ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (एआईेएमआईएम) प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने नागरिकता संशोधन विधेयक को लेकर एक बार फिर केंद्र सरकार पर निशाना साधा है। ओवैसी ने कहा कि भारतीय संविधान में लिखा गया है कि भारत एक धर्मनिरपेक्ष राष्ट्र है।
असदुद्दीन ओवैसी ने कहा कि यदि मीडिया रिपोर्ट सही हैं कि पूर्वोत्तर राज्यों को प्रस्तावित नागरिकता (संशोधन) विधेयक (सीएबी) कानून में छूट दी जाएगी तो यह अपने आप में अनुच्छेद 14 का बहुत बड़ा उल्लंघन है जो कि एक मौलिक अधिकार है। आपके पास देश में नागरिकता पर दो कानून नहीं हो सकते।
ओवैसी ने कहा कि यह कानून अनुच्छेद 14 और 21 का भी उल्लंघन करता है क्योंकि आप धर्म के आधार पर नागरिकता दे रहे हैं जो दोनों अनुच्छेद का उल्लंघन करता है। अगर हम इस कानून को पारित करते हैं तो यह संविधान के निर्माता भीमराव आंबेडकर और महात्मा गांधी के प्रति अनादर होगा।
उन्होंने आग कहा कि नागरिकता कानून लाना हमारे स्वतंत्रता सेनानियों का अपमान होगा क्योंकि आप दो राष्ट्र सिद्धांत को पुनर्जीवित करेंगे। एक भारतीय मुसलमान के रूप में मैंने जिन्ना के सिद्धांत को खारिज कर दिया है, अब आप एक कानून बना रहे हैं, जिसमें दुर्भाग्य से आप दो राष्ट्र सिद्धांत की याद दिला रहे होंगे।
ओवैसी ने कहा, ऐसे कानून से भारत का अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मजाक बनेगा। भाजपा मुसलमानों को यह संदेश देना चाहती है कि वे इस देश के दूसरे दर्जे के नागरिक हैं। भाजपा सांसद संघ की विचारधारा को दिखा रहे हैं। जब तक इस देश में संविधान है, तब तक देश को धर्म शासित देश नहीं बनाया जा सकता।