अग्निपथ योजना के खिलाफ उपजा युवाओं का आक्रोश भाजपा को चुनावी राज्यों में भारी पड़ सकता है। हिमाचल प्रदेश में सेना को रोजगार के सबसे बड़े स्रोत के रूप में देखा जाता है। देश सेवा के लिए युवाओं को सेना में भेजने के मामले में यह राज्य 12वें नंबर पर आता है।
हिमाचल से लगभग 47 हजार लोग इस समय सेना में कार्यरत हैं। यहां लगभग हर दूसरे परिवार का कोई न कोई व्यक्ति सेना की नौकरी कर रहा है। लेकिन, जब से केंद्र सरकार ने सेना में भर्ती के लिए अग्निपथ योजना की घोषणा की है, युवा लगातार विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। यदि युवाओं का आक्रोश बढ़ा, जो कि भाजपा का सबसे बड़ा वोटर वर्ग है, तो राज्य में सत्ता में वापसी का उसका प्लान अधूरा ही रह जाएगा। राज्य में इसी साल के अंत में गुजरात के साथ विधानसभा चुनाव होने हैं।
पीएम के रोड शो को नहीं मिली कामयाबी
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बृहस्पतिवार को हिमाचल प्रदेश के धर्मशाला में एक रोड शो का आयोजन किया था। इस रोड शो को BJP के चुनावी अभियान की शुरुआत के रूप में देखा जा रहा था, लेकिन इस रोड को पार्टी की उम्मीदों के मुताबिक सफलता नहीं मिल पाई। पीएम के रोड शो पर अग्निपथ योजना का विरोध भारी पड़ गया। इससे पार्टी को अपनी नीति पर पुनर्विचार करने की जरूरत महसूस हो रही है।
हिमाचल में जीत भाजपा के लिए अहम होगी
प्रधानमंत्री मोदी राज्य के दो दिवसीय दौरे पर हैं। प्रधानमंत्री की 15 दिनों के बीच यह दूसरी हिमाचल प्रदेश यात्रा है। इसके पहले पार्टी अध्यक्ष जेपी नड्डा भी प्रदेश में रोड शो आयोजित कर चुके हैं। राज्य की अहमियत भाजपा के लिए इसलिए भी ज्यादा है क्योंकि पार्टी यहां दुबारा जीत हासिल कर एक इतिहास बनाने की योजना पर काम कर रही है। लेकिन युवाओं का बढ़ता विरोध उसके लिए सिरदर्द साबित हो रहा है।
हिमाचल प्रदेश में कितने सैनिक परिवार
देश की आबादी में लगभग 0.57 फीसदी हिस्सेदारी रखने वाले हिमाचल प्रदेश की सेना में 4.0 फीसदी हिस्सेदारी है। केंद्र सरकार के लगभग वर्ष भर पहले दी गई जानकारी के अनुसार हिमाचल प्रदेश के सैनिकों की कुल संख्या 46,960 थी। विभिन्न राज्यों द्वारा सैनिक सेवाओं में जाने वाले राज्यों के क्रम में हिमाचल प्रदेश 12वें नंबर पर आता है।
सेना में यूपी की हिस्सेदारी सर्वाधिक
लगभग साल भर पहले एक सवाल के जवाब में केंद्र सरकार ने संसद में बताया था कि सेना में उत्तर प्रदेश की हिस्सेदारी सबसे ज्यादा 1,67,557 है। देश की आबादी में लगभग 16.5 फीसदी हिस्सेदारी रखने वाला यह राज्य सैनिकों की संख्या के मामले में 14.5 फीसदी हिस्सेदारी रखता था। सैनिकों में पंजाब की हिस्सेदारी 89,088 (लगभग 7.7 फीसदी) थी, जबकि देश की जनसंख्या में उसकी हिस्सेदारी केवल 2.3 फीसदी ही है।
महाराष्ट्र सैनिकों की संख्या (87,835) के मामले में तीसरे नंबर पर और राजस्थान (79,481) चौथे नंबर पर आता था। हरियाणा इस मामले में 65987 सैनिकों के साथ छठें नंबर पर (5.7 फीसदी), जम्मू-कश्मीर-लद्दाख क्षेत्र 47,457 सैनिकों के साथ 11वें नंबर पर और हिमाचल प्रदेश 46,960 सैनिकों के साथ 12वें नंबर पर था।
युवाओं की नाराजगी भांपने में हुई चूक- बीजेपी
बीजेपी के एक वरिष्ठ नेता के अनुसार अग्निपथ योजना को सेना की मजबूती और आधुनिकीकरण के लिए लाया गया है। पार्टी को इस पर युवाओं के हल्के विरोध का अनुमान था, लेकिन युवाओं की नाराजगी इस स्तर तक बढ़ सकती है, इसका अनुमान नहीं था। नेता के मुताबिक योजना को जमीन पर उतारने से पहले युवाओं को भरोसे में न लेना पार्टी के लिए परेशानी का कारण बन गया है। हालांकि, पार्टी का अनुमान है कि योजना में कुछ बदलाव करके युवाओं की नाराजगी को दूर कर लिया जाएगा।
अर्द्ध सैनिक बलों के लिए भी आएगी ऐसी योजना
पार्टी नेता मान रहे हैं कि योजना के बारे में जानकारी देते हुए चूक हुई है। युवाओं को योजना पेश करते हुए भरोसे में भी नहीं लिया गया जो उनके संदेह को बढ़ा रहा है। युवाओं को आशंका है कि यह नौकरियों को कम करने की रणनीति है, उनकी आशंका यह भी है कि देर-सबेर इसी तरह की योजना अर्धसैनिक बलों और राज्यों के पुलिस बलों में भी लाई जा सकती है जिससे उनका भविष्य खतरे में पड़ सकता है। युवाओं की इन आशंकाओं से निबटना पार्टी के लिए बड़ी चुनौती बन गई है।