एअर इंडिया की फुकेट-दिल्ली उड़ान में पिछले सप्ताह टर्बुलेंस (हवा में अचानक तेज झटकों) के कारण हुए हादसे की जांच में फ्रांस की विमान दुर्घटना जांच एजेंसी बीईए और एयरबस, विमान दुर्घटना जांच ब्यूरो (एएआईबी) की मदद करेंगे। इस घटना में कम से कम 17 लोग घायल हुए थे। सूत्रों के अनुसार, दोनों टीम मंगलवार को राष्ट्रीय राजधानी पहुंचेंगी।
चार अगस्त को एअर इंडिया की फुकेट-दिल्ली उड़ान एआई2379 एयरबस ए320 विमान वीटी-ईएक्सओ से संचालित हो रही थी। उड़ान के दौरान विमान की ऊंचाई अचानक करीब 300 फीट कम हो गई। इसके बाद विमान स्थिर हुआ और राष्ट्रीय राजधानी में सुरक्षित उतर गया। इस घटना की जांच अंतरराष्ट्रीय नागरिक उड्डयन संगठन (आईसीएओ) के एनेक्स 13 के तहत विमान दुर्घटना जांच ब्यूरो कर रहा है। एयरबस के प्रवक्ता ने सोमवार को बताया कि कंपनी के विशेषज्ञों की टीम जांच में मदद के लिए भेजी जा रही है।
एयरबस के प्रवक्ता ने दी क्या जानकारी?
एयरबस के प्रवक्ता ने एक बयान में कहा, "आईसीएओ एनेक्स 13 के अनुसार, एयरबस संबंधित जांच अधिकारियों को तकनीकी सहायता उपलब्ध करा रहा है। हम एयरलाइन को सक्रिय रूप से सहयोग दे रहे हैं और जैसे ही कोई अतिरिक्त जानकारी उपलब्ध होगी, उसे साझा करेंगे। जांच में सहायता के लिए विशेषज्ञों की एक टीम भेजी जा रही है।"
टर्बुलेंस नहीं, तकनीकी खराबी को किसने बताया वजह?
चार अगस्त को एअर इंडिया की फुकेट से दिल्ली आ रही उड़ान एआई-2379 में 17 लोगों के घायल होने का कारण खराब मौसम नहीं, बल्कि गंभीर तकनीकी खराबी थी। एयरलाइन पायलट एसोसिएशन ऑफ इंडिया के अध्यक्ष कैप्टन सैम थॉमस के अनुसार रात 10:30 बजे ओडिशा के झारसुगुड़ा के पास एयरबस ए320 विमान का ट्रिपल हाइड्रोलिक सिस्टम (येलो, ग्रीन और ब्लू) फेल हो गया था।
पायलट-इन-कमांड के निर्देश पर सह-पायलट ने विमान नीचे किया, जिससे विमान तेजी से 300 मीटर नीचे आ गया। इससे बने नेगेटिव जी-फोर्स के कारण यात्री और कॉकपिट में मौजूद एक पायलट उछलकर टकरा गए। हालांकि, पायलटों के इस तुरंत उठाए कदम से विमान में सवार 137 यात्रियों और 8 क्रू सदस्यों सहित 145 लोगों की जान बच गई। इसके बाद पायलट ने महज 7 मिनट में विमान दिल्ली पहुंचा दिया। कॉकपिट वॉयस रिकॉर्डर डाटा डिकोड होने से सटीक आंकड़े सामने आएंगे। एयरलाइन ने भी बाद में अपने बयान से टर्बुलेंस शब्द हटा लिया था।
पायलट के डोप टेस्ट पर मंत्रालय ने दिया था क्या बयान?
नागरिक उड्डयन मंत्रालय ने नौ अगस्त को बताया था कि एआई2379 उड़ान की घटना में कुछ यात्रियों और केबिन क्रू के सदस्यों के घायल होने की सूचना मिली थी। विमान में तीन शिशुओं समेत 137 यात्री और आठ क्रू सदस्य सवार थे। इस बीच, उड़ान के पायलट-इन-कमांड की पुष्टि के लिए दोबारा जांच की गई है। मंत्रालय ने बताया था कि शुरुआती साइकोएक्टिव पदार्थ जांच में ऐसा परिणाम आया था, जिसके लिए आगे विश्लेषण की जरूरत है। पुष्टि के लिए की गई जांच के नतीजे का इंतजार है।
तीन बार पॉजिटिव पाए जाने पर लाइसेंस रद्द
- कोई क्रू सदस्य पहली बार ड्रग टेस्ट में पॉजिटिव मिलता है तो नियमों के मुताबिक उसे रिहैबिलिटेशन सेंटर भेजा जाता है। नेगेटिव डोप टेस्ट रिपोर्ट से वह काम पर लौट सकता है।
- दूसरी बार में लाइसेंस तीन वर्ष के लिए निलंबित, जबकि तीसरी बार दोषी मिलने पर लाइसेंस रद्द किया जा सकता है।