टीआरएफ को लेकर संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट के बाद साफ हो गया है कि ऑपरेशन सिंदूर के बाद पाकिस्तानी आतंकवादी संगठनों ने नए नामों और छद्म संगठनों (फ्रंट ऑर्गनाइजेशंस) के जरिये अपनी गतिविधियों को फिर से शुरू कर दिया है।
भारतीय और अंतरराष्ट्रीय खुफिया रिपोर्टों के अनुसार जैश-ए-मोहम्मद, लश्कर-ए-तैयबा और तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (टीटीपी) जैसे संगठनों ने न केवल अपनी पुरानी संरचनाओं को पुनर्गठित किया है बल्कि सामाजिक धार्मिक संगठनों, मदरसों, मेडिकल ट्रस्ट, राहत संस्थानों और युवा संगठनों की आड़ लेकर काम शुरू कर दिया है ताकि अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों और निगरानी से बचा जा सके। मालूम हो कि संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की सेंक्शंस मॉनिटरिंग टीम की तरफ से ग्लोबल टेररिस्ट संगठनों पर बुधवार को जारी रिपोर्ट में पहलगाम हमले के लिए द रेजिस्टेंस फ्रंट (टीआरएफ) को जिम्मेदार ठहराया गया है। कराची के बाहरी क्षेत्रों में लश्कर-ए-तैयबा ने अल-इस्लाह ट्रस्ट संस्था के माध्यम से भर्ती अभियान चलाया है। वहीं टीटीपी ने बाजौर और मीरानशाह जैसे इलाकों में पश्तून शौरियत के नाम पर युवाओं को हथियारबंद संघर्ष के लिए प्रेरित करना शुरू किया है। रॉ और सिग्नल इंटेलिजेंस यूनिट (सिगइंट) द्वारा इंटरसेप्ट किए गए संदेशों में पाया गया है कि जैश और लश्कर जैसे संगठन यूट्यूब चैनलों, टेलीग्राम ग्रुप्स और व्हाट्सएप नेटवर्क्स के जरिये भारत को मिटाने और गजवा-ए-हिंद जैसे नारों से युवाओं को भारत के विरुद्ध भड़काने में लगे हैं।
ये भी पढ़ें: CRIB Blood Group: दुनिया का पहला सीआरआईबी एंटीजेन रक्त समूह भारत में मिला, कर्नाटक की महिला का है ब्लड ग्रुप
जैश-ए-मोहम्मद इनके जरिए फैला रहा आतंक
अल रहमत ट्रस्ट : यह जैश-ए-मोहम्मद का धार्मिक और सामाजिक चेहरा है जो पाकिस्तान के पंजाब और बलूचिस्तान से सटे सीमा क्षेत्र में विशेष रूप से सक्रिय है। भारत में आतंकवादी भेजने के लिए फंडिंग और भर्ती नेटवर्क का संचालन यही संस्था करती है।
जमात-उल-फजा: ऑपरेशन सिंदूर के बाद प्रशिक्षित युवाओं को सक्रिय बनाए रखने के लिए जैश-ए-मोहम्मद ने यह नया नाम अपनाया है। पीओके और खैबर पख्तूनख्वा में विशेष रूप से सक्रिय है। इसका कार्य आतंकियों को दोबारा संगठित करना और उन्हें भारत विरोधी अभियानों के लिए तैयार करना है।
तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (टीटीपी) की शाखाएं और विभाजन
जमात-उल-अहरार (जुआ): भारत की खुफिया रिपोर्टों में इसका नाम पंजाब और कश्मीर को निशाना बनाने की योजनाओं में सामने आया है।
शहरीन-ए-हिंद कमेटी: यह हाल ही में उभरा हुआ समूह है जो गजवा-ए-हिंद की कट्टर इस्लामी विचारधारा को भारत में फैलाने का प्रयास कर रहा है।
खुरासान ब्रिगेड: यह विशेष इकाई भारत और बांग्लादेश जैसे दक्षिण एशियाई देशों को लक्षित करने के लिए गठित की गई है।
ये भी पढ़ें: Hakimuddin Sheikh: पूर्व सैनिक के घर घुसी भीड़ पर FIR, पुलिस ने कहा- दस्तावेज जांच में कोई गड़बड़ी नहीं मिली
भारत ने तेज की निगरानी
भारतीय खुफिया एजेंसियों ने पोस्ट-सिंदूर काउंटर सर्विलांस डॉक्ट्रिन (पीएससीएसडी) के तहत आतंकियों की निगरानी और नेटवर्क ट्रैकिंग को और अधिक तेज कर दिया है। सीमावर्ती इलाकों में उच्च सक्रिय इलेक्ट्रॉनिक सर्वेलेन्स ग्रिड (एचएईएसजी) लगाया है जो पाकिस्तान के आतंकी रेडियो सिग्नलों को रीयल-टाइम में इंटरसेप्ट कर रहा है।
लश्कर-ए-ताइबा से जुड़े आतंकी संगठन और शाखाएं
फला-ए-इंसानियत फाउंडेशन (एफआईएफ) : यह लश्कर की प्रमुख छद्म संस्था है जो मानवीय सहायता, राहत शिविर और मेडिकल सहायता के कार्यों की आड़ में आतंकी फंडिंग का कार्य करती है।
तहरीक-ए-हुर्रियत वॉलंटियर नेटवर्क : यह इकाई सोशल मीडिया के माध्यम से हुर्रियत, मानवाधिकार और कश्मीर की आजादी जैसे मुद्दों की आड़ में भारत विरोधी प्रचार को बढ़ावा देती है।
अंसार-उल-उम्मा : यह लश्कर की नवीनतम इकाई है जो भारत में आत्मघाती हमलों के लिए विशेष रूप से प्रशिक्षित आतंकियों को तैयार कर रही है।