कफील जेल के अनुभवों पर विस्तार से कहते हैं कि 150 से अधिक कैदियों के लिए एक टॉयलेट होता था जो कि काफी गंदा होता था। वह बताते हैं कि 800 से अधिक कैदियों की क्षमता वाली जेल में दो हजार से अधिक कैदी थे। जेल से बाहर आने पर लोगों की क्या प्रतिक्रिया थी? इस सवाल पर उन्होंने कहा कि जेल से बाहर आने के बाद उन्हें यकीन नहीं हुआ कि इतने सारे लोग उन्हें लेने आएंगे।
वह कहते हैं, "इसमें से कुछ वे लोग भी थे जो अपने बच्चों को खो चुके थे। सरकार ने मुझ पर जो आरोप लगाए हैं उस पर हाईकोर्ट के माननीय न्यायाधीश यशवंत वर्मा ने खुद बोला है कि सरकार सबूत नहीं पेश कर पाई इसलिए मुझे जमानत दी जा रही है।" बीआरडी मेडिकल कॉलेज की घटना के बाद ऐसी खबरें आई थीं कि कफील ने खुद से ऑक्सीजन सिलेंडर मुहैया कराए थे।
इस पर कफील कहते हैं, "मुझ पर आपराधिक धाराएं लगाई गई हैं और मैंने उन्हें सबूत दिए की कैसे-कैसे ऑक्सीजन सिलेंडर मुहैया कराए थे।" उन्होंने आगे कहा कि सरकार का कहना था कि ऑक्सीजन खत्म ही नहीं हुई थी, अगर ऐसे हुआ था तो उन्होंने ऑक्सीजन मुहैया कराने वाली कंपनी के मालिक को जेल में क्यों डाला था?
प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाते हुए कफील ने कहा कि ऑक्सीजन सप्लाई करने वाली कंपनी का बकाया नहीं चुकाया जा रहा था जिसके बाद प्रशासन के पास उसके बिल घूमते रहे और कोई इस पर चिंतित नहीं था कि बिल जमा करना है। आगे उनकी क्या तैयारी है? वह कहते हैं कि वह सात महीने तक इंतजार करते रहे और गिरफ्तारी तक उन्होंने किसी के खिलाफ कुछ नहीं बोला, लेकिन जब ऑक्सीजन मुहैया कराने वाले मालिक की जमानत हो गई तो उन्हें लगा कि अब बोलना पड़ेगा।
वह कहते हैं, "इसके बाद मेरे परिवार ने फैसला लिया कि अब हमें सच बताना होगा। यह लंबी लड़ाई है और मैं इसके लिए तैयार हूं।" कफील बड़े दावे से कहते हैं कि खुद को निर्दोष साबित करने के लिए उनके पास बहुत सारे सबूत हैं।