नेपाल में आई भीषण बाढ़ के बीच आंध्र प्रदेश के 13 लोगों की जानकारी की जांच चल रही है। करीब 145 तेलुगु तीर्थयात्री कोदारी पहुंच चुके हैं। मृतकों और लापता लोगों की सूचियों का रिकॉर्ड से मिलान किया जा रहा है। प्रशासन का जोर तलाश, सुरक्षित निकासी और प्रभावित लोगों की मदद पर है।
नेपाल में भीषण बाढ़ के बाद आंध्र प्रदेश के 13 लोगों के नाम लापता लोगों की आधिकारिक सूची से मिलाए जा रहे हैं। आंध्र प्रदेश भवन ने रविवार को बताया कि नेपाल पुलिस और भारतीय दूतावास से मिली सूची के आधार पर इन लोगों की जानकारी सत्यापित की जा रही है। दिल्ली स्थित आंध्र प्रदेश भवन संबंधित अधिकारियों के संपर्क में है। टीम लापता लोगों की पहचान, उनकी लोकेशन और उनकी सुरक्षित वापसी के लिए लगातार काम कर रही है।
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145 तेलुगु तीर्थयात्री कोडारी पहुंचे
इस बीच करीब 145 तेलुगु तीर्थयात्री कोडारी बॉर्डर इलाके में पहुंच गए हैं। ये लोग नेपाल में प्रवेश के लिए इमिग्रेशन की प्रक्रिया पूरी कर रहे हैं। इनमें से चार तीर्थयात्री आंध्र प्रदेश भवन के इमरजेंसी कंट्रोल रूम के लगातार संपर्क में हैं। उन्हें आगे की सुरक्षित यात्रा के लिए जरूरी मदद दी जा रही है।
मृतकों की सूची से भी मिलान
आंध्र प्रदेश भवन को नेपाल पुलिस से मृतकों की पहली सूची भी मिली है। इसमें क्षत-विक्षत और अज्ञात शवों के मामले शामिल हैं। सूची नेपाली भाषा में है और काफी लंबी है। आंध्र प्रदेश भवन की टीम इसकी जांच कर रही है कि इनमें आंध्र प्रदेश या तेलुगु तीर्थयात्रियों का कोई व्यक्ति शामिल तो नहीं है। नेपाल से मिली पहली लापता लोगों की सूची की भी आंध्र प्रदेश और तेलुगु तीर्थयात्रियों के रिकॉर्ड से जांच की जा रही है। सत्यापित जानकारी रविवार शाम तक साझा किए जाने की उम्मीद है।
सुरक्षित निकासी पर जोर
फिलहाल प्रशासन का मुख्य फोकस लापता आंध्र प्रदेश और तेलुगु तीर्थयात्रियों को तलाशना है। इसके साथ मृतकों की पहचान, कोदारी में फंसे लोगों की मदद और उनकी सुरक्षित निकासी का काम भी चल रहा है। जरूरत के मुताबिक चिकित्सा सहायता भी दी जा रही है। आंध्र प्रदेश भवन का इमरजेंसी कंट्रोल रूम चौबीसों घंटे सक्रिय है। नेपाल पुलिस, भारतीय दूतावास, विदेश मंत्रालय और स्थानीय अधिकारियों के साथ लगातार संपर्क बना हुआ है।
26 अगस्त को ग्लेशियर टूटने के बाद बिगड़े हालात
नेपाल और आसपास के तिब्बत क्षेत्र में 26 अगस्त से हालात गंभीर हैं। ग्लेशियर टूटने के बाद अचानक आई बाढ़ और भूस्खलन ने बड़े इलाके को प्रभावित किया। भोटेकोशी और त्रिशूली नदी तंत्र के आसपास स्थिति खास तौर पर गंभीर है। मुश्किल पहाड़ी इलाकों और खराब मौसम के बीच बचाव, राहत और पहचान का काम जारी है। हालात अभी भी तेजी से बदल रहे हैं।