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दीदी के 'अब कोई यूपीए नहीं है' वाले बयान से मचा बवाल: कांग्रेस ने ममता को घेरा, अधीर रंजन बोले- भारत का मतलब बंगाल नहीं है

Thu, 02 Dec 2021 11:47 AM IST
मुकेश कुमार झा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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ममता बनर्जी की फाइल फोटो - फोटो : अमर उजाला
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पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के 'अब कोई यूपीए नहीं है' वाले बयान पर सियासी घमासान मच गया है। कांग्रेस नेताओं ने 'दीदी' के इस बयान पर तीखी प्रतिक्रियाएं व्यक्त की हैं। इस क्रम में राज्यसभा में नेता विपक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने कहा कि हमने ऐसे कई सामाजिक और आर्थिक मुद्दों पर टीएमसी को साथ लेने का प्रयास किया। विपक्ष को बंटना नहीं चाहिए। अपनेआप में लड़ने की बजाय हमें एक होकर भाजपा का मुकाबला करना चाहिए। इससे पहले केसी वेणुगोपाल ने कहा था कि कांग्रेस के बिना भाजपा को हराने की बात करना एक सपना है और इसे कोई भी देख सकता है। उन्होंने बुधवार को ममता बनर्जी को पीएम फेस के तौर पर प्रोजेक्ट करने की टीएमसी की महत्वाकांक्षाओं पर टिप्पणी की थी।

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भारत का मतलब बंगाल नहीं है- अधीर रंजन

उधर, कांग्रेस नेता अधीर रंजन चौधरी ने कहा है कि क्या ममता बनर्जी को नहीं पता यूपीए क्या है? मुझे लगता है कि उन्होंने पागलपन शुरू कर दिया है। वह सोचती हैं कि पूरे भारत ने 'ममता, ममता' का जाप करना शुरू कर दिया है। मगर भारत का मतलब बंगाल नहीं है और अकेले बंगाल का मतलब भारत नहीं है। पिछले बंगाल चुनावों से उनकी रणनीति धीरे-धीरे उजागर हो रही है। कांग्रेस नेता ने कहा कि पश्चिम बंगाल में भाजपा और ममता ने मिलकर जो सांप्रदायिक ध्रुवीकरण का सियासी खेल खेला वो सामने आ रहा है। भाजपा ने एनआरसी पर अपना रुख बदला, यह चुनाव के साथ समाप्त हुआ। एनआरसी का डर दिखाकर वे चुनाव में फायदा उठाना चाहते थे। इसलिए, ममता बनर्जी जो कुछ भी कहती हैं, भाजपा उससे सहमत है। 

पार्टी के बगैर यूपीए बिना आत्मा के शरीर जैसे पूर्व केंद्रीय मंत्री कपिल सिब्बल ने ट्वीट किया कि सदियों पुरानी कांग्रेस पार्टी के बगैर संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (यूपीए) बिना आत्मा के शरीर जैसा है। यह वक्त विपक्षी एकता दिखाने का है। सिब्बल को कांग्रेस नेतृत्व से असंतुष्ट गुट जी-23 का सदस्य माना जाता है। जी-23 के एक अन्य नेता आनंद शर्मा ने कहा कि कांग्रेस देश का मुख्य विपक्षी दल है तथा भाजपा को पराजित करने के किसी भी राष्ट्रीय कोशिश का मुख्य स्तंभ बनी हुई है। उन्होंने ट्वीट किया कि यह समय की जरूरत है कि भाजपा का विरोध करने और हराने के लिए धर्मनिरपेक्ष, प्रगतिशील और लोकतांत्रिक पार्टियों के बीच जनता के मुद्दों को लेकर व्यापक समझ एवं सहयोग हो. यह लोगों की आकांक्षाओं से भी जुड़ा है।
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मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह ने कहा कि कांग्रेस के बिना भाजपा के खिलाफ कोई भी राजनीतिक गठबंधन संभव नहीं है। जो हमारे साथ आना चाहते हैं, उन्हें आना चाहिए और जो नहीं चाहते वे ऐसा करने के लिए आजाद हैं। हमारी लड़ाई सत्तारूढ़ भाजपा के खिलाफ है। कांग्रेस को छोड़कर ज्यादातर दल भाजपा के साथ मिलकर सरकार बना चुके हैं।  
वहीं पार्टी प्रवक्ता पवन खेड़ा ने बनर्जी पर निशाना साधते हुए कहा कि क्षेत्रीय नेता का यह दावा बेतुका है कि यूपीए का अब कोई अस्तित्व नहीं है, जो यूपीए का हिस्सा ही नहीं है। उन्होंने कहा कि क्योंकि वह अमेरिका का नागरिक नहीं हैं, तो इसका अर्थ यह नहीं हुआ कि अमेरिका का अस्तित्व ही नहीं है। पार्टी महासचिव रणदीप सुरजेवाला ने कहा कि कांग्रेस प्रजातंत्र, सच्चाई, समरसता, भाईचारा और विविधता में एकता वाली पार्टी है। हमारी लड़ाई अकेले नरेंद्र मोदी से नहीं, उनकी विचारधारा, सोच से है। पार्टी और नेता इस लड़ाई को संकल्पबद्ध तरीके से बिना किसी डर, बिना झुके दबे लड़ते आए हैं और लड़ते रहेंगे।

