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कार्रवाई: नरसिंहानंद के खिलाफ अवमानना कार्यवाही होगी शुरू, अटॉर्नी जनरल ने दी अनुमति

Fri, 21 Jan 2022 05:30 PM IST
Amit Mandal न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

महिलाओं के खिलाफ आपत्तिनजक भाषण को लेकर उत्तराखंड पुलिस नरसिंहानंद को गिरफ्तार किया था और वह अभी हिरासत में हैं। 
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यति नरसिंहानंद - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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धर्मसंसद में भड़काऊ भाषण देने वाले जूना अखाड़े के महामंडलेशर यति नरसिंहानंद एक और मुश्किल में घिर गए हैं। भारत के अटॉर्नी जनरल केके वेणुगोपाल ने संविधान और सुप्रीम कोर्ट के खिलाफ कथित अपमानजनक टिप्पणी को लेकर 'धर्म संसद' के नेता यति नरसिंहानंद के खिलाफ अवमानना कार्यवाही शुरू करने की अनुमति दे दी है। 

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सुप्रीम कोर्ट की अवमानना का मामला 
अटॉर्नी जनरल ने कार्यकर्ता शची नेल्ली के उस पत्र के जवाब में सहमति दी है जिसमें 14 जनवरी को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्विटर पर वायरल हुए एक साक्षात्कार में यति नरसिंहानंद के बयानों के लिए उनके खिलाफ अवमानना की कार्यवाही शुरू करने की मांग की गई थी।

अटॉर्नी जनरल के अनुसार यति नरसिंहानंद द्वारा दिए गए बयान निश्चित रूप से भारत के सर्वोच्च न्यायालय की अवमानना है। हरिद्वार धर्म संसद में कथित तौर पर मुस्लिम विरोधी भड़काऊ भाषण दिया था जिसके बाद उत्तराखंड पुलिस नरसिंहानंद को गिरफ्तार किया था और वर्तमान में वह हिरासत में हैं। 
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15 जनवरी को हुए गिरफ्तार 
समुदाय विशेष महिलाओं के खिलाफ अमर्यादित भाषा का इस्तेमाल करने के आरोपी यति नरसिंहानंद को पुलिस ने 15 जनवरी शनिवार रात को गिफ्तार कर लिया था। यति सर्वानंद घाट पर वसीम रिजवी की गिरफ्तारी के विरोध में अनशन पर बैठे थे। 

शहर कोतवाली क्षेत्र के निरंजनी अखाड़ा मायापुर रोड की रहने वाली लॉ छात्रा की शिकायत पर यति के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया था। आरोप है कि गाजियाबाद के डासना स्थित देवी मंदिर के महंत यति ने विशेष समुदाय की महिलाओं के खिलाफ अभद्र टिप्पणी की थी। इसके बाद शनिवार की रात पुलिस ने सर्वानंद घाट से यति नरसिंहानंद को गिरफ्तार कर लिया। इस मामले में उनकी जमानत याचिका भी खारिज हो चुकी है।

सुप्रीम कोर्ट पर इतिहास में सबसे शातिराना हमला : शचि नेल्ली
मुस्लिम समुदाय के खिलाफ हिंसा और नरसंहार के भड़काने वाले मामले में नरसिंहानंद के खिलाफ सामाजिक कार्यकर्ता शचि नेल्ली ने लिखा, यह सुप्रीम कोर्ट पर भारत के इतिहास में सबसे खुला और शातिराना हमला है। अगर ऐसी टिप्पणियों पर कोई कार्रवाई नहीं होती है तो सुप्रीम कोर्ट को अपमानित करने की उसकी कोशिश सफल हो जाएगी। अटॉर्नी जनरल ने कहा कि वे निर्धारित कानून के तहत उस पर आपराधिक अवमानना की कार्रवाई की सहमति देते हैं। यह निश्चित तौर पर यह टिप्पणियां सुप्रीम कोर्ट की अवमानना की श्रेणी में आती हैं।

संविधान की पहली संरक्षणकर्ता का अपमान देखना भयानक है
14 जनवरी को वायरल हुए इस पत्र में नेल्ली ने लिखा था कि सुप्रीम कोर्ट देश के संविधान की पहली संरक्षक व परिभाषा करने वाली संस्था है। न्याय प्रदान करने की उसकी शक्ति को कम दर्शाना व उसका अपमान होते देखना भयानक और विस्मयजनक है।

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