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निर्भया मामले में राष्ट्रपति दया याचिका खारिज होने पर भी दोषियों के पास मौजूद है ये विकल्प

Fri, 17 Jan 2020 05:09 PM IST
Harendra Chaudhary जितेंद्र भारद्वाज, अमर उजाला, नई दिल्ली
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nirbhaya case - फोटो : अमर उजाला
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निर्भया मामले को लेकर देशभर के लोग कुछ जानना चाहते हैं। चारों दोषियों को फांसी कब होगी, कैसे होगी और फांसी से बचने का क्या कोई विकल्प उनके पास मौजूद है, जैसे सवाल लोगों में जेहन में घूम रहे हैं। शुक्रवार को राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने निर्भया मामले के दोषी मुकेश की दया याचिका खारिज कर दी है।

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खास बात है कि दया याचिका खारिज होने के बाद जेल प्रशासन को अदालत से दोबारा डेथ वारंट लेना पड़ा है। जिसके बाद नई तारीख एक फरवरी मुकर्रर की गई है। इस प्रक्रिया के चलते दोषी की फांसी का समय कम से कम 14 दिन के लिए आगे बढ़ जाता है।

तिहाड़ जेल में बतौर लॉ अफसर 35 साल तक सेवाएं देने के बाद रिटायर हुए सुनील गुप्ता के अनुसार, अब निर्भया के दोषियों की फांसी फरवरी तक टल गई है। राष्ट्रपति जब फांसी की सजा मिले किसी दोषी की दया याचिका खारिज करते हैं, तो जेल प्रशासन को ब्लैक वारंट यानी डेथ वारंट दोबारा से लेना पड़ता है। इसके लिए जेल की ओर से अदालत के समक्ष फाइल भेजी जाती है। इस प्रक्रिया में भी 14 दिन लग जाते हैं।
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निर्भया मामले में अभी एक दोषी की दया याचिका खारिज हुई है। बाकी बचे तीनों दोषी यदि छोटे छोटे अंतराल के बाद दया याचिका लगाते हैं और उनकी याचिका भी राष्ट्रपति खारिज कर देते हैं, तो उस स्थिति में भी तिहाड़ प्रशासन को दोबारा से डेथ वारंट लेना होगा।

 

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