कानपुर में बुधवार सुबह सियालदह-अजमेर ट्रेन दुर्घटना के भुगतभोगी अपने सदमेभरे सफर के बाद बुधवार आधीरात को जयपर और अजमेर पहुंचकर अपनों से लिपटे। चिंताग्रस्त परिजन और रिश्तेदारों की जयपुर और अजमेर रेलवे स्टेशनों पर भीड़ लगी हुई थी, जो दुखद समाचार के बाद ट्रेन में यात्रा कर रहे आपनों को देखने को बेताब थे। ट्रेन से उतरकर यात्री अपनो को देखकर दहशत से उबरे, तो लेने पहुंचे लोग उनकी कुशलता देखकर खुश थे।
वहीं, कुछ डेढ़ दर्जन यात्रियों के परिवार दुखी भी थे, जिनके लोग हादसे में घायल हुए थे। ट्रेन में जयपुर के 419 और अजमेर के 391 यात्री थी। कुल यात्रियों में से 15 यात्री घायल हुए हैं। इस ट्रेन का जयपुर पहुंचने का सामान्य समय मंगलवार रात 11.55 बजे था, लेकिन हादसे के बाद यात्री बुधवार रात को पहुंचे।
बर्थ से उछलना, एक-दूसरे से टकराना, नीचे गिरना...मानो मौत सामने है
- फोटो : अमर उजाला, कानपुर
यात्रियों ने दुर्घटनावाली रात का जो वर्णन किया, उसे सुनकर रोंगटे खड़े हो गए। यात्रियों ने बताया कि अंधेरा अभी छंटा नहीं था कि सुबह 5.30 बजे अचानक गड़गड़ाहट हुई, जबर्दस्त झटकों से यात्री बर्थ से उछलकर गिरे, एक-दूसरे से टकराए...ऐसा लगा मानो मौत सामने खड़ी है। भीलवाड़ा के महेन्द्र पटोदी ने बताया कि वे ऊपर की बर्थ पर सो रहे थे।
जोरदार झटके से वे उछलकर सामनेवाली बर्थ से टकराए और नीचे आ गिरे। उनके हाथ की हड्डी टूट गई। 75 वर्षीय अंजना देवी ने बताया कि वे लोअर बर्थ पर सो रही थीं। अचानक जोरदार झटके लगने लगे और आवाजें होने लगीं। वे भी उछलकर सामनेवाली बर्थ से टकराकर नीचे गिर गईं। उन्हें मामूली चोटें आई हैं।
पटरी छोड़कर कोच पलट चुका था...अंधरे में सभी अपनों को तलाश रहे थे
जयपुर की ममता और महिमा जैन ने बताया कि हादसे के बाद का मंजर बहुत भयावह था। कई कोच पटरी छोड़कर अलग ही खड़े हुए थे, तो कुछ पलटे हुए थे। कई अंधेरे में ही सुध-बुध खोए अपनों की तलाश में जुटे हुए थे। चारों ओर चीख-पुकार मची हुई थी। महिमा ने बताया कि उनकी पीठ में चोट आई है।
इधर, जयपुर के ही अशोक जैन ने बताया कि उनका कोच पटरी छोड़कर पलट गया था। सभी गिर रहे थे, वे भी गिर गए उनके सिर में चोट आई और पैर की हड्डी टूट गई। सभी ने कहा कि पहले झटके में ही सभी यात्रियों को हादसे का अंदेशा हो चुका था। लेकिन पहले झटके बाद से ही सम्भलने का मौका नहीं मिला।