चुनावी वर्ष में जाने से पहले भाजपा-नीतीश राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) अपना घर दुरुस्त कर लेना चाहता है। हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा (हम) के बाद तेलुगू देशम पार्टी (टीडीपी) की विदाई से गठबंधन में बिखराव की आशंका है। जिसे देखते हुए भाजपा नेतृत्व ने सहयोगियों को साधे रखने और गठबंधन को मजबूत बनाने की कवायद शुरू कर दी है।
इस क्रम में मंगलवार को पार्टी महासचिव भूपेंद्र यादव और केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान लोजपा प्रमुख रामविलास पासवान से मिले। पासवान से मिलकर उन्होंने गिले-शिकवे दूर किए तो वहीं पार्टी अध्यक्ष अमित शाह ने 10 अप्रैल को लखनऊ जाकर सहयोगियों से सीधी चर्चा करने का आश्वासन दिया है। दरअसल गोरखपर-फूलपुर के नतीजे आने के बाद कई सहयोगी दलों ने भाजपा पर अपनी उपेक्षा का आरोप लगाया।
नाराजगी के बीच पासवान ने भी सहयोगियों की सलाह दरकिनार करने का आरोप लगाया।
शिवसेना और रालोसपा भाजपा से अरसे से नाराज चल रही हैं। हम पार्टी उपेक्षा का आरोप लगाते हुए राजग से पहले ही नाता तोड़ चुकी है। सहयोगियों की नाराजगी गठबंधन में बिखराव का सियासी संदेश दे रही है, वहीं विपक्ष लगातार एकजुट होने की कोशिश कर रहा है।
ऐसे में भाजपा अध्यक्ष
अमित शाह ने अब नई रणनीति के तहत खुद सहयोगियों को मनाने का जिम्मा उठाया है। इसी क्रम में उन्होंने भूपेंद्र और धर्मेंद्र को पासवान को मनाने भेजा था। जल्द ही पार्टी नेता रालोसपा प्रमुख उपेंद्र कुशवाहा से मुलाकात करेंगे। महाराष्ट्र इकाई को शिवसेना के खिलाफ आक्रामक बयानबाजी न करने का निर्देश दिया गया है। शिवसेना से सुलह के लिए जल्द ही केंद्रीय स्तर पर पहल की जाएगी।