कांग्रेस पार्टी ने अमेरिका के साथ मोदी सरकार द्वारा लॉजिस्टिक एक्सचेंज मेमोरेंडम ऑफ एग्रीमेंट(एलईएमए) पर सहमति को लेकर आपत्ति जाहिर की है। कांग्रेस प्रवक्ता आनंद शर्मा ने कहा कि भारतीय सैन्य नीति को अमेरिका के साथ बंधकर प्रशांत महासागर, एशिया और दक्षिण चीन सागर में उलझाना किसी तरह से भी उचित नहीं है। इसका हमारी आपरेशनल तैयारी और सामरिक रणनीति पर प्रतिकूल असर पड़ सकता है।
पूर्व रक्षा मंत्री एके एंटनी ने भी भारत सरकार के अमेरिका के साथ इस समझौते के लिए राजी होने की आलोचना की। एंटनी ने इसे भारत की विदेश नीति और रणनीतिक स्वायत्तता की आजादी के विरुद्ध बताया। उन्होंने इस निर्णय को विनाशकारी बताते हुए केन्द्र सरकार से इस पर अपना निर्णय बदलने की अपील की है।
कांग्रेस प्रवक्ता आनंद शर्मा ने इस समझौते के बाबत इसके तहत होने वाली दो अन्य सहमतियों के तकनीकी पक्ष पर प्रकाश डाला। उन्होंने कॉमन इंटरआपरेबिलिटी एंड सेक्योरिटी मेमोरेंडम ऑफ एग्रीमेंट(सीआईएसएमओए) और बेसिक एक्सचेंज एंड कोऑपरेशन एग्रीमेंट(बीईसीए) का जिक्र करते हुए कहा कि इस पर राजी होने के बाद भारत की सुरक्षा की नीति, स्वतंत्रता और रणनीतिक तैयारी को लेकर समस्या बढ़ सकती है।
शर्मा ने सरकार से सवाल भी पूछा कि आखिर इस तरह के समझौते की जरूरत ही क्या है? उन्होंने कहा कि अमेरिका भारत के साथ 2004 से ही समझौते को लेकर दबाव बना रहा था लेकिन राष्ट्रहितों को वरीयता देते हुए पिछली सरकार ने इससे परहेज किया था। शर्मा ने कहा कि इस समझौता का चीन, जापान, रूस, फ्रांस समेत अन्य सहयोगी देशों के साथ संबंधों पर विपरीत प्रभाव पड़ सकता है।