नेशनल एलिजिबिलिटी कम एंट्रेंस टेस्ट (नीट) 2017-18 में स्टूडेंटों की उम्र सीमा तय किए जाने का विवाद अब गहरा गया है। गत शनिवार को ही कुछ स्टूडेंटों ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की है। इस पर जल्द सुनवाई संभव है। स्टूडेंटों की मांग है कि 25 साल की अधिकतम उम्र सीमा का बंधन हटाया जाए। ऐसा नहीं हुआ तो तमाम स्टूडेंट नीट का पेपर नहीं दे सकेंगे।
नीट का आयोजन सात मई को होगा। इससे पहले ही मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया (एमसीआई) ने प्रवेश परीक्षा और एडमिशन की शैक्षिक योग्यता तय कर दी। पहले कहा कि अब तीन बार ही पेपर दिए जा सकेंगे। इसका जबरदस्त विरोध हुआ तो फैसला वापस ले लिया गया। एमसीआई ने नीट में शामिल होने वाले स्टूडेंटों की न्यूनतम उम्र सीमा 17 साल और अधिकतम 25 साल रखा है। इसका भी स्टूडेंट विरोध कर रहे हैं।
स्टूडेंटों का कहना है कि जुलाई 2016 से एमबीबीएस, बीडीएस में एडमिशन की तैयारी कर रहे हैं। कोचिंग पर लाखों रुपये खर्च हो गए। अब उम्र सीमा की नई नियमावली से पेपर देने को नहीं मिलेगा। स्टूडेंटों ने इस संबंध में केंद्रीय चिकित्सा शिक्षा एवं स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा को पत्र भी लिखे हैं। सबने कहा है कि उम्र की सीमा में एक साल की छूट दी जानी चाहिए।
पुलिस ने कसा शिकंजा
नीट में तीन बार पेपर देने की अनिवार्यता का विरोध करने और रेलवे ट्रैक बाधित करने वाले 2000 अज्ञात छात्रों पर पुलिस का शिकंजा कस गया है। पुलिस ने काकादेव में नाकेबंदी कर दी है। स्टूडेंटों के साथ ही कुछ कोचिंग संचालकों पर भी निगाह है। पुलिस का मानना है कि स्टूडेंटों को उकसाकर रेलवे ट्रैक, जीटी रोड तक भेजा गया। इस मामले में आरपीएफ कन्नौज ने मुकदमा भी दर्ज किया है। बताते चलें कि शनिवार की देररात कई थानों की पुलिस ने काकादेव में डेरा जमाया। अज्ञात छात्रों के पहचान की कोशिश भी की गई थी