लोकसभा के बाद राज्यसभा में भी सांसदों पर कार्रवाई की गई है। संसद के उच्च सदन के 45 सांसदों को पूरे सत्र के लिए निलंबित कर दिया है। निलंबन बचे हुए शीतकालीन सत्र पर प्रभावी रहेगा। बताया गया कि राज्यसभा के 34 सांसदों को बचे हुए शीतकालीन सत्र के लिए निलंबित कर दिया गया है। इसके अलावा 11 सांसदों के निलंबन के मामले को विशेषाधिकार समिति को भेज दिया गया है। इसकी रिपोर्ट आने तक ये 11 सांसद सदन की कार्यवाही में हिस्सा नहीं ले पाएंगे। इससे पहले लोकसभा की कार्यवाही में बाधा डालने के लिए सोमवार को 33 विपक्षी सांसदों को सदन से निलंबित कर दिया गया था।
राज्यसभा में सोमवार को चार बार कार्यवाही बाधित होने के बाद भी जब हंगामा नहीं थमा, तो नेता सदन पीयूष गोयल ने नियम 256 के तहत निलंबन का प्रस्ताव पेश किया जिसे सदन ने पारित कर दिया। चार बार स्थगन के बाद कार्यवाही शुरू हुई तो भी हंगामा नहीं थमा। तब सभापति ने कहा कि वह सदस्यों से अपील करते हैं कि अपने स्थान पर जाए। इसके बाद उन्होंने कांग्रेस सांसद शक्ति सिंह गोहिल से कहा पहले सीट पर जाए, इसके बाद उन्होंने रणदीप सिंह सुरजेवाला, रंजीत रंजन, जेपी मथेर से कहा कि ऐसे चिल्लाना शोभा नहीं देता। उन्होंने कहा कि सदस्यों के कदाचार के कारण ही वह सख्त कदम उठाने को बाध्य हुए हैं। इसके बाद 34 सांसदों को शेष सत्र और 11 को दोबारा प्रस्ताव लाकर आचार समिति की रिपोर्ट आने तक के लिए निलंबित कर दिया गया।
सदन की गरिमा को ठेस पहुंचा रहा विपक्ष
सांसदों के हंगामे से नाराज राज्यसभा के सभापति जगदीप धनखड़ ने कहा कि वह बेहद आहत हैं। विपक्षी सदस्यों के हंगामे ने उच्चसदन की गरिमा को गिरा दिया है। वहीं, लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने कहा कि संसद की सुरक्षा जैसे मुद्दे पर भी राजनीति होना बेहद दुखद है। उन्होंने कहा, विपक्ष के व्यवहार ने संसदीय परंपराओं को दरकिनार कर दिया है। बार-बार अनुरोध के बाद भी आसन का अपमान किया है। सदन के नियमों और गरिमा का भी पालन नहीं किया है।
इन राज्यसभा सांसदों को किया गया निलंबित
इन 11 राज्यसभा सांसदों के निलंबन का मामला विशेषाधिकार समिति को भेजा गया
लोकसभा में भी हुई कार्रवाई
इससे पहले लोकसभा के जिन सांसदों पर निलंबर की गाज गिरी है, उनमें से 30 को बचे हुए शीतकालीन सत्र के लिए निलंबित कर दिया गया है। इसके अलावा तीन अन्य सांसदों को विशेषाधिकार समिति की रिपोर्ट लंबित रहने तक निलंबित कर दिया गया है। इनमें के. जयकुमार, विजय वसंत और अब्दुल खालिक शामिल हैं। ये सभी नारे लगाने के लिए अध्यक्ष के आसन पर चढ़ गए थे।
अब तक 92 सांसद सस्पेंड
इससे पहले गुरुवार को दोनों सदनों के 14 सांसदों को निलंबित कर दिया गया था। इसमें लोकसभा के 13 और राज्यसभा के एक सांसद शामिल थे। इस तरह अब तक दोनों सदनों के 92 सांसदों पर निलंबन की कार्रवाई की जा चुकी है।
हंगामा करना उनकी पूर्व नियोजित रणनीति थी: पीयूष गोयल
शीतकालीन सत्र के शेष समय के लिए राज्यसभा से कई विपक्षी सांसदों के निलंबन पर राज्यसभा में सदन के नेता पीयूष गोयल ने प्रतिक्रयिा दी। उन्होंने कहा कि 34 सांसदों को निलंबित कर दिया गया है। 11 सांसदों का मामला विशेषाधिकार समिति को भेजा गया है। आज कुल 45 राज्यसभा सांसदों को निलंबित कर दिया गया है। वे नहीं चाहते थे कि सदन सुचारू रूप से चले, ये उनकी पूर्व नियोजित रणनीति थी।
खरगे ने डेरेक का निलंबन वापसी को लेकर लिखा पत्र
राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खरगे ने सभापति जगदीप धनखड़ को पत्र लिखकर तृणमूल सांसद डेरेक ओ’ब्रायन का निलंबन रद्द करने का आग्रह किया। खरगे ने कहा, तृणमूल नेता संसद में सुरक्षा उल्लंघन के मुद्दे पर गृहमंत्री से बयान की मांग कर रहे थे। वह आपका ध्यान आकर्षित करने की कोशिश कर रहे थेे।
राजीव गांधी के समय 63 सांसद हुए थे निलंबित
राज्यसभा ने सोमवार को एक सत्र में सांसदों के निलंबन के मामले में नया रिकॉर्ड बनाया तो वर्तमान लोकसभा ने बीती लोकसभा के अंतिम सत्र को इस मामले में पीछे छोड़ दिया। राज्यसभा में अब तक 46 सांसदों पर निलंबन की गाज गिरी है। अतीत में उच्च सदन में इतनी बड़ी कार्रवाई कभी नहीं हुई।
- लोकसभा में सर्वाधिक 63 सांसदों का निलंबन 1989 में राजीव गांधी सरकार के कार्यकाल में हुआ था। तब इंदिरा गांधी की हत्या पर ठक्कर आयोग की रिपोर्ट संसद में रखे जाने की मांग को लेकर हंगामा हुआ था।
- बीती लोकसभा में स्पीकर सुमित्रा महाजन ने बजट सत्र में दो दिनों में 45 सांसदों को निलंबित किया था। वर्तमान सत्र में 46 सांसद निलंबित हो चुके हैं। टकराव और बढ़ा तो संख्या बढ़ सकती है, क्योंकि 4 कार्यदिवस बाकी हैं।
- स्पीकर मीरा कुमार ने 13 फरवरी 2014 को आंध्रप्रदेश के बंटवारे पर हंगामे के बीच 18 सांसदों को निलंबित किया था। इनमें सत्तारूढ़ कांग्रेस के एल राजगोपाल भी भी थे, जिन्होंने सदन में मिर्च स्प्रे किया था।
- अगस्त 2015 में स्पीकर सुमित्रा महाजन ने कांग्रेस के 25 सांसदों को निलंबित कर दिया था। सुमित्रा ने 2019 में टीडीपी-अन्नाद्रमुक के 45 सांसदों को निलंबित किया था। 2021 में कृषि कानून पर हंगामा करने में राज्यसभा के 12 और 2022 में 19 सांसद निलंबित हुए थे।