कोरोना की वैक्सीन और दवा ट्रायल को लेकर 30 अलग-अलग वैज्ञानिकों के समूह अध्ययन में जुटे हैं। एक सप्ताह पहले ही केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री डॉ हर्षवर्धन ने बताया था कि करीब चार वैक्सिंग ट्रायल अगले 3 से 4 सप्ताह में अगले पेज में जाने वाले हैं। जिसे एनिमल ट्रायल के रूप में जाना जाता है। पुणे की लैब में इन्हीं अध्ययनों पर तेजी से काम चल रहा है।
बंदरों से वीरोसेल लेकर कोरोना की जांच
हैदराबाद स्थित सीसीएमबी के निदेशक डॉ. राकेश मिश्रा का कहना है कि अफ्रीका में पाए जाने वाली बंदरों की प्रजाति की किडनी से लिए जाने वाले वीरो सेल का इस्तेमाल कोरोना वायरस की जांच में हो रहा है, क्योंकि यह वायरस लंबे समय तक लैब में जिंदा नहीं रहता है। हैदराबाद में एक अध्ययन भी किया गया था कि जिसके बाद वीरो ई6 सेल का नाम दिया गया था।