जांच होगी। सूत्रों ने कहा कि यह कदम पहले से ही उठाया जा रहा है। इसका मकसद सुरक्षा के सर्वोच्च मानकों को सुनिश्चित करना है। साथ ही यात्रियों, इससे जुड़े लोगों और आम लोगों को भरोसा दिलाना भी इसका मकसद है।