भारत ने नई पीढ़ी की बैलेस्टिक मिसाइल अग्नि प्राइम’ का गुरुवार को ओडिशा तट के डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम द्वीप से सफलतापूर्वक परीक्षण किया। यह परीक्षण रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (डीआरडीओ) द्वारा किया गया। उड़ान परीक्षण के दौरान यह मिसाइल सभी मानकों पर खरी उतरी।
अधिकारियों ने बताया कि तीन सफल परीक्षण के बाद अग्नि प्राइम को सशस्त्र बलों में शामिल किए जाने से पहले यह इसका पहला रात्रि परीक्षण था। मिसाइल के उड़ान डेटा को कैद करने के लिए विभिन्न जगहों पर उपकरण जैसे राडार, टेलीमेट्री और इलेक्ट्रो-ऑप्टिकल ट्रैकिंग सिस्टम सहित दो जहाज तैनात किए गए थे।
अग्नि प्राइम के सफल परीक्षण की जानकारी डीआरडीओ ने ट्वीट पर दी। उन्होंने ट्वीट किया, 'नई पीढ़ी की बैलेस्टिक मिसाइल अग्नि प्राइम का पहला प्री इंडक्शन नाइट लॉन्च सात जून को ओडिशा के तट से सफलतापूर्वक किया गया।'
डीआरडीओ और रणनीतिक बल कमान के शीर्ष अधिकारी भी अग्नि प्राइम के सफल परीक्षण के दौरान वहां मौजूद थे, जिन्होंने मिसाइल को सशस्त्र बलों में शामिल करने का मार्ग प्रशस्त किया।मिसाइल के सफल परीक्षण के बाद रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने डीआरडीओ और सशस्त्र बलों को बधाई दी।
चीन से विवाद के बीच परीक्षण
जानकारी के मुताबिक, रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) की सामरिक बल कमान ने 1,000 से 2,000 किलोमीटर तक की मारक क्षमता वाली मिसाइल का पहला ‘प्री-इंडक्शन’ यानी सशस्त्र बलों में शामिल किए जाने से पहले रात्रिकालीन परीक्षण किया। चीन के साथ जारी सीमा विवाद के बीच मिसाइल का यह परीक्षण किया गया है।
यह है इस मिसाइल की खासियत
अग्नि-5 की जद में चीन का सुदूर उत्तर क्षेत्र और यूरोप के कुछ क्षेत्र सहित पूरा एशिया आ जाएगा। अग्नि-1 से अग्नि-4 तक, मिसाइलों की रेंज 700 किमी से लेकर 3,500 किमी तक है और उन्हें पहले ही तैनात किया जा चुका है।
- 11,000 किलोग्राम है इस मिसाइल का वजन। एक साथ कई लक्ष्य भेदने में सक्षम
- 34.5 फुट लंबी मिसाइल पर कई वारहेड लगाए जा सकते हैं
- 1000-2000 किमी की दूरी तक किसी भी लक्ष्य को मार गिराने की क्षमता
जल्द सेना में होगी शामिल
अधिकारियों के अनुसार, डीआरडीओ और रणनीतिक बल कमान के शीर्ष अधिकारी अग्नि प्राइम के सफल परीक्षण के गवाह बने, जिसने इन मिसाइल को सशस्त्र बलों में शामिल करने का मार्ग प्रशस्त किया। इसके सफल परीक्षण के साथ इसके जल्द सेना में शामिल होने की उम्मीद है।