देश की सबसे बड़ी मर्डर मिस्ट्री आरुषि और हेमराज हत्याकांड में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सीबीआई की विशेष अदालत के फैसले को पलटते हुए आरुषि के पिता राजेश तलवार और मां नूपुर तलवार को बरी कर दिया है। कोर्ट ने उन्हें संदेह का लाभ देते हुए दोषी मानने से इंकार कर दिया।
बकौल अदालत- मामले में तलवार दंपति के खिलाफ सीबीआई पर्याप्त सबूत पेश नहीं कर पाई और केवल परिस्थितिजन्य साक्ष्यों के आधार पर किसी को हत्या जैसे संगीन मामले में दोषी नहीं माना जा सकता। साफ था कि सीबीआई ने तलवार दंपति के खिलाफ जो तथ्य और सबूत पेश किए वो इतने दमदार नहीं थे जिससे उन्हें दोषी माना जा सके।
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हाईकोर्ट के फैसले से बेशक तलवार दंपति की जेल से रिहाई का रास्ता साफ हो गया हो लेकिन आरुषि को न्याय मिलने की उम्मीद एक बार फिर अधूरी रह गई। उच्च न्यायालय के फैसले से एक बार फिर वही सवाल सामने खड़ा हो गया है जिसका जवाब नौ साल से पूरा देश मांग रहा है.... आखिर कातिल कौन?
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आखिर बंद घर में 14 साल की आरुषि की हत्या किसने की? और किसने चुपचाप आकर नौकर हेमराज का कत्ल करके शव छत पर फेंक दिया? सवाल ये भी है कि बंद घर में आखिर किसने चुपके से दो कत्ल कर दिए और किसी को कानों कान खबर तक नहीं लगी, बगल के कमरे में सो रहे मां बाप को भी नहीं। उससे भी बड़ा सवाल ये है कि आखिर देश के बड़े-बड़े मामलों को सुलझाने वाली देश की सबसे बड़ी जांच एजेंसी सीबीआई एक मासूम लड़की की हत्या में खाली हाथ कैसे रह गई?
इस मर्डर मिस्ट्री से वाकिफ होने के लिए एक बार फ्लैशबैक में जाना जरूरी है।
16 मई 2008 की रात को हुआ था आरुषि का मर्डर
तारीख- 16 मई 2008
जगह- नोएडा का जलवायु विहार
वारदात- एक 14 साल की लड़की की हत्या
आरोपी- पुलिस और सीबीआई की थ्यारी में उसके मां बाप
फैसला- सबूतों के अभाव में निचली अदालत से उम्रकैद की सजा पाए मां-बाप बरी
साल 2008 की झुलसाती गर्मी में 16 मई की दरम्यानी रात को हुए एक हैरतअंगेज हत्याकांड ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया, जब एक आठवीं में पढ़ने वाली डेंटिस्ट की बेटी की उसके घर में ही रहस्यमयी रूप से हत्या कर दी गई।
पुलिस ने जांच शुरू की, पहला शक नौकर हेमराज पर गया जो घटना के बाद से ही गायब था। इससे पहले की पुलिस एक कदम भी आगे बढ़ती अगले दिन की सुबह यानि 17 मई को नौकर हेमराज का खून से लथपथ शव पुलिस को घर की छत से मिल गया। अब पुलिस दोराहे पर थी, जिसे कातिल माना वो खुद कत्ल हो गया।
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नोएडा पुलिस ने जांच शुरू की तो शक की सुईं ऑनर किलिंग के एंगल पर अटक गई। आरुषि के गले पर जो घाव के निशान थे वो किसी चाकू के नहीं बल्कि किसी मेडिकल वेपन के माने गए। ऐसे में पुलिस का शक आरुषि के पिता पर गया जो खुद एक डेंटिस्ट थे। दूसरे, अगले दिन नौकर हेमराज का शव मिलना भी पुलिस के शक को पुख्ता कर गया, जिसकी हत्या काफी दर्दनाक तरीके से सिर पर कई वार करने से हुई थी।
पुलिस ने दावा किया की गोल्फ स्टिक से वार करके हेमराज की हत्या की गई है, इस दावे को बाद में सीबीआई ने भी सही माना। पुलिस ने हत्या के मामले में हेमराज के दोस्त नेपाल मूल के पूर्व नौकर विष्णु को भी हिरासत में लेकर पूछताछ की लेकिन कोई खास कामयाबी हाथ नहीं लगी। ज्यादा दबाव पड़ने पर यह मामला 1 जून 2008 को सीबीआई के हवाले कर दिया गया।
सीबीआई ने परिस्थितियों के आधार पर तलवार दंपति को बताया दोषी
लगभग तीन साल चली जांच में सीबीआई ने पूर्व नौकर कृष्णा, विष्णु और तलवार दंपति के नजदीकियों से पूछताछ की। तलवार दंपति का नार्को टेस्ट भी कराया गया। लेकिन ऐसा कोई पुख्ता सबूत हाथ नहीं लगा जो सीधे सीधे किसी को कातिल ठहरा सके।
बाद में सीबीआई ने विशेष अदालत के समक्ष जांच रिपोर्ट पेश करते हुए यह माना किसी तलवार दंपति के खिलाफ सीधे सीधे इस मामले में कोई सबूत नहीं हैं लेकिन मौका ए वारदात की परिस्थिति और हालात यही गवाही देते हैं तलवार दंपति ने ऑनर किलिंग में अपनी बेटी की हत्या की है।
विशेष अदालत ने इस मामले में लचर जांच के लिए सीबीआई को फटकार तो लगाई लेकिन उसकी दलील मान ली। जिसके बाद तलवार दंपति को आरोपी मानते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई गई।
आज इलाहाबाद हाईकोर्ट ने यह फैसला पलट दिया, और सिर्फ परिस्थितियों के आधार पर किसी को हत्या का दोषी मानने से इंकार कर दिया। जल्द ही तलवार दंपति की जेल से रिहाई भी हो जाएगी, लेकिन यह सवाल अधूरा रह जाएगा कि आखिर मासूम आरुषि की हत्या किसने की?