मोडासा के रमेश शाह बताते हैं कि बम धमाकों में इन दहशतगर्दों ने उनका डॉक्टर बेटा प्रेरक शाह, उसकी पत्नी किंजल व उसकी कोख में पल रहे उनके वारिस को छीन लिया था।
बम धमाकों में अपनों को खो चुके लोग अपने मन के 13 साल पुराने जख्मों पर कोर्ट के फैसले के मरहम से राहत तो महसूस कर रहे हैं, लेकिन वह सभी 49 दोषियों को फांसी की सजा चाहते हैं। पीड़ितों ने अदालत के फैसले का स्वागत किया।
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कॉलेज छात्र यश व्यास बताते हैं कि वह 9 साल के थे, जब सिविल अस्पताल के ट्रॉमा वार्ड में जोरदार धमाका हुआ। हादसे में उनके पिता और 11 साल के भाई की मौत हो गई। यश का आधा शरीर बुरी तरह जल गया था। चार महीने तक आईसीयू में रहे। डॉक्टरों ने बड़ी मुश्किल से बचा पाया लेकिन सुनने की क्षमता कम हो गई। उस दिन से यश व उनकी मां कोर्ट के फैसले का इंतजार कर रहे हैं। अब 22 साल के हो चुके यश कहते हैं आज फैसला आने की खुशी तो है पर अगर सभी दोषियों को फांसी की सजा होती तो यह सुकून कई गुणा अधिक होता। इन लोगों के साथ किसी तरह की हमदर्दी नहीं होनी चाहिए।
बेटा, बहू व उसकी कोख में पल रहा वारिस छीना, इनसे हमदर्दी कैसी
मोडासा के रमेश शाह बताते हैं कि बम धमाकों में इन दहशतगर्दों ने उनका डॉक्टर बेटा प्रेरक शाह, उसकी पत्नी किंजल व उसकी कोख में पल रहे उनके वारिस को छीन लिया था। इन लोगों के साथ किसी तरह की हमदर्दी नहीं होनी चाहिए। 38 को मौत की सजा सुनाई गई, हम इसका स्वागत करते हैं लेकिन शेष 11 दोषियों को भी मृत्युदंड मिलना चाहिए था। शाह दंपती धमाके के दिन सिविल अस्पताल में चेकअप कराने आया था जब वहां बम फटा।
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हाई कोर्ट जाएंगे दोषी
दोषियों के वकीलों ने बताया कि वे विशेष अदालत के फैसले के खिलाफ गुजरात उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाएंगे। वकीलों के मुताबिक, विशेष अदालत को फैसला देते समय केवल परिस्थितिजन्य साक्ष्य और कुछ दोषियों के बयानों पर भरोसा नहीं करना चाहिए था।