कोविड-19 का टीका विकसित किया जा चुका है और भारत में भी टीकाकरण प्रक्रिया शुरू करने के लिए सरकार की अनुमति का इंतजार है। अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) के चिकित्सक डा. आनंद कृष्णन का कहना है कि कोविड-19 के दूसरे स्ट्रेन को लेकर घबराने की जरूरत नहीं है। उनका कहना है कि इस तरह के नए स्ट्रेन लंबे समय तक आते रहेंगे और यह एक अंतहीन सिलसिला हो सकता है। यहां जरूरत केवल सावधानी और सतर्कता को अमल में लाने की है।
एम्स के चिकित्सक ने कहा कि भारत में कोविड-19 के संक्रमण की दर कम हो गई है, लेकिन लोगों के भीतर इसको लेकर लापरवाही बढ़ गई है। लोगों का यह व्यवहार असली चुनौती है। नियामक एजेंसियों को लोगों के इस व्यवहार पर ध्यान देना चाहिए।
किसी भी टीके से एलर्जी की समस्या आम है
डा. कृष्णन ने अमर उजाला से कहा कि अमेरिका में फाइजर की वैक्सीन लगने के बाद कुछ लोगों को गंभीर एलर्जी की शिकायतें आई। ऐसा कुछ और जगहों पर भी हुआ। अमेरिका की एफडीए ने भी इस बारे में एडवाइजरी जारी की है, लेकिन इससे टीकाकरण अभियान पर कोई खास असर नहीं पड़ने वाला है।
एम्स के चिकित्सक का कहना है कि इससे डरने की जरूरत नहीं है। कोई भी टीका हो, उससे एलर्जी की संभावना रहती है। डा. कृष्णन ने कहा कि लोगों के भीतर टीकाकरण से डर को दूर करने के लिए ही सबसे पहले स्वास्थ्य विभाग के शीर्ष चिकित्सक, राजनीतिज्ञ, वैज्ञानिक टीका लगवाते हैं।
कितना कारगर होगा कोविड-19 का टीका
डा. आनंद कृष्णन का कहना है कि देश में सीरम इंस्टीट्यूट के टीके का बड़े पैमाने पर आर्डर दिया गया है। टीकाकरण से हम संक्रमण को 100 फीसदी नहीं रोक सकते। लेकिन टीकाकरण अभियान से संक्रमण की दर को 70 फीसदी तक रोका जा सकता है। इस तरह से टीकाकरण, सावधानी और इलाज प्रक्रिया के तहत कोविड-19 से लोगों को राहत दी जा सकती है। यह लोगों को फुलप्रूफ प्रोटेक्शन नहीं देने जा रहा है, लेकिन संक्रमण की रोकथाम में सहायक होगा। डा. कृष्णन का कहना है कि अब हमें लंबे समय तक कोविड-19 के वायरस के साथ रहना पड़ेगा। यहां सावधानी ही सबसे उत्तम उपाय है।