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Tamil Nadu: एआईएडीएमके ने ईपीएस की पदोन्नति के लिए कमर कसी, विरोधी पनीरसेल्वम बोले- ये 'जेबकतरों' जैसा रवैया

Sat, 18 Mar 2023 02:17 PM IST
कुमार विवेक न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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पनीरसेल्वम और पलानीस्वामी (फाइल फोटो)। - फोटो : ANI
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अन्नाद्रमुक के अंतरिम प्रमुख एडप्पादी के पलानीस्वामी (ईपीएस) ने शनिवार को पार्टी के शक्तिशाली महासचिव पद के लिए नामांकन दाखिल किया। जिससे उनकी पार्टी प्रमुख के रूप में अंतिम पदोन्नति की उम्मीद जग गई है। वहीं चुनाव कराने के मसले पर पलानीस्वामी के प्रतिद्वंद्वी नेता ओ पन्नीरसेल्वन ने कहा कि वे ईपीएस खेमे के इस 'जेबकतरे' जैसे रवैये की आलोचना करते करते हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि पार्टी की उचित प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया है।

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पिछले महीने सुप्रीम कोर्ट ने ईपीएस के अंतरिम पार्टी प्रमुख बने रहने को दी थी मंजूरी
पलानीस्वामी जिन्हें ईपीएस के नाम से संबोधित किया जाता है, ने उच्चतम न्यायालय की ओर से अन्नाद्रमुक के अंतरिम प्रमुख के रूप में उनके पद पर बने रहने को हरी झंडी देने के एक महीने बाद पार्टी मुख्यालय में अपना नामांकन दाखिल किया है। कोर्ट के इस फैसले से ईपीएस के प्रतिद्वंदी नेता पनीरसेल्वम (ओपीएस) को झटका लगा था। ओपीएस खेमे ने वर्तमान में जारी चुनाव प्रक्रिया की निंदा की है। पार्टी के वरिष्ठ नेता पनरुति एस रामचंद्रन ने कहा कि वे इस मुद्दे पर अदालत का रुख करेंगे। उन्होंने कहा कि अगले कदम के तहत अप्रैल महीने की शुरुआत में तिरुचिरापल्ली में एक बड़ा सम्मेलन आयोजित किया जाएगा।

ओपीएस का आरोप- चुनाव प्रक्रिया पार्टी कानूनों के अनुरूप नहीं
पलानीस्वामी के नामांकन दाखिल करने के कुछ ही घंटों के भीतर पनीरसेल्वम ने संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए आरोप लगाया कि चुनाव प्रक्रिया पार्टी कानूनों के अनुरूप नहीं है। संगठनात्मक चुनाव पांच साल में एक बार आयोजित किए जाते हैं और सर्वोच्च पद पर बैठने वाले व्यक्ति को प्राथमिक सदस्यों की ओर से चुना जाता है। केवल निर्वाचित महासचिव ही बाद में संगठनात्मक चुनाव करा सकता है और पदाधिकारियों की नियुक्ति कर सकता है।
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23 मार्च को होने हैं एआईएडीएम के संगठनात्मक चुनाव 
पलानीस्वामी के नेतृत्व वाली अन्नाद्रमुक ने इससे पहले महासचिव पद के लिए चुनाव कार्यक्रम की घोषणा करते हुए कहा था कि कि चुनाव 23 मार्च को होगा। पलानीस्वामी का चुनाव सर्वसम्मति से होने की उम्मीद है क्योंकि पार्टी उनके पीछे एकजुट हो रही है। 11 जुलाई 2022 की आम परिषद (General Council) में इस बात के संकेत दे दिए गए थे। जहां ओपीएस और उनके कुछ सहयोगियों को निष्कासित कर दिया गया था। ओपीएस खेमे ने आम परिषद के प्रस्तावों को मद्रास उच्च न्यायालय में चुनौती दी है।

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