एआईएडीएमके महासचिव एडप्पादी के पलानीस्वामी।
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अन्नाद्रमुक (AIADMK) महासचिव एडप्पादी के पलानीस्वामी ने बुधवार को राष्ट्रीय राजधानी में कहा कि राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) देशभर में 330 लोकसभा क्षेत्रों में विजयी होगा। पलानीस्वामी ने पत्रकारों से बात करते हुए यह टिप्पणी की। जब उनसे पूछा गया कि क्या मूल्य वृद्धि जैसे कारकों को देखते हुए 50 प्रतिशत से अधिक वोट शेयर हासिल करना संभव है, तो पलानीस्वामी ने कहा कि देश ने कोरोनावायरस महामारी जैसे पहलुओं के बावजूद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में विकास देखा है। साथ ही उन्होंने कहा कि दुनिया की कई अर्थव्यवस्थाओं को चुनौतियों का सामना करना पड़ा, जबकि भारत में ऐसा नहीं था क्योंकि एनडीए द्वारा चुनौतियों से अच्छी तरह निपटा गया। दुनिया भर में मोदी के नेतृत्व में देश की प्रतिष्ठा बढ़ी है।
उन्होंने कहा कि एनडीए के नेतृत्व वाले केंद्र ने युवाओं की जरूरतों को समझते हुए काम किया और निश्चित रूप से गठबंधन 2024 के लोकसभा चुनावों में 330 लोकसभा सीटें जीतेगा। बता दें कि लोकसभा में कुल 543 सीटें हैं। यह पूछे जाने पर कि क्या भाजपा के सहयोगी आम चुनाव तक गठबंधन में कायम रहेंगे, उन्होंने कहा, इस सवाल की कोई गुंजाइश नहीं है। उन्होंने कहा कि छोटी या बड़ी पार्टी के बावजूद, सभी संगठनों को एनडीए में उचित सम्मान दिया जाता है, जिसकी झलक 18 जुलाई की बैठक में देखने के मिला और गठबंधन सर्वसम्मत विचारों के आधार पर काम कर रहा है।
तमिलनाडु के संबंध में उन्होंने संकेत दिया कि उनकी पार्टी एनडीए की प्रमुख ताकत है। उन्होंने कहा, अन्नाद्रमुक प्रमुख विपक्षी दल है और उसके 1.72 करोड़ सदस्य हैं। उन्होंने कहा कि पार्टी के संस्थापक एमजी रामचंद्रन के समय से और बाद में पार्टी की दिवंगत मुखिया जे जयललिता के कार्यकाल के दौरान अन्नाद्रमुक ने समान विचारधारा वाले दलों के साथ गठबंधन किया था और चुनाव जीते थे।
विपक्षी गठबंधन पर साधा निशाना
इस बीच, विपक्षी गठबंधन पर निशाना साधते हुए एआईएडीएमके महासचिव पलानीस्वामी ने कहा कि हमारे गठबंधन में सभी दल स्वतंत्रता के साथ काम करते हैं, जबकि डीएमके गठबंधन में सभी गुलाम हैं। चाहे विधानसभा चुनाव हो या संसद चुनाव, एआईएडीएमके तमिलनाडु में गठबंधन का नेतृत्व करेगी...। उन्होंने कहा, गठबंधन परिस्थितियों से आकार लेते हैं लेकिन विचारधारा स्थायी होती है। प्रत्येक पार्टी की एक अलग विचारधारा होती है। इसी तरह डीएमके 1999 में भाजपा के साथ गठबंधन में थी। जब भी उन्हें (डीएमके) सत्ता की चाहत होती है, वे आमतौर पर गिरगिट की तरह अपना रंग बदल लेते हैं।