गुजरात चुनाव में कांग्रेस जिस तिकड़ी को जोड़कर चुनाव जीत की कड़ी मजबूत कर रही थी उसमें अल्पेश ठाकोर के बाद अगली कड़ी जुड़ने में अड़चन आ रही हैं। मंगलवार को दलित नेता जिग्नेश मेवाणी की राहुल गांधी से होने वाली संभावित मुलाकात फिलहाल टल गई है। हालांकि पार्टी नेता इसकी वजह इंदिरा गांधी से जुड़े कार्यक्रमों में राहुल की व्यस्तता बता रहे हैं।
कांग्रेस रणनीतिकार मान रहे थे कि अल्पेश की तरह हार्दिक पटेल और जिग्नेश मेवाणी भी कांग्रेस का साथ देंगे और हाथ भी थामेंगे। जबकि वर्तमान हालात में हार्दिक पटेल और जिग्नेश मेवाणी अपनी शर्तों पर ही कांग्रेस से जुड़ना चाहते हैं।
हार्दिक की तरह जिग्नेश भी कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी से तभी मिलना चाहते हैं जब उन्हें अपने समर्थकों का एजेंडा पूरा होता दिखेगा। हार्दिक की पाटीदारों के आरक्षण की पेंचीदा मांग और अब जिग्नेश की एससी-एसटी से जुड़ीं मांगे कांग्रेस नेताओं को उलझाए है। जातीय राजनीति में उलझकर कांग्रेस दूसरी जातियों की नाराजगी भी मोल नहीं लेना चाहती है।
अल्पेश ठाकोर के कांग्रेसी बैकग्राउंड होने का फायदा पार्टी नेताओं को मिला और सहजता से बातचीत और पार्टी में शामिल होने को तैयार हो गए। अब दोनों ही सामाजिक नेता अपने वजूद को भी बनाए रखना चाहते हैं। हार्दिक और जिग्नेश ने स्पष्ट कर दिया है कि वे कांग्रेस में शामिल नहीं होंगे। हालांकि दोनों नेता लगातार भाजपा के खिलाफ मोर्चा खोलने को कमर कसे हैं।
जिगनेश मेवाणी ने मंगलवार को ट्वीट कर राहुल गांधी से मुलाकात की खबरों का खंडन किया। उन्होंने भी हार्दिक के अंदाज में फेसबुक पर लिखा हैं कि मिलेंगे तो खुलकर मिलेंगे।
जिग्नेश ने लिखा है कि हम राहुल गांधी या किसी भी नेता से मिलेंगे तो अपने व्यक्तिगत लाभ के लिये नहीं बल्कि दलित समाज के जिन सवालों को लेकर गुजरात की भाजपा सरकार बात करने को तैयार नहीं उन सवालों पर कांग्रेस का पक्ष जानेंगे। दलितों से जुड़े मुद्दों पर कांग्रेस के स्टैंड के लिए ही मिलेंगे। उन्होंने भाजपा के प्रति नाराजगी जताते हुए कहा कि 22 साल में गुजरात की जनता को क्या मिला।