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जेल से रिहा होकर डॉ. काफिल बोले- ‘बच्चों के लिए ऑक्सीजन सिलेंडर लाना क्या गुनाह था?’

Mon, 30 Apr 2018 01:45 PM IST
बीबीसी, हिन्दी
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पिछले साल अगस्त में गोरखपुर के बीआरडी मेडिकल कॉलेज में कथित तौर पर ऑक्सीजन की कमी के कारण कई बच्चों की मौत हुई थी। इस मामले में अस्पताल के नवजात शिशु विभाग के वार्ड सुपरिटेंडेंट रहे डॉक्टर कफील खान को गिरफ्तार किया गया था। उन्हें लखनऊ में इस मामले की जांच के लिए बनाए गए स्पेशल टास्क फोर्स ने दो सितंबर को गिरफ्तार किया। बीते बुधवार को उन्हें इलाहाबाद हाईकोर्ट ने जमानत दे दी है। डॉक्टर कफील खान को पिछले साल दो सितंबर को लापरवाही बरतने के आरोप में गिरफ्तार किया गया था। उन पर ये भी आरोप था कि वो अपनी पत्नी के क्लीनिक में प्राइवेट प्रेक्टिस करते हैं।

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इस पूरे मामले में 9 लोगों को गिरफ्तार कर जेल भेजा गया था। जिसमें से ऑक्सीजन सप्लाई करने वाली कंपनी के मालिक को भी जमानत मिल चुकी है। जमानत पाने के लिए कफील के परिवार ने आठ महीनों में छह बार याचिकाएं दाखिल की थीं जो निचली अदालत से नामंजूर होती रहीं। इसके बाद उनके परिवार ने हाईकोर्ट में अपील की। जेल से जमानत पर बाहर आए डॉक्टर कफील से बीबीसी संवाददाता आदर्श राठौर ने बात की।

तकरीबन आठ महीने तक जेल में रहने वाले डॉक्टर कफील कहते हैं कि यह काफी बुरा अनुभव था, जेल में स्थितियां काफी अमानवीय हैं, एक सेल में 150 से अधिक लोग रहते हैं जो कि बहुत डरावना है और जब जेल से निकलकर आया तो मानसिक रूप से काफी थका हुआ था। वह कहते हैं, "जब कोई गुनाह किया हो तो लगता है कि चलो गुनाह किया है लेकिन मेरा दिल बार-बार पूछता था कि मैंने क्या गुनाह किया है कि जो मैं यहां हूं। बच्चों की जान बचाने के लिए ऑक्सीजन सिलेंडर लाना क्या गुनाह था? मेरा दिल कहता था कि तुमने कोई गलती नहीं की है। शायद अल्लाह परीक्षा ले रहा है।"

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'800 की क्षमता वाली जेल में दो हजार लोग'

- फोटो : ANI
कफील जेल के अनुभवों पर विस्तार से कहते हैं कि 150 से अधिक कैदियों के लिए एक टॉयलेट होता था जो कि काफी गंदा होता था। वह बताते हैं कि 800 से अधिक कैदियों की क्षमता वाली जेल में दो हजार से अधिक कैदी थे। जेल से बाहर आने पर लोगों की क्या प्रतिक्रिया थी? इस सवाल पर उन्होंने कहा कि जेल से बाहर आने के बाद उन्हें यकीन नहीं हुआ कि इतने सारे लोग उन्हें लेने आएंगे।

वह कहते हैं, "इसमें से कुछ वे लोग भी थे जो अपने बच्चों को खो चुके थे। सरकार ने मुझ पर जो आरोप लगाए हैं उस पर हाईकोर्ट के माननीय न्यायाधीश यशवंत वर्मा ने खुद बोला है कि सरकार सबूत नहीं पेश कर पाई इसलिए मुझे जमानत दी जा रही है।" बीआरडी मेडिकल कॉलेज की घटना के बाद ऐसी खबरें आई थीं कि कफील ने खुद से ऑक्सीजन सिलेंडर मुहैया कराए थे। 

इस पर कफील कहते हैं, "मुझ पर आपराधिक धाराएं लगाई गई हैं और मैंने उन्हें सबूत दिए की कैसे-कैसे ऑक्सीजन सिलेंडर मुहैया कराए थे।" उन्होंने आगे कहा कि सरकार का कहना था कि ऑक्सीजन खत्म ही नहीं हुई थी, अगर ऐसे हुआ था तो उन्होंने ऑक्सीजन मुहैया कराने वाली कंपनी के मालिक को जेल में क्यों डाला था?
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'सात महीने तक इंतजार किया'

प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाते हुए कफील ने कहा कि ऑक्सीजन सप्लाई करने वाली कंपनी का बकाया नहीं चुकाया जा रहा था जिसके बाद प्रशासन के पास उसके बिल घूमते रहे और कोई इस पर चिंतित नहीं था कि बिल जमा करना है। आगे उनकी क्या तैयारी है? वह कहते हैं कि वह सात महीने तक इंतजार करते रहे और गिरफ्तारी तक उन्होंने किसी के खिलाफ कुछ नहीं बोला, लेकिन जब ऑक्सीजन मुहैया कराने वाले मालिक की जमानत हो गई तो उन्हें लगा कि अब बोलना पड़ेगा।

वह कहते हैं, "इसके बाद मेरे परिवार ने फैसला लिया कि अब हमें सच बताना होगा। यह लंबी लड़ाई है और मैं इसके लिए तैयार हूं।" कफील बड़े दावे से कहते हैं कि खुद को निर्दोष साबित करने के लिए उनके पास बहुत सारे सबूत हैं।
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