पिछले 10 साल से कोई यूपीए नहीं है, हालात बदल चुके हैं : टीएमसी इस बीच तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) सांसद डेरेक ओब्रायन ने पार्टी प्रमुख ममता बनर्जी के यूपीए संबंधी बयान का बचाव किया है। उन्होंने कहा कि पिछले 10 साल से कोई संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (यूपीए) नहीं है। उन्होंने कहा कि यह पूरी तरह से सही है। यदि आप यूपीए का इतिहास देखेंगे तो 13 मई 2004 को चुनाव नतीजे आए। 16 या 17 मई को यूपीए का गठन हुआ। 22 मई को डॉ. मनमोहन सिंह ने प्रधानमंत्री पद की शपथ ली। यूपीए के गठन का मकसद बेहतर शासन देना था। यह 2014 तक जारी रहा। हकीकत में, न केवल पिछले एक साल बल्कि पिछले 10 सालों से कोई यूपीए नहीं है। शासन कुछ अन्य राजनीतिक दल द्वारा किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि देश के राजनीतिक माहौल की बात की जाए तो हालात बदल चुके हैं। 150 सांसदों वाली कांग्रेस अब 50 में सिमट गई। वाम मोर्चा 62 से छह पर आ गए। राजद 25 से जीरो पर आ गई है। परिस्थितियां बदल चुकी हैं। ऑल इंडिया तृणमूल कांग्रेस का एकमात्र मकसद भाजपा को राज्यों और केंद्र से उखाड़ फेंकना है। 

...भाजपा को हराना होगा आसान- ममता
गौरतलब है कि बुधवार को ममता बनर्जी ने मुंबई में एनसीपी प्रमुख शरद पवार से मुलाकात की थी। इसके बाद दीदी ने एक कार्यक्रम में कांग्रेस पर जमकर हमला बोला। उन्होंने कहा था कि देश में कुछ लोग भाजपा से लड़ नहीं रहे हैं। ममता ने यहां सिविल सोसायटी के कुछ सदस्यों से बातचीत में कहा कि अगर सभी क्षेत्रीय दल एक साथ आ जाते हैं तो भाजपा को हराना आसान होगा। उन्होंने कहा कि हम कहना चाहते हैं कि भाजपा हटाओ, देश बचाओ। उन्होंने कहा कि यदि कांग्रेस पार्टी बंगाल में चुनाव लड़ सकती है तो फिर टीएमसी गोवा में क्यों नहीं लड़ सकती। मैं भाजपा को राजनीतिक तौर पर इस देश से बाहर देखना चाहती हूं। यदि कांग्रेस बंगाल में लड़ सकती है तो फिर मैं गोवा में क्यों नहीं लड़ सकती? आपको भाजपा के खिलाफ मैदान में रहना होगा और लड़ना होगा वरना वह आपको बाहर फेंक देगी।

बता दें कि ममता बनर्जी का 'अब कोई यूपीए नहीं है' वाला बयान तब आया है जब कांग्रेस और टीएमसी नेताओं के बीच दूरियां तेजी से बढ़ी हैं और टीएमसी कांग्रेस की बैठक से दूरी बनाए हैं। मालूम हो कि 2004 से लेकर 2014 तक टीएमसी सहित कई अन्य पार्टियां यूपीए का हिस्सा थीं।  

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