एअर इंडिया के बोइंग 787-8 विमान के 2023 में उड़ान के दौरान एक इंजन बंद होने की घटना के बाद विमान के इंजन निर्माता जीई एयरोस्पेस ने प्रभावित इंजनों की जांच का दायरा बढ़ाया था। नागर विमानन महानिदेशालय (डीजीसीए) ने केंद्रीय सूचना आयोग (सीआईसी) के समक्ष एक आरटीआई मामले की सुनवाई के दौरान यह जानकारी दी है। यह मामला 4 अगस्त 2023 को एअर इंडिया के बोइंग 787-8 विमान वीटी-एएनडब्ल्यू में हुई घटना से जुड़ा है। विमान मुंबई से लंदन के हीथ्रो हवाई अड्डे के लिए उड़ान भर रहा था। इसमें चालक दल समेत कुल 267 लोग सवार थे।
चढ़ाई के दौरान इंजन में आई खराबी
अंतिम जांच रिपोर्ट के अनुसार, विमान के चढ़ाई करने के दौरान उसके इंजन नंबर-1 में अचानक खराबी आई और वह उड़ान के बीच बंद हो गया। इंजन में खराबी आने से पहले उसमें 'इंजन सर्ज' हुआ था। इसके बाद पायलटों ने विमान को वापस मुंबई लाने का फैसला किया। विमान ने मुंबई हवाई अड्डे पर एक ही इंजन के सहारे लैंडिंग की। विमान का वजन सामान्य लैंडिंग वजन से अधिक था, फिर भी इसे सुरक्षित उतार लिया गया। घटना में किसी यात्री या चालक दल के सदस्य के घायल होने की सूचना नहीं थी।
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गलत तरीके से लगाया गया था इंजन का हिस्सा
घटना की जांच में इंजन के एचपीसी (हाई प्रेशर कंप्रेसर) स्टेज-10 ब्लेड को इंजन खराब होने का मुख्य कारण बताया गया। जांच रिपोर्ट के मुताबिक, इस ब्लेड को अपनी जगह पर रोकने वाले लॉकिंग लग्स की फिटिंग सही तरीके से नहीं की गई थी। रिपोर्ट में कहा गया कि लॉकिंग लग्स को 2018 में गलत तरीके से लगाया गया था। इसके कारण बाद में एचपीसी स्टेज-10 का ब्लेड निकल गया। ब्लेड निकलने से इंजन में सर्ज हुआ और अंततः उड़ान के दौरान इंजन बंद हो गया।
जीई एयरोस्पेस ने बढ़ाया जांच का दायरा
डीजीसीए ने सीआईसी को बताया कि अंतिम जांच रिपोर्ट स्वीकार किए जाने के बाद उसे आवश्यक कार्रवाई के लिए डायरेक्टोरेट ऑफ एयरवर्थिनेस को भेजा गया। इसके बाद जीई एयरोस्पेस ने 21 दिसंबर 2023 को सर्विस बुलेटिन SB 72-0543 जारी किया। इस बुलेटिन के जरिए प्रभावित इंजनों की बोरोस्कोप जांच की आवश्यकताओं का दायरा बढ़ाया गया। बोरोस्कोप एक विशेष उपकरण है, जिसकी मदद से इंजन को पूरी तरह खोले बिना उसके अंदर के हिस्सों की जांच की जाती है। डीजीसीए के अनुसार, जीई ने इस जांच में कुछ अतिरिक्त इंजन सीरियल नंबर भी शामिल किए। नियामक ने सीआईसी को बताया कि सर्विस बुलेटिन के तहत जरूरी जांच निर्धारित समय सीमा के भीतर पूरी कर ली गई थी। डायरेक्टोरेट ऑफ एयरवर्थिनेस ने भी इस सुधारात्मक कार्रवाई को पूरा हुआ मान लिया था।
आरटीआई में मांगी गई थी कार्रवाई की जानकारी
यह मामला एक आरटीआई आवेदन के बाद केंद्रीय सूचना आयोग तक पहुंचा। आवेदक ने डीजीसीए से जानना चाहा था कि 2023 की घटना की अंतिम जांच रिपोर्ट के बाद एअर इंडिया के खिलाफ क्या कार्रवाई की गई और क्या एयरलाइन को अपने बोइंग 787-8 विमानों के बेड़े में सुरक्षा जांच कराने के निर्देश दिए गए। डीजीसीए के केंद्रीय जन सूचना अधिकारी ने शुरुआत में आवेदक को बताया था कि अंतिम जांच रिपोर्ट नियामक की वेबसाइट पर उपलब्ध है। हालांकि, रिपोर्ट के अलावा मांगी गई अन्य जानकारी देने से आरटीआई अधिनियम की धारा 8(1)(d) का हवाला देते हुए इनकार कर दिया गया था।
आवेदक ने सीआईसी के समक्ष दलील दी कि उसने जांच रिपोर्ट की सामग्री नहीं, बल्कि रिपोर्ट के आधार पर की गई कार्रवाई के बारे में जानकारी मांगी थी। उसने यह भी कहा कि यह मामला सार्वजनिक महत्व का है, खासकर 2025 में अहमदाबाद में एअर इंडिया की एआई-171 उड़ान से जुड़े हादसे के बाद।
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सीआईसी ने डीजीसीए के जवाब को माना पर्याप्त
केंद्रीय सूचना आयोग ने डीजीसीए के शुरुआती जवाब पर आपत्ति जताई। आयोग ने कहा कि आवेदक ने केवल जांच रिपोर्ट की कॉपी या उसकी सामग्री नहीं मांगी थी, बल्कि जांच के बाद उठाए गए कदमों की जानकारी मांगी थी। हालांकि, बाद में डीजीसीए ने आयोग के समक्ष लिखित जवाब दाखिल किया, जिसमें 2023 की घटना के बाद की गई कार्रवाई और जीई एयरोस्पेस के सर्विस बुलेटिन समेत उपलब्ध जानकारी दी गई। सीआईसी ने डीजीसीए की बाद की लिखित जानकारी को देखते हुए कहा कि नियामक ने अपने रिकॉर्ड में उपलब्ध कार्रवाई से संबंधित जानकारी उपलब्ध करा दी है। आयोग ने डीजीसीए को अपने लिखित जवाब की एक प्रति आरटीआई आवेदक को देने और इसके बाद अनुपालन रिपोर्ट जमा करने का निर्देश दिया। इस मामले में जीई एयरोस्पेस और एअर इंडिया से भी प्रतिक्रिया मांगी गई थी, लेकिन खबर लिखे जाने तक दोनों की ओर से कोई जवाब नहीं मिला था।