चेन्नई के कावरापेट़्टई रेलवे स्टेशन के पास हुए ट्रेन हादसे के बाद रेलवे ट्रैक की मरम्मत का काम पूरा कर लिया गया है। शनिवार रात को यहां से पहली ट्रेन गुजारी गई। मैसूर-दरभंगा बागमती एक्सप्रेस के मालगाड़ी से टकराने के बाद 12 डिब्बे पटरी से उतर गए थे। इसके बाद रेलवे की टीमों ने ट्रैक को बहाल करने का काम शुरू कर दिया था।
मैसूर से दरभंगा जा रही बागमती एक्सप्रेस (12578) तमिलनाडु के कावरापेट्टई स्टेशन के पास मालगाड़ी से टकरा गई थी। इस हादसे में कई लोग घायल हुए। इसके बाद रेलवे ने घटना की उच्च स्तरीय जांच के आदेश दिए हैं। इसके साथ ही दुर्घटनास्थल पर ट्रैक को बहाल करने का काम जोरों पर किया। रेलवे ने कहा कि ट्रेन नंबर 12434 (चेन्नई राजधानी एक्सप्रेस) रात 9.15 बजे कावरईपेट्टई रेलवे स्टेशन अप मेनलाइन से गुजरी। पहली ट्रेन को 10 किमी प्रतिघंटा की गति से गुजारा गया।
रेलवे के मुताबिक पटरी से उतरे कोच को फिर से पटरी पर लाने के लिए टोंडियारपेट हेवी ड्यूटी री-रेलिंग उपकरण से 5 भारी अर्थ मूवर्स, 3 जेसीबी, 140 टन क्रेन (2 संख्या) को तैनात किया था। इसकी मदद से कुछ डिब्बों को फिर से पटरी पर लाया गया, जबकि अन्य डिब्बे जिन्हें पटरी पर नहीं लाया जा सका, उन्हें ट्रैक की बहाली में मदद के लिए मेन लाइन से हटा दिया गया।
दक्षिण रेलवे के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी एम सेंथामिल सेलवन ने कहा कि बंगलूरु के दक्षिणी सर्किल के रेलवे सुरक्षा आयुक्त एएम चौधरी ने शनिवार को मौके पर पहुंचकर ट्रैक, प्वाइंट और ब्लॉक, सिग्नल, स्टेशन इलेक्ट्रॉनिक इंटरलॉकिंग सिस्टम, कंट्रोल पैनल और अन्य महत्वपूर्ण सुरक्षा, सिग्नल और परिचालन पहलुओं का निरीक्षण किया। इसके बाद दक्षिण रेलवे के वरिष्ठ अधिकारियों ने मामले की गहराई से जांच शुरू कर दी है।
कैसे हुआ था हादसा
दक्षिण रेलवे के महाप्रबंधक आरएन सिंह ने हादसे के बारे में बताया था कि कर्नाटक के मैसूर से बिहार के दरभंगा तक जाने वाली बागमती एक्सप्रेस कावरापेट्टई स्टेशन से गुजर रही थी, उसी समय एक मालगाड़ी लूप लाइन पर खड़ी थी। बागमती एक्सप्रेस को बिना रुके मुख्य लाइन से गुजरना था। मुख्य लाइन के लिए सिग्नल भी दिए जा चुके थे। इसके बावजूद ट्रेन लूप लाइन में घुस गई। लूप लाइन पर खड़ी मालगाड़ी से पीछे से टकराने के बाद इंजन समेत 12 डिब्बे पटरी से उतर गए। लोको पायलट और सहायक लोको पायलट दोनों सुरक्षित हैं।