भारतीय वायु सेना देश के कानून से ऊपर नहीं है। इसलिए उसके यहां तनाव व नशा संबंधी मामलों के इलाज के लिए तौर तरीके कानून के मुताबिक होने चाहिए। इसलिए वायु सेना अपने प्रोटोकोल पर पुनर्विचार करे। कोर्ट ने यह निर्देश 30 वर्षीय वायु सैनिक के मामले में दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया है। वायुसैनिक को पिछले काफी समय से आर्मी बेस अस्पताल के मनोचिकित्सकीय विभाग में बंधक बना कर रखा गया था क्योंकि वह शराब पीने का आदी था।
जस्टिस एस. मुरलीधर व जस्टिस विनोद गोयल ने कहा वायु सेना ऐसा न सोचे कि मेंटल हेल्थ एक्ट उस पर लागू नहीं होता। किसी भी शख्स को आप जितने समय तक चाहें इस तरह बंधक बनाकर नहीं रख सकते। वायु सेना अपने प्रोटोकोल पर पुनर्विचार करे और उसे कानून के मुताबिक बनाए। कोर्ट ने कहा वायु सेना कानून से ऊपर नहीं है। यह फौरन रोका जाना चाहिए। वायु सेना का सिस्टम कानून के मुताबिक होना चाहिए क्योंकि हमें नहीं पता कितने लोगों को इस तरह बंधक बना कर रखा गया है। वायु सेना ने जिस तरह व्यवहार किया है उसका बुरा असर सीधे तौर पर सेना पर पड़ेगा।
कोर्ट ने वायु सेना को निर्देश दिया कि कारपोरल क्रिया योगेश भानखारिया को उसके पिता के साथ घर जाने दिया जाए। उसकी बीमारी या फिटनेस पर वायु सेना कोई निर्णय कोर्ट की पूर्व अनुमति के बिना नहीं लेगी। कोर्ट ने यह निर्देश कारपोरल के पिता की प्रत्यक्षीकरण याचिका पर सुनवाई करते हुए दिया। याचिका पर अगली सुनवाई 17 अगस्त को होगी